COP30 में भारत की भूमिका
ब्राज़ील के बेलें शहर में आयोजित COP30 लीडर्स समिट में भारत ने ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) में पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में भाग लिया। यह कदम पेरिस समझौते (2015) के एक दशक बाद उठाया गया है, जो वैश्विक जलवायु कार्रवाई की तात्कालिकता को दर्शाता है। भारत ने विकसित देशों से उत्सर्जन कटौती बढ़ाने और जलवायु वित्त से संबंधित वादों को पूरा करने का आग्रह किया। देश ने समानता (Equity) और साझा किंतु भिन्न जिम्मेदारियों (CBDR) के सिद्धांत पर जोर दिया।
स्थैतिक जीके तथ्य: भारत ने 2 अक्टूबर 2016 को पेरिस समझौते की पुष्टि की और उसी वर्ष अपनी पहली राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) प्रस्तुत की।
ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) क्या है
TFFF एक ब्राज़ील–नेतृत्व वाली वैश्विक वन वित्त पहल है जिसका लक्ष्य सार्वजनिक और निजी स्रोतों से $125 अरब जुटाना है। इसका मॉडल परिणाम–आधारित (Results-based) है — अर्थात्, जो देश अपने उष्णकटिबंधीय वनों का संरक्षण या विस्तार करेंगे, उन्हें वित्तीय प्रोत्साहन दिए जाएंगे। यह दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त में वादों से हटकर मापनीय परिणामों की ओर परिवर्तन का प्रतीक है।
स्थैतिक जीके टिप: उष्णकटिबंधीय वन भारत के कुल भूमि क्षेत्र का लगभग 7% कवर करते हैं और जैव विविधता तथा कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत की जलवायु उपलब्धियाँ
भारत ने जलवायु शमन और नवीकरणीय ऊर्जा में उल्लेखनीय घरेलू प्रगति प्रस्तुत की:
• 2005 से 2020 के बीच भारत ने अपने GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी की।
• देश की 50% से अधिक स्थापित विद्युत क्षमता गैर–जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आती है।
• वन और वृक्ष आवरण 25.17% तक बढ़ा, जिससे 2005–2021 के बीच 2.29 अरब टन CO₂ अवशोषित हुआ।
• भारत ने अपने संशोधित NDC लक्ष्य निर्धारित समय से 5 वर्ष पहले प्राप्त कर लिए।
• वर्तमान में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 200 GW है, जिससे यह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक देश है।
वैश्विक प्रभाव
TFFF में भारत की पर्यवेक्षक भूमिका यह संकेत देती है कि भारत अब वैश्विक वन वित्त तंत्र और जलवायु कूटनीति को आकार देने में अधिक सक्रिय भागीदारी निभाएगा। इसके संभावित लाभों में शामिल हैं:
• परिणाम–आधारित वन वित्त की दिशा में वैश्विक परिवर्तन को प्रोत्साहन।
• उष्णकटिबंधीय देशों के लिए सतत वित्तपोषण तक पहुँच में सुविधा।
• जलवायु न्याय (Climate Justice) को समर्थन, जो विकसित देशों की असमान जिम्मेदारी को उजागर करता है।
स्थैतिक जीके तथ्य: भारत कुल वन क्षेत्र के मामले में विश्व में 10वें स्थान पर है, जिसमें लगभग 4,992 वर्ग किमी मैंग्रोव वन शामिल हैं।
मुख्य निष्कर्ष
TFFF एक ब्राज़ील–नेतृत्व वाला $125 अरब का कोष है जो उष्णकटिबंधीय वनों के संरक्षण पर केंद्रित है। भारत ने नवंबर 2025 में COP30 में इसमें पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया। पेरिस समझौते के 10 वर्ष पूरे होने पर देश अब NDC 3.0 (2031–2035) प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं। भारत की भागीदारी ग्लोबल साउथ में शमन और अनुकूलन दोनों प्रयासों को संतुलित करते हुए वैश्विक जलवायु वित्त में उसकी आवाज़ को सशक्त बनाती है।
स्थैतिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| कोष का नाम | ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फैसिलिटी (TFFF) |
| कोष मूल्य | $125 अरब |
| भारत की भूमिका | पर्यवेक्षक (Observer) |
| COP सम्मेलन | COP30, बेलें, ब्राज़ील |
| पेरिस समझौता | 2015, 2025 में 10वीं वर्षगाँठ |
| भारत की उत्सर्जन कमी | GDP तीव्रता में 36% की कमी (2005–2020) |
| वन आवरण | भारत के क्षेत्र का 25.17%, 2.29 अरब टन CO₂ अवशोषित |
| नवीकरणीय ऊर्जा | 200 GW स्थापित क्षमता, विश्व में तीसरा स्थान |
| NDC चक्र | NDC 3.0 (2031–2035) |





