151 साल का भारत मौसम विज्ञान विभाग
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चार प्रमुख महानगरों में 200 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) लगाकर अपना 151वां स्थापना दिवस मनाया।
यह विस्तार भारत की शहरी मौसम निगरानी क्षमता को मजबूत करता है और रियल-टाइम डेटा संग्रह में सुधार करता है।
यह पहल सीधे तौर पर मिशन मौसम से जुड़ी है, जो देश भर में मौसम और जलवायु से संबंधित सेवाओं को मजबूत करने पर केंद्रित है।
अत्यधिक बारिश, लू और चक्रवाती प्रभावों के प्रति उनकी संवेदनशीलता के कारण शहरी केंद्रों को प्राथमिकता दी जाती है।
स्टेटिक जीके तथ्य: IMD भारत सरकार के सबसे पुराने वैज्ञानिक विभागों में से एक है, जिसकी स्थापना औपनिवेशिक काल के दौरान हुई थी।
IMD की उत्पत्ति और संस्थागत ढांचा
IMD की स्थापना 1875 में भारत की राष्ट्रीय मौसम विज्ञान सेवा के रूप में हुई थी।
यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत काम करता है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
IMD का प्राथमिक जनादेश गंभीर मौसम की घटनाओं का निरीक्षण करना, पूर्वानुमान लगाना और उनके खिलाफ चेतावनी देना है।
इसकी सलाह कृषि, विमानन, शिपिंग, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन जैसे क्षेत्रों का समर्थन करती है।
स्टेटिक जीके टिप: IMD मौसम जोखिम के बढ़ते स्तरों को इंगित करने के लिए पीला, नारंगी और लाल जैसे रंग-कोडित अलर्ट जारी करता है।
जनादेश और मुख्य जिम्मेदारियां
IMD चक्रवात, बाढ़, लू और शीत लहरों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ये चेतावनियां सरकारों को समय पर निकासी और आपदा तैयारी के उपाय करने में सक्षम बनाती हैं।
विभाग लंबे समय तक जलवायु संबंधी रिकॉर्ड भी रखता है, जो जलवायु प्रवृत्ति विश्लेषण के लिए आवश्यक हैं।
ऐसा डेटा जलवायु अनुकूलन और शमन रणनीतियों से संबंधित नीति निर्माण का समर्थन करता है।
स्टेटिक जीके तथ्य: IMD भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन और वापसी की घोषणा करने वाला आधिकारिक प्राधिकरण है।
मिशन मौसम और इसके उद्देश्य
मिशन मौसम एक बहुआयामी राष्ट्रीय पहल है जिसका उद्देश्य भारत के मौसम और जलवायु विज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ाना है।
इसका उद्देश्य पूर्वानुमान सटीकता, जलवायु मॉडलिंग और प्रभाव-आधारित मौसम सेवाओं में सुधार करना है।
यह मिशन उन्नत अवलोकन प्रणालियों, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और अनुसंधान परिणामों के एकीकरण पर जोर देता है।
यह दृष्टिकोण अल्पकालिक मौसम पूर्वानुमान और दीर्घकालिक जलवायु लचीलापन दोनों को मजबूत करता है।
स्टैटिक GK टिप: प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान सिर्फ़ मौसम संबंधी मापदंडों पर नहीं, बल्कि अपेक्षित नुकसान और जोखिम पर केंद्रित होता है।
मिशन मौसम का कार्यान्वयन आर्किटेक्चर
मिशन मौसम को IMD, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी, पुणे, और नेशनल सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्टिंग, नोएडा द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया गया है।
प्रत्येक संस्थान अवलोकन, मॉडलिंग और पूर्वानुमान में विशेष विशेषज्ञता का योगदान देता है।
IMD के तहत AWS की तैनाती हाइपर-लोकल पूर्वानुमान को बढ़ाती है, खासकर घने शहरी इलाकों में।
यह शहरी बाढ़, गर्मी के तनाव और बुनियादी ढांचे में रुकावटों के प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।
स्टैटिक GK तथ्य: स्वचालित मौसम स्टेशन बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के तापमान, वर्षा, आर्द्रता, हवा की गति और दबाव जैसे मापदंडों को रिकॉर्ड करते हैं।
सामरिक महत्व
IMD-मिशन मौसम का जुड़ाव विज्ञान-संचालित आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में भारत के बदलाव को दर्शाता है।
बेहतर अवलोकन नेटवर्क सीधे शहरी लचीलेपन और जलवायु तैयारियों का समर्थन करते हैं।
यह पहल जलवायु-सूचित शासन और सतत विकास योजना के भारत के व्यापक लक्ष्यों के साथ भी संरेखित है।
स्थिर उस्थादियन समसामयिक घटनाएँ तालिका
| विषय | विवरण |
| आईएमडी की स्थापना | 1875 |
| प्रशासनिक मंत्रालय | पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय |
| आईएमडी मुख्यालय | नई दिल्ली |
| मुख्य कार्य | मौसम पूर्वानुमान और भीषण मौसम चेतावनी |
| स्थापना दिवस पहल | 200 स्वचालित मौसम स्टेशनों की तैनाती |
| मिशन मौसम का उद्देश्य | मौसम एवं जलवायु विज्ञान सेवाओं को सुदृढ़ करना |
| प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसियाँ | भारतीय मौसम विभाग, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (पुणे), राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र (नोएडा) |
| तकनीकी फोकस | उन्नत अवलोकन एवं पूर्वानुमान प्रणालियाँ |
| शहरी प्रासंगिकता | अत्यंत स्थानीय (हाइपर-लोकल) मौसम पूर्वानुमान |
| राष्ट्रीय महत्व | आपदा जोखिम न्यूनीकरण और जलवायु सहनशीलता |





