ग्रीन टग इनिशिएटिव
चेन्नई पोर्ट अथॉरिटी ने अपने एमिशन कम करने के उपायों के तहत अपना पहला ग्रीन टग खरीदना शुरू कर दिया है। अभी, पोर्ट तीन डीज़ल से चलने वाले टग चलाता है जो जहाजों को चलाने और दूसरे मरीन ऑपरेशन में मदद करते हैं।
यह कदम पोर्ट की गतिविधियों से कार्बन और नाइट्रोजन एमिशन को कम करने की ग्लोबल कोशिशों के साथ है। पोर्ट का ग्रीन टग ट्रांज़िशन प्रोग्राम पारंपरिक डीज़ल टग को ज़्यादा पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों से बदलने पर फोकस करता है।
टग स्पेसिफिकेशन्स
प्रस्तावित ग्रीन टग में 60 टन की खींचने की पावर होगी। इसे फ्यूल के तौर पर अमोनिया, हाइड्रोजन या मेथनॉल का इस्तेमाल करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो पारंपरिक डीज़ल प्रोपल्शन से बदलाव को दिखाता है।
स्टेटिक GK फैक्ट: 1881 में बना चेन्नई पोर्ट, कार्गो हैंडल करने के मामले में भारत का दूसरा सबसे बड़ा पोर्ट है। एनवायरनमेंट पर असर
ई-टग्स से नाइट्रोजन और कार्बन एमिशन पूरी तरह खत्म होने की उम्मीद है, जिससे पोर्ट ऑपरेशन को साफ करने में काफी मदद मिलेगी। हाइब्रिड टग्स, हालांकि पूरी तरह से एमिशन-फ्री नहीं हैं, लेकिन पॉल्यूटेंट में 25% से 35% की कमी ला सकते हैं।
स्टैटिक GK टिप: भारत का लक्ष्य 2070 तक नेट-ज़ीरो एमिशन हासिल करना है, जिससे ग्रीन टग्स जैसे इनिशिएटिव सस्टेनेबल मैरीटाइम ट्रांसपोर्ट के लिए ज़रूरी हो जाते हैं।
डिलीवरी और भविष्य की योजनाएं
ग्रीन टग के कॉन्ट्रैक्ट मिलने के दो साल के अंदर डिलीवर होने की उम्मीद है। यह प्रोग्राम चेन्नई पोर्ट के सस्टेनेबल मैरीटाइम इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रति कमिटमेंट को दिखाता है और सरकार के बड़े एमिशन-रिडक्शन टारगेट के साथ अलाइन है।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत का कोस्टलाइन 7,500 km से ज़्यादा लंबा है, जिसमें बड़े पोर्ट ट्रेड और लॉजिस्टिक्स में अहम भूमिका निभाते हैं।
ट्रांज़िशन प्रोग्राम
ग्रीन टग ट्रांज़िशन प्रोग्राम पोर्ट ऑपरेशन को मॉडर्न बनाने की एक बड़ी स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। अल्टरनेटिव-फ्यूल टग्स को इंटीग्रेट करके, पोर्ट डीज़ल पर डिपेंडेंस कम कर रहा है और शिपिंग में क्लीन एनर्जी सोर्स को बढ़ावा दे रहा है। स्टैटिक GK टिप: भारी समुद्री ट्रांसपोर्ट के लिए अमोनिया, हाइड्रोजन और मेथनॉल फॉसिल फ्यूल के अच्छे विकल्प के तौर पर उभर रहे हैं।
पोर्ट ऑपरेशन पर असर
ग्रीन टग्स के आने से ऑपरेशनल एफिशिएंसी में सुधार होने और एनवायरनमेंटल फुटप्रिंट कम होने की उम्मीद है। यह कदम भारत के सस्टेनेबल डेवलपमेंट लक्ष्यों को सपोर्ट करता है और दूसरे पोर्ट्स के लिए एक बेंचमार्क सेट करता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: चेन्नई पोर्ट ने फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में 60 मिलियन टन से ज़्यादा कार्गो हैंडल किया, जो इसकी स्ट्रेटेजिक अहमियत को दिखाता है।
स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| प्रमुख जानकारी | चेन्नै बंदरगाह पर प्रथम हरित टग (हरित नौकायन सहायक) |
| पहल | हरित टग संक्रमण कार्यक्रम |
| वर्तमान डीज़ल टग | संचालन और नौवहन हेतु 3 डीज़ल टग |
| हरित टग की क्षमता | 60 टन खींचने की शक्ति |
| वैकल्पिक ईंधन | अमोनिया, हाइड्रोजन, मेथनॉल |
| उत्सर्जन में कमी | विद्युत टग — 100%, हाइब्रिड टग — 25% से 35% |
| अपेक्षित आपूर्ति | अनुबंध मिलने के 2 वर्षों के भीतर |
| महत्व | नेट–जीरो उत्सर्जन लक्ष्य तथा सतत बंदरगाह संचालन को समर्थन |
| स्थिर जी.के. तथ्य | चेन्नै बंदरगाह भारत का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है |
| माल ढुलाई | वित्त वर्ष 2023–24 में 60 मिलियन टन से अधिक |





