कचरा प्रबंधन नीति में बदलाव
भारत ने 27 जनवरी, 2026 को ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2026 अधिसूचित किए, जिन्होंने 2016 के पिछले ढांचे की जगह ले ली। ये नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू हो गए, जो कचरा प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव है। यह नीति वैज्ञानिक तरीके से कचरा अलग करने, डिजिटल निगरानी और कचरे के टिकाऊ निपटान के तरीकों पर केंद्रित है। यह घर, उद्योगों और स्थानीय निकायों में जवाबदेही को मज़बूत करती है। स्टैटिक GK तथ्य: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) पर्यावरण नीतियों के लिए ज़िम्मेदार है और इसकी स्थापना 1985 में हुई थी।
चार श्रेणियों में कचरा अलग करना
एक मुख्य सुधार यह है कि कचरा पैदा होने की जगह पर ही उसे चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य है। सभी घरों और संस्थानों को कचरे को गीले, सूखे, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे में अलग करना होगा। इस तरह से व्यवस्थित रूप से कचरा अलग करने से रीसाइक्लिंग की क्षमता बढ़ती है और लैंडफिल पर दबाव कम होता है। यह खतरनाक और सैनिटरी कचरे को ज़्यादा सुरक्षित तरीके से संभालने को भी सुनिश्चित करता है। यह कदम शहरी कचरा प्रबंधन की कुशल प्रणालियों से जुड़े वैश्विक तरीकों के अनुरूप है। यह कचरा पैदा होने की जगह पर ही उसके विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण को बढ़ावा देता है। स्टैटिक GK टिप: बायोडिग्रेडेबल कचरा प्राकृतिक रूप से सड़ जाता है, जबकि नॉन–बायोडिग्रेडेबल कचरा पर्यावरण में लंबे समय तक बना रहता है।
सर्कुलर इकॉनमी का दृष्टिकोण
ये नियम सर्कुलर इकॉनमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) की अवधारणा पर ज़ोर देते हैं, जिसमें कचरे का दोबारा इस्तेमाल, रीसाइक्लिंग और नए कामों के लिए उपयोग किया जाता है। इससे कच्चे माल पर निर्भरता कम होती है और पर्यावरण को होने वाला नुकसान भी कम से कम होता है। एक मुख्य विशेषता ‘बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों की बढ़ी हुई ज़िम्मेदारी‘ (EBWGR) की शुरुआत है। होटल, संस्थान और आवासीय परिसरों जैसे बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वालों को अपने कचरे के पूरे जीवनचक्र का प्रबंधन करना होगा। वे कचरा इकट्ठा करने, उसे अलग करने, उसका परिवहन करने और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से निपटान करने के लिए ज़िम्मेदार हैं। इससे कचरा प्रबंधन का बोझ नगर पालिकाओं से हटकर कचरा पैदा करने वालों पर आ जाता है। स्टैटिक GK तथ्य: सर्कुलर इकॉनमी की अवधारणा को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) जैसे वैश्विक स्थिरता ढांचों के माध्यम से प्रमुखता मिली।
डिजिटल निगरानी प्रणाली
सरकार ने कचरा प्रबंधन के लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली शुरू की है। कचरा इकट्ठा करने से लेकर उसके निपटान तक के सभी चरणों की डिजिटल रूप से निगरानी की जाएगी। यह प्रणाली वास्तविक समय (real-time) ट्रैकिंग करने में सक्षम बनाती है, जिससे पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में सुधार होता है। अधिकारी कमियों को तेज़ी से पहचान सकते हैं और जवाबदेही तय कर सकते हैं। डिजिटल एकीकरण शहरी स्थानीय निकायों और कचरा संसाधकों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करता है। यह डेटा–आधारित निर्णय लेने की क्षमता को भी बढ़ाता है। स्टेटिक GK टिप: भारत के डिजिटल शासन के प्रयासों को ‘डिजिटल इंडिया‘ जैसी पहलों का समर्थन प्राप्त है, जिसे 2015 में शुरू किया गया था।
औद्योगिक भागीदारी और RDF लक्ष्य
नए नियमों के तहत उद्योग एक अहम भूमिका निभाते हैं, खासकर ऊर्जा रिकवरी के क्षेत्र में। अब ‘रिफ्यूज़ डिराइव्ड फ़्यूल‘ (RDF) के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। मौजूदा 5% की प्रतिस्थापन दर को छह साल के भीतर बढ़ाकर 15% करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होती है और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है। सीमेंट प्लांट और ‘कचरे से ऊर्जा‘ (waste-to-energy) इकाइयाँ जैसे क्षेत्र इसमें मुख्य योगदानकर्ता हैं। यह भारत की जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं के भी अनुरूप है। स्टेटिक GK तथ्य: RDF को संसाधित शहरी ठोस कचरे से बनाया जाता है और इसका उपयोग एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जाता है।
स्थानीय निकायों की भूमिका
ये नियम शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों की ज़िम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं। उन्हें नियमों को लागू करने और उनकी निगरानी करने का काम सौंपा गया है। कचरा प्रसंस्करण इकाइयों के लिए ज़मीन के तेज़ी से आवंटन हेतु एक श्रेणीबद्ध प्रणाली शुरू की गई है। इससे बुनियादी ढांचे का विकास तेज़ी से सुनिश्चित होता है। बेहतर शासन तंत्र स्वच्छ शहरों और टिकाऊ कचरा प्रबंधन प्रणालियों को हासिल करने में मदद करेगा।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| अधिसूचना तिथि | 27 जनवरी 2026 |
| कार्यान्वयन तिथि | 1 अप्रैल 2026 |
| प्रमुख सुधार | चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण |
| कचरा श्रेणियाँ | गीला, सूखा, सैनिटरी, विशेष |
| नई अवधारणा | परिपत्र अर्थव्यवस्था दृष्टिकोण |
| जिम्मेदारी मॉडल | बड़े उत्पादकों के लिए EBWGR |
| डिजिटल विशेषता | केंद्रीकृत ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली |
| RDF लक्ष्य | 5% से बढ़ाकर 15% |
| शासकीय निकाय | MoEFCC |
| उद्देश्य | सतत और कुशल कचरा प्रबंधन |





