गुजरात में UCC ड्राफ़्ट जमा किया गया
गुजरात ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को सौंप दी है।
यह रिपोर्ट तीन हिस्सों में पेश की गई है और इसमें सिविल मामलों के लिए एक समान कानूनी ढाँचे का प्रस्ताव है। इसका मकसद सामाजिक सद्भाव बनाए रखते हुए सभी समुदायों में एकरूपता लाना है।
स्टैटिक GK तथ्य: गुजरात राज्य का गठन 1960 में बॉम्बे राज्य के बँटवारे के बाद हुआ था।
समिति के मुख्य प्रस्ताव
समिति ने शादी, तलाक़, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों के लिए एक साझा कानूनी ढाँचे की सिफ़ारिश की है। भारत में ये मामले अभी धर्म के आधार पर अलग–अलग होते हैं।
इस ड्राफ़्ट का मुख्य ज़ोर कानूनों को आसान बनाने और सभी के लिए समान कानूनी मानक सुनिश्चित करने पर है। यह कानूनी एकरूपता और सांस्कृतिक विविधता के बीच संतुलन बनाने की भी कोशिश करता है।
इन प्रस्तावों का मकसद राज्य के भीतर असमानताओं को खत्म करना और एक ज़्यादा सुसंगत कानूनी व्यवस्था स्थापित करना है।
लैंगिक न्याय पर ज़ोर
इस रिपोर्ट की एक बड़ी खासियत महिलाओं के अधिकारों और समानता पर इसका ज़ोर देना है। यह ड्राफ़्ट फ्रेमवर्क पर्सनल लॉ में मौजूद लंबे समय से चली आ रही असमानताओं को दूर करने की कोशिश करता है।
उम्मीद है कि महिलाओं को शादी और तलाक़ के मामलों में पुरुषों के बराबर अधिकार मिलेंगे, साथ ही उन्हें संपत्ति और विरासत में भी उचित हिस्सा मिलेगा। सभी समुदायों में कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी इसका एक अहम मकसद है।
यह कानूनी सुधारों के ज़रिए लैंगिक न्याय को बढ़ावा देने के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है।
परामर्श और शोध प्रक्रिया
समिति ने गुजरात के अलग–अलग ज़िलों में जाकर लोगों से बड़े पैमाने पर परामर्श किया। इसमें कानूनी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों को भी शामिल किया गया।
सिफ़ारिशों को अंतिम रूप देने में ज़मीनी स्तर से मिली राय ने अहम भूमिका निभाई। बेहतरीन तरीकों को समझने के लिए तुलनात्मक कानूनी अध्ययन भी किए गए।
यह समावेशी दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि इस ड्राफ़्ट में कानूनी विशेषज्ञता और सामाजिक वास्तविकताओं, दोनों की झलक मिले।
गुजरात सरकार की भूमिका
रिपोर्ट जमा होने के बाद, अब इसकी ज़िम्मेदारी गुजरात सरकार पर आ गई है। अधिकारी UCC को लागू करने की कानूनी व्यावहारिकता और प्रशासनिक ज़रूरतों की जाँच करेंगे।
अंतिम फ़ैसला लेने से पहले, जनता की राय और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं पर भी विचार किया जाएगा। उम्मीद है कि इसे लागू करने के चरण में सावधानीपूर्वक नीति–निर्माण किया जाएगा।
यूनिफॉर्म सिविल कोड को समझना
यूनिफॉर्म सिविल कोड कानूनों के एक ऐसे समूह को कहते हैं जो सभी नागरिकों के लिए सिविल मामलों को नियंत्रित करता है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। इनमें शादी, तलाक़, विरासत और गोद लेना शामिल हैं।
इसका ज़िक्र भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में किया गया है, जो राज्य को एक समान कानूनी ढाँचे की दिशा में काम करने का निर्देश देता है।
Static GK Tip: अनुच्छेद 44 ‘राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों‘ (Directive Principles of State Policy) का हिस्सा है; ये सिद्धांत कानूनी तौर पर लागू करने योग्य नहीं होते, लेकिन शासन–प्रशासन को दिशा देने का काम करते हैं।
समिति की संरचना और विशेषज्ञता
इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई ने की। इसमें प्रशासन, कानून और समाज–सेवा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे।
इसके प्रमुख सदस्यों में सी. एल. मीणा, आर. सी. कोडेकर, डॉ. दक्षेश ठाकर, गीता श्रॉफ और शत्रुघ्न सिंह शामिल थे। इस विविध संरचना ने एक संतुलित और व्यापक रिपोर्ट सुनिश्चित की।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण | न्यायमूर्ति रंजना देसाई समिति ने गुजरात सरकार को समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा प्रस्तुत किया |
| प्रमुख उद्देश्य | विभिन्न समुदायों में समान व्यक्तिगत कानून स्थापित करना |
| शामिल कानूनी क्षेत्र | विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण |
| संवैधानिक आधार | भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 |
| मुख्य फोकस क्षेत्र | लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकार |
| परामर्श विधि | जिला-स्तरीय चर्चाएँ और हितधारक सहभागिता |
| समिति प्रमुख | न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई |
| सरकार की भूमिका | व्यवहार्यता की समीक्षा करना और कार्यान्वयन की योजना बनाना |





