मानव-रेटेड इंजन हुआ सुपुर्द
भारत के मानव अंतरिक्ष अभियान को बड़ा प्रोत्साहन मिला है, क्योंकि गोडरेज एयरोस्पेस ने मानव-रेटेड विकास इंजन को इसरो को सुपुर्द कर दिया है। यह इंजन एलवीएम-3 प्रक्षेपण यान के एल-110 चरण के लिए बनाया गया है, जो गगनयान मिशन का प्रमुख प्रक्षेपण वाहन है। इस डिलीवरी के साथ भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान तंत्र विकास चरण से मिशन-तैयार अवस्था की ओर बढ़ रहे हैं।
मानव-रेटिंग प्रक्रिया इंजन को उन कठोर सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाती है जो किसी भी मानवयुक्त अभियान के लिए अनिवार्य होते हैं।
इंजन क्यों महत्वपूर्ण है
विकास इंजन प्रक्षेपण के प्रारंभिक चरण में स्थिर प्रणोदन सुनिश्चित करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। मानव-रेटेड प्रणालियों में प्रत्येक घटक को संभावित विफलता परिस्थितियों को सहने में सक्षम होना चाहिए ताकि चालक दल की सुरक्षा प्रभावित न हो।
मानव-रेटिंग में अतिरिक्त सुरक्षा प्रणाली, बेहतर धातु-सहनशीलता और अत्यधिक परिस्थितियों में बार-बार परीक्षण शामिल है। यह प्रक्रिया इसरो को आगामी परीक्षण उड़ानों के और निकट ले जाती है।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: विकास इंजन की मूल तकनीक 1970 के दशक में विकसित फ्रांसीसी “वाइकिंग” इंजन पर आधारित है।
गगनयान मिशन का सार
गगनयान कार्यक्रम का लक्ष्य तीन सदस्यीय भारतीय दल को लगभग तीन दिनों के लिए निम्न पृथ्वी कक्षा में भेजना है। सफलता की स्थिति में भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद दुनिया का चौथा देश बन जाएगा जो स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष मिशन संचालित कर सकेगा।
कार्यक्रम के चरणबद्ध लक्ष्य चालक बचाव प्रणाली, कक्षीय पुनःप्रवेश और सुरक्षित जल-अवतरण की पुष्टि करना शामिल है।
आगामी प्रमुख चरण
पहला बिना चालक दल वाला परीक्षण अभियान 2026 में प्रस्तावित है, जिसमें मॉड्यूल की सुरक्षा प्रणालियों और डिजाइन की पुष्टि की जाएगी। पूर्ण मानव-युक्त मिशन 2027 में लक्षित है, जब सभी प्रणालियाँ मानव-रेटेड मानकों को पूरा कर देंगी।
अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जिसमें जीवित रहने का प्रशिक्षण, सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण अभ्यास और अंतरिक्ष यान परिचालन शामिल हैं।
स्थिर सामान्य ज्ञान टिप: भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा 1984 में सोवियत सोयूज़ टी–11 मिशन पर गए थे।
गोडरेज एयरोस्पेस की भूमिका
गोडरेज एयरोस्पेस पिछले चार दशकों से भारत की प्रणोदन क्षमता का प्रमुख स्तंभ रहा है। यह पीएसएलवी, जीएसएलवी, एलवीएम-3 के लिए इंजन और महत्त्वपूर्ण पुर्जे बनाता आया है, साथ ही चंद्रयान और मंगलयान जैसे अभियानों के लिए भी हार्डवेयर तैयार करता रहा है।
इसने नासा–इसरो सहयोग मिशन “निसार” के लिए भी पुर्जे तैयार किए हैं। मानव-रेटेड इंजन की आपूर्ति भारत में उद्योग और अंतरिक्ष एजेंसी के बीच मजबूत सहयोग को दर्शाती है।
भारत की बढ़ती अंतरिक्ष योग्यता
विकास इंजन का मानव-रेटिंग भारत में उन्नत प्रणोदन तकनीक और मिशन-सुरक्षा ढांचे के परिपक्व होने का संकेत है। इसके साथ ही यह दर्शाता है कि रणनीतिक क्षेत्रों में सार्वजनिक–निजी भागीदारी कितनी मजबूत हो रही है।
गगनयान परियोजना से जीवन-समर्थन प्रणालियों, पुनःप्रवेश प्रौद्योगिकी, और कक्षीय डॉकिंग जैसी क्षमताओं के घरेलू विकास को भी तेज़ी मिलने की उम्मीद है।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: इसरो की स्थापना 1969 में हुई थी और यह अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्य करता है, जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में है।
स्थिर उस्तादियन वर्तमान मामलों की तालिका
| विषय | विवरण |
| मिशन | गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम |
| इंजन सुपुर्द | मानव-रेटेड विकास इंजन |
| इंजन का चरण | एल-110 कोर स्टेज |
| निर्माता | गोडरेज एयरोस्पेस |
| प्रक्षेपण यान | एलवीएम-3 भारी प्रक्षेपण रॉकेट |
| दल की संख्या | 3 अंतरिक्ष यात्री |
| मिशन अवधि | लगभग 3 दिन निम्न पृथ्वी कक्षा में |
| तकनीकी आधार | फ्रांसीसी वाइकिंग इंजन पर आधारित |
| प्रमुख परीक्षण चरण | 2026 में बिना चालक दल वाला मिशन |
| इसरो केंद्र | द्रव प्रणोदन प्रणालियाँ केंद्र |





