भारत ने पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन पर साइन किए
भारत ने पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन और एक बाइलेटरल इंडिया-U.S. AI अपॉर्चुनिटी पार्टनरशिप स्टेटमेंट पर साइन करके ऑफिशियली पैक्स सिलिका इनिशिएटिव (2025) में शामिल हो गया। यह कदम भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के बीच स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन को मजबूत करता है।
यह इनिशिएटिव ट्रांसफॉर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी (TRUST) इनिशिएटिव के साथ अलाइन है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी उभरती टेक्नोलॉजी में कोऑपरेशन को गहरा करने की कोशिश करता है।
“पैक्स” शब्द ऐतिहासिक रूप से शांति और स्टेबिलिटी को दर्शाता है। इस कॉन्टेक्स्ट में यह भरोसेमंद पार्टनर्स के नेतृत्व में एक सुरक्षित और कोऑपरेटिव डिजिटल इकोनॉमिक ऑर्डर को दिखाता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: यूनाइटेड स्टेट्स गुड्स और सर्विसेज़ में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, और दोनों देश क्वाड जैसे मल्टीलेटरल फोरम के मेंबर हैं।
पैक्स सिलिका इनिशिएटिव क्या है
पैक्स सिलिका इनिशिएटिव एक US-लेड फ्रेमवर्क है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सिक्योर टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन पर फोकस करता है। यह सहयोगी और भरोसेमंद देशों के बीच नई इकोनॉमिक सिक्योरिटी सहमति को बढ़ावा देता है।
इसका मुख्य मकसद ज़रूरी टेक्नोलॉजी में ज़बरदस्ती की निर्भरता को कम करना है। यह AI सप्लाई चेन को सुरक्षित करने, कमज़ोरियों की पहचान करने और जॉइंट इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने की कोशिश करता है।
यह इनिशिएटिव सेंसिटिव टेक्नोलॉजी की सुरक्षा और भरोसेमंद डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर भी ज़ोर देता है। इसमें सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम, क्लाउड सिस्टम और AI कंप्यूटिंग कैपेबिलिटी में कोलेबोरेशन शामिल है।
इसमें शामिल देशों में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इज़राइल, जापान, कतर, रिपब्लिक ऑफ़ कोरिया, सिंगापुर, यूनाइटेड अरब एमिरेट्स और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं।
स्टैटिक GK टिप: जापान और ऑस्ट्रेलिया, भारत और यूनाइटेड स्टेट्स के साथ क्वाड ग्रुपिंग के प्रमुख पार्टनर हैं।
पैक्स सिलिका का लॉन्ग टर्म विज़न
यह लॉन्ग टर्म फ्रेमवर्क एडवांस्ड टेक्नोलॉजी फर्म वाले देशों को एक साथ लाने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य AI-ड्रिवन ग्लोबल इकॉनमी की क्षमता को अनलॉक करना है।
इस पहल का मकसद एक टिकाऊ इकोनॉमिक सिस्टम बनाना है जो AI से चलने वाली खुशहाली को बढ़ावा दे। मजबूत सप्लाई चेन बनाकर यह इकॉनमिक दबाव के रिस्क को कम करता है।
यह मॉडल केवल कॉस्ट एफिशिएंसी पर आधारित ग्लोबलाइज़ेशन से हटकर भरोसेमंद पार्टनरशिप और स्ट्रेटेजिक अलाइनमेंट पर आधारित ग्लोबलाइज़ेशन की ओर बदलाव को दर्शाता है।
भारत के लिए स्ट्रेटेजिक महत्व
मेंबरशिप से भारत की ज़रूरी सप्लाई चेन तक पहुँच मजबूत होती है। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा लिथियम एक्सपोर्टर है, जो रिचार्जेबल बैटरी और डिजिटल डिवाइस का अहम कंपोनेंट है।
रेअर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और डिफेंस इक्विपमेंट के लिए महत्वपूर्ण हैं। चीन REEs का प्रमुख सप्लायर है और ग्लोबल सप्लाई पर इसका काफ़ी असर है।
पैक्स सिलिका में शामिल होकर भारत सोर्सिंग डाइवर्सिफिकेशन कर सकता है और किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम कर सकता है। इससे इकोनॉमिक और नेशनल सिक्योरिटी मजबूत होती है।
यह पहल भारत में बड़े पैमाने पर AI और सेमीकंडक्टर इन्वेस्टमेंट के अवसर भी खोलती है। यह मेक इन इंडिया जैसी पहल के तहत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे सकती है और भारत के डिजिटल इनोवेशन इकोसिस्टम को सशक्त कर सकती है।
स्टेटिक GK फैक्ट: भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती डिजिटल इकॉनमी में से एक है और AI टैलेंट उपलब्धता में टॉप देशों में शामिल है।
पैक्स सिलिका के माध्यम से भारत बदलते हुए ग्लोबल AI ऑर्डर में एक भरोसेमंद टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| पहल का नाम | पैक्स सिलिका पहल (2025) |
| भारत की कार्रवाई | पैक्स सिलिका घोषणा पर हस्ताक्षर |
| प्रमुख साझेदारी | भारत–अमेरिका एआई अवसर साझेदारी |
| संबद्ध ढांचा | ट्रस्ट पहल |
| मुख्य फोकस | एआई आपूर्ति श्रृंखलाएँ और आर्थिक सुरक्षा |
| सामरिक लाभ | दुर्लभ मृदा तत्वों में चीन पर निर्भरता कम करना |
| उल्लेखित प्रमुख संसाधन | लिथियम और दुर्लभ मृदा तत्व |
| सहभागी राष्ट्र | अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, यूनाइटेड किंगडम, यूएई, सिंगापुर आदि |





