सौर क्षमता में रिकॉर्ड मील का पत्थर
भारत ने 2025-26 में 45 GW की अब तक की सबसे अधिक वार्षिक सौर क्षमता वृद्धि दर्ज की, जो उसकी नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में एक बड़ी छलांग है। राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य अनुकूल जलवायु और नीतिगत स्थितियों के कारण इसमें अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में उभरे।
मार्च 2026 तक देश की कुल सौर क्षमता 150.26 GW तक पहुँच गई, जो 2014 के मात्र 2.82 GW से एक बहुत बड़ी वृद्धि है। यह स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर भारत के तीव्र संक्रमण को दर्शाता है।
स्टेटिक GK तथ्य: अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा डेटा के अनुसार, भारत वर्तमान में सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है।
सौर विकास को गति देने वाले कारक
भारत को मजबूत भौगोलिक लाभ प्राप्त हैं, जहाँ प्रति वर्ष 300-330 दिन धूप खिली रहती है। औसत सौर विकिरण प्रति वर्ग मीटर प्रतिदिन 4-7 kWh के बीच रहता है, जो इसे सौर संयंत्रों की स्थापना के लिए अत्यधिक उपयुक्त बनाता है।
सरकारी पहलों ने इसे अपनाने की गति तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। PM सूर्य घर जैसी योजनाओं का उद्देश्य एक करोड़ परिवारों को रूफटॉप सोलर सिस्टम उपलब्ध कराना है, जिसमें दिसंबर 2025 तक 23.9 लाख घरों को पहले ही कवर किया जा चुका है।
स्टेटिक GK सुझाव: रूफटॉप सोलर सिस्टम पारेषण हानियों (transmission losses) को कम करते हैं और विकेंद्रीकृत ऊर्जा उत्पादन को सशक्त बनाते हैं।
प्रमुख सरकारी पहलें
कई प्रमुख योजनाओं ने सौर विस्तार को समर्थन दिया है। राष्ट्रीय सौर मिशन सौर ऊर्जा के विस्तार पर केंद्रित है, जबकि PM-KUSUM कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देता है।
सौर पार्क और अल्ट्रा–मेगा सौर ऊर्जा परियोजनाओं जैसी बड़े पैमाने की परियोजनाओं ने बुनियादी ढांचे और निवेश प्रवाह में सुधार किया है। उत्पादन–आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना ने घरेलू सौर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹52,900 करोड़ का निवेश आकर्षित किया है।
ये उपाय आयात पर निर्भरता को कम कर रहे हैं और वैश्विक सौर मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।
वैश्विक नेतृत्व और पहलें
भारत ने वैश्विक सौर सहयोग में नेतृत्व की भूमिका निभाई है। यह अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का संस्थापक सदस्य है, जिसका मुख्यालय गुरुग्राम में है; यह गठबंधन उष्णकटिबंधीय देशों के बीच सौर ऊर्जा को अपनाने को बढ़ावा देता है।
‘वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG)‘ पहल, जिसे 2018 में शुरू किया गया था, का उद्देश्य दुनिया भर में नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिड को आपस में जोड़ना है। इससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ती है और अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली का कुशल वितरण संभव हो पाता है।
स्टेटिक GK तथ्य: OSOWOG एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय बिजली ग्रिड की परिकल्पना करता है, जो मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से संचालित हो।
सौर ऊर्जा को समझना
सौर ऊर्जा को बिजली बनाने और हीटिंग के कामों के लिए सीधे सूर्य की रोशनी से प्राप्त किया जाता है। यह उपलब्ध सबसे टिकाऊ और प्रचुर ऊर्जा स्रोतों में से एक है।
इसके लिए मुख्य रूप से दो तकनीकों का उपयोग किया जाता है। सोलर फोटोवोल्टिक (PV) सिस्टम, सेमीकंडक्टर पदार्थों का उपयोग करके सूर्य की रोशनी को सीधे बिजली में बदलते हैं। वहीं, कंसंट्रेटेड सोलर पावर (CSP) तकनीक में, बड़े पैमाने के बिजली संयंत्रों के लिए तापीय ऊर्जा उत्पन्न करने हेतु सूर्य की रोशनी को केंद्रित करने के लिए दर्पणों का उपयोग किया जाता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| रिकॉर्ड वृद्धि | 2025-26 में 45 गीगावाट |
| कुल क्षमता | 150.26 गीगावाट (मार्च 2026) |
| वैश्विक रैंक | सौर क्षमता में तीसरा स्थान |
| प्रमुख राज्य | राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु |
| प्रमुख योजना | पीएम सूर्य घर |
| निवेश बढ़ावा | पीएलआई योजना के माध्यम से ₹52,900 करोड़ |
| प्रमुख पहल | अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन |
| वैश्विक दृष्टि | वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड |
| सौर प्रकार | फोटोवोल्टिक और सघन सौर |
| लाभ | उच्च सौर विकिरण और अधिक धूप वाले दिन |





