पवन ऊर्जा में ऐतिहासिक बढ़ोतरी
भारत ने FY 2025-26 में रिकॉर्ड 6.05 GW पवन ऊर्जा क्षमता जोड़कर एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। यह देश के इतिहास में अब तक की सबसे ज़्यादा सालाना बढ़ोतरी है।
यह बढ़ोतरी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 46% ज़्यादा है, जो नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मज़बूत गति को दिखाती है।
इस बढ़ोतरी के साथ, भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56 GW से ज़्यादा हो गई है, जिससे वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेता के तौर पर इसकी स्थिति और मज़बूत हुई है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत, चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाले शीर्ष देशों में से एक है।
इस उपलब्धि की मुख्य बातें
6.05 GW की बढ़ोतरी 2016-17 में दर्ज किए गए 5.5 GW के पिछले रिकॉर्ड को पार कर गई है। यह हरित ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में एक नए सिरे से किए जा रहे प्रयासों को दिखाता है।
भारत 2030 तक 500 GW गैर–जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ रहा है। इस बदलाव में पवन ऊर्जा की अहम भूमिका है।
यह बढ़ोतरी प्रोजेक्ट को लागू करने और नीतिगत सहायता तंत्रों में हुए सुधारों को भी दिखाती है।
बढ़ोतरी को बढ़ावा देने वाले कारक
कई नीतिगत पहलों ने इस तेज़ी से हो रहे विस्तार में योगदान दिया है। सरकार ने पवन टरबाइन के पुर्जों पर रियायती सीमा शुल्क जैसे प्रोत्साहन दिए हैं।
2028 तक इंटर–स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) शुल्कों में दी गई छूट से प्रोजेक्ट की लागत में काफ़ी कमी आई है। इससे इस क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
बेहतर ग्रिड कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे की तैयारी ने नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड में तेज़ी से जोड़ने में मदद की है।
पारदर्शी बोली प्रक्रियाओं ने प्रतिस्पर्धी दरों को भी सुनिश्चित किया है, जिससे पवन ऊर्जा और भी ज़्यादा आकर्षक बन गई है।
स्टेटिक GK टिप: पवन ऊर्जा एक नवीकरणीय स्रोत है जो टरबाइन के ज़रिए चलती हवा की गतिज ऊर्जा का इस्तेमाल करके पैदा की जाती है।
विस्तार में राज्यों की भूमिका
गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्य पवन ऊर्जा विकास में अग्रणी राज्यों के तौर पर उभरे हैं। ये क्षेत्र हवा के लिए अनुकूल स्थितियाँ और मज़बूत नीतिगत सहायता प्रदान करते हैं। वे भारत की कुल स्थापित क्षमता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और नवीकरणीय परियोजनाओं में निवेश आकर्षित करना जारी रखते हैं।
तटीय और पठारी क्षेत्रों का भौगोलिक लाभ पवन ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वैश्विक स्थिति और रणनीतिक महत्व
भारत अब पवन ऊर्जा के शीर्ष वैश्विक उत्पादकों में से एक है, जिसे दशकों के नीतिगत समर्थन और बुनियादी ढांचे के विकास का सहारा मिला है।
देश की पवन ऊर्जा यात्रा 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुई थी, और आज इसने एक मजबूत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर लिया है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विंड एनर्जी जैसे संस्थान इस क्षेत्र को तकनीकी और अनुसंधान सहायता प्रदान करते हैं।
कार्बन उत्सर्जन को कम करने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पवन ऊर्जा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अंतर्राष्ट्रीय जलवायु समझौतों के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं का भी समर्थन करती है।
आगे की राह
भारत को चौबीसों घंटे नवीकरणीय बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पवन–सौर हाइब्रिड परियोजनाओं में निवेश जारी रखना चाहिए।
विकास को बनाए रखने के लिए भंडारण प्रौद्योगिकियों को बढ़ाना और ग्रिड का आधुनिकीकरण करना आवश्यक होगा।
लगातार नीतिगत समर्थन और निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ, पवन ऊर्जा भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में एक प्रमुख स्तंभ बनी रहेगी।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| रिकॉर्ड वृद्धि | वित्त वर्ष 2025-26 में 6.05 गीगावाट की वृद्धि |
| वृद्धि दर | वर्ष-दर-वर्ष 46% वृद्धि |
| कुल क्षमता | 56 गीगावाट से अधिक |
| पिछला उच्च स्तर | 2016-17 में 5.5 गीगावाट |
| लक्ष्य | 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता |
| प्रमुख नीति समर्थन | ISTS शुल्क छूट 2028 तक |
| अग्रणी राज्य | गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र |
| प्रमुख संस्थान | राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान |
| ऊर्जा प्रकार | नवीकरणीय पवन ऊर्जा |
| महत्व | स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और ऊर्जा सुरक्षा |





