प्रदूषण का अवलोकन
अगस्त 2023 से फरवरी 2024 के बीच किए गए एक हालिया अध्ययन ने कावेरी नदी में भारी धातुओं का गंभीर प्रदूषण उजागर किया। शोधकर्ताओं ने नदी के विभिन्न हिस्सों में मछलियों और अवसाद (sediments) का विश्लेषण किया। कई मछली प्रजातियों में कैडमियम और सीसा की मात्रा सुरक्षा मानकों से अधिक पाई गई।
स्थैतिक जीके तथ्य: कावेरी नदी का उद्गम कर्नाटक में होता है और यह तमिलनाडु होकर बहती है। लगभग 765 किमी लंबी यह नदी कृषि और मत्स्य पालन से जुड़े लाखों लोगों की जीवनरेखा है।
सैम्पलिंग और निष्कर्ष
अध्ययन में नदी के प्रवाह मार्ग पर 18 अवसाद-स्थलों और 10 मछली सैम्पलिंग स्थलों को शामिल किया गया। प्रदूषक विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्रों और शहरी बस्तियों के पास केंद्रित थे। रोहू, कतला जैसी प्रजातियों में भारी धातुओं का उल्लेखनीय संचय पाया गया, जो उपभोक्ताओं के लिए संभावित स्वास्थ्य जोखिम दर्शाता है।
स्थैतिक जीके टिप: कैडमियम के संपर्क से किडनी को नुकसान हो सकता है, जबकि सीसा तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और बच्चों के लिए विशेष रूप से हानिकारक है।
प्रदूषण के स्रोत
मुख्य स्रोत औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि अपवाह और शहरी अपशिष्ट जल पाए गए। टेक्सटाइल, केमिकल और टैनरी उद्योग भारी धातुओं के निर्वहन में योगदान देते हैं, जबकि फॉस्फेट उर्वरकों के उपयोग से अपवाह में कैडमियम बढ़ता है। शहरी सीवेज का प्रवाह प्रदूषण स्तर को और गंभीर बनाता है।
स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव
अध्ययन ने चेतावनी दी कि प्रदूषित हिस्सों से नियमित मछली उपभोग मानव शरीर में भारी धातुओं का जैव-संचय (bioaccumulation) बढ़ा सकता है। कैडमियम और सीसा के दीर्घकालिक संपर्क से किडनी विकार, तंत्रिका संबंधी समस्याएँ, और बच्चों में विकासगत दिक्कतें हो सकती हैं। अधिकारियों ने निरंतर निगरानी और जन-जागरूकता अभियानों की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्थैतिक जीके तथ्य: WHO मछलियों में कैडमियम की अधिकतम सीमा 0.05 mg/kg और सीसा की 0.3 mg/kg निर्धारित करता है—जो पाए गए स्तरों की गंभीरता को रेखांकित करता है।
शमन उपाय
विशेषज्ञ औद्योगिक निर्वहन पर कड़े विनियमन और पर्यावरण-अनुकूल कृषि प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने की सिफारिश करते हैं। नदी किनारे शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र स्थापित करना प्रदूषकों का भार उल्लेखनीय रूप से घटा सकता है। सामुदायिक भागीदारी कार्यक्रम और आवधिक निगरानी दीर्घकालिक जल गुणवत्ता एवं सुरक्षित मत्स्य संसाधनों के लिए अनिवार्य हैं।
स्थैतिक जीके टिप: कावेरी बेसिन लगभग 3.2 मिलियन हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र का समर्थन करता है और 2.5 करोड़ से अधिक लोगों को पानी उपलब्ध कराता है—इसकी पारिस्थितिक सेहत क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
स्थैतिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| अध्ययन अवधि | अगस्त 2023 – फरवरी 2024 |
| सैम्पलिंग स्थल | 18 अवसाद स्थल, 10 मछली स्थल |
| मुख्य प्रदूषक | कैडमियम, सीसा |
| प्रमुख स्रोत | औद्योगिक अपशिष्ट, कृषि अपवाह, शहरी अपशिष्ट जल |
| स्वास्थ्य जोखिम | किडनी क्षति, तंत्रिका तंत्र समस्याएँ, मानव शरीर में जैव-संचय |
| प्रभावित मछलियाँ | रोहू, कतला, अन्य मीठे पानी की प्रजातियाँ |
| शमन उपाय | अपशिष्ट जल उपचार, निर्वहन का विनियमन, पर्यावरण-अनुकूल कृषि |
| नदी की लंबाई | 765 किमी |
| निर्भर जनसंख्या | 2.5 करोड़ से अधिक |
| सिंचित क्षेत्र | 3.2 मिलियन हेक्टेयर |





