स्टील मंत्रालय
भारत ने स्पेशलिटी स्टील के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम 1.2 के तहत अपनी इंडस्ट्रियल पॉलिसी पर ज़ोर दिया है। हाल ही में, स्कीम के तीसरे राउंड के तहत 55 कंपनियों के साथ मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग के ज़रिए 85 प्रोजेक्ट्स को फॉर्मलाइज़ किया गया।
यह डेवलपमेंट घरेलू स्टील इकोसिस्टम में हाई-ग्रेड स्टील प्रोडक्शन और गहरे वैल्यू एडिशन की ओर एक स्ट्रेटेजिक बदलाव को दिखाता है।
जेनेसिस और पॉलिसी बैकग्राउंड
स्पेशलिटी स्टील के लिए PLI स्कीम 2021 में स्टील मंत्रालय द्वारा लॉन्च की गई थी। यह मैन्युफैक्चरिंग कॉम्पिटिटिवनेस को मज़बूत करने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए बड़े प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव फ्रेमवर्क का हिस्सा है।
यह स्कीम एडवांस्ड स्टील ग्रेड के इंक्रीमेंटल प्रोडक्शन के आधार पर कंपनियों को इंसेंटिव देती है। इसका मकसद सिर्फ़ आउटपुट बढ़ाना नहीं है, बल्कि भारतीय स्टील प्लांट्स को टेक्नोलॉजिकल रूप से अपग्रेड करना भी है।
स्टैटिक GK फैक्ट: ग्लोबल स्टील प्रोडक्शन रैंकिंग के मुताबिक, चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील प्रोड्यूसर है।
मकसद और स्ट्रेटेजिक महत्व
मुख्य मकसद स्पेशल स्टील ग्रेड की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है, जिन्हें ज़्यादातर इम्पोर्ट किया जाता है। ये हाई-एंड प्रोडक्ट्स डिफेंस, रेलवे, ऑटोमोबाइल, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
एडवांस्ड स्टील मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर, इस स्कीम का मकसद भारतीय स्टील इंडस्ट्री को ग्लोबल वैल्यू चेन में ऊपर ले जाना है। यह ज़रूरी मटीरियल में इम्पोर्ट पर निर्भरता को कम करके आत्मनिर्भर भारत के विज़न को भी सपोर्ट करता है।
फ़ोकस प्रोडक्ट की क्वालिटी, रिसर्च कैपेबिलिटी और एक्सपोर्ट पोटेंशियल को बेहतर बनाने पर है।
PLI 1.2 के तहत फ़ोकस एरिया
PLI 1.2 के तहत, इंसेंटिव उभरते और एडवांस्ड स्टील सेगमेंट की ओर दिए जाते हैं। इनमें शामिल हैं:
- एयरोस्पेस और डिफेंस में इस्तेमाल होने वाले सुपर एलॉय
- कोल्ड-रोल्ड ग्रेन-ओरिएंटेड (CRGO) स्टील, जो ट्रांसफॉर्मर के लिए ज़रूरी है
- स्टेनलेस स्टील के लंबे और फ्लैट प्रोडक्ट
- टाइटेनियम एलॉय
- कोटेड स्टील प्रोडक्ट
इन सेगमेंट के लिए हाई टेक्नोलॉजी और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड की ज़रूरत होती है। इन एरिया में घरेलू क्षमता इंडस्ट्रियल रेजिलिएंस को बढ़ाती है।
स्टैटिक GK टिप: CRGO स्टील का इस्तेमाल मुख्य रूप से पावर ट्रांसफॉर्मर में किया जाता है क्योंकि इसमें बेहतर मैग्नेटिक प्रॉपर्टी होती हैं।
इन्वेस्टमेंट और इंडस्ट्री का रिस्पॉन्स
तीसरे राउंड के तहत 55 कंपनियों के साथ 85 MoU पर साइन होना इंडस्ट्री की मज़बूत भागीदारी को दिखाता है। इस स्कीम से स्टील वैल्यू चेन में बड़ा कैपिटल इन्वेस्टमेंट आने और रोज़गार पैदा होने की उम्मीद है।
इंसेंटिव मैकेनिज्म बेस ईयर में इंक्रीमेंटल प्रोडक्शन को रिवॉर्ड देता है। इससे यह पक्का होता है कि सिर्फ़ असली कैपेसिटी बढ़ाने और टेक्नोलॉजिकल अपग्रेडिंग को ही फाइनेंशियल फायदे मिलें।
भारत का स्टील कंजम्पशन इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ से करीब से जुड़ा हुआ है। इसलिए, स्पेशलिटी स्टील मैन्युफैक्चरिंग को मज़बूत करने से नेशनल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को भी सपोर्ट मिलता है।
स्टेटिक GK फैक्ट: मिनिस्ट्री ऑफ़ स्टील का हेडक्वार्टर नई दिल्ली में है।
बड़ा इकोनॉमिक असर
स्पेशियलिटी स्टील प्रोडक्शन ग्लोबल मार्केट में अपनी प्रीमियम प्राइसिंग की वजह से ज़्यादा एक्सपोर्ट अर्निंग में मदद करता है। यह इंडियन मैन्युफैक्चरर्स को ग्लोबल सप्लाई चेन में भी जोड़ता है।
यह स्कीम मेक इन इंडिया और नेशनल स्टील पॉलिसी जैसी दूसरी इंडस्ट्रियल पॉलिसीज़ को पूरा करती है, जिनका टारगेट पर कैपिटा स्टील कंजम्प्शन को बढ़ाना है।
एडवांस्ड स्टील कैटेगरीज़ को बढ़ावा देकर, इंडिया खुद को रॉ मटेरियल एक्सपोर्टर के बजाय टेक्नोलॉजी-ड्रिवन मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर बना रहा है।
स्टैटिक उस्थादियन करंट अफेयर्स तालिका
| विषय | विवरण |
| घोषणा तिथि | 09 फरवरी 2026 |
| मुख्य फोकस | लघु किसानों के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली |
| लक्षित समूह | 89.4% लघु एवं सीमांत किसान |
| प्रमुख घटक | फसलें, पशुपालन, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन |
| प्रमुख योजना | राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन |
| सहायक योजना | राष्ट्रीय कृषि विकास योजना |
| जैविक संबंध | परंपरागत कृषि विकास योजना |
| अनुसंधान निकाय | आईसीएआर-एआईसीआरपी ऑन आईएफएस |
| कवरेज | 25 राज्यों में मॉडल |
| उद्देश्य | आय सुरक्षा और संसाधन दक्षता |





