मिशन का अवलोकन
केंद्र सरकार ने छह वर्षों के लिए Export Promotion Mission (EPM) को मंजूरी दी है, जिससे भारत की निर्यात क्षमता को एकीकृत ढांचे के तहत सशक्त बनाया जाएगा। यह पहल केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित की गई थी और इसका उद्देश्य बदलती वैश्विक व्यापार परिस्थितियों के बीच भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करना है।
मिशन का मुख्य फोकस है—निर्यात को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना, वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना, और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उत्पादों की पहुंच बढ़ाना।
वित्तीय योजना और अवधि
EPM के लिए ₹25,060 करोड़ का कुल वित्तीय प्रावधान रखा गया है, जो FY 2025–26 से FY 2030–31 तक चलेगा।
यह दीर्घकालिक मॉडल व्यापार अवसंरचना, वित्तीय चैनलों और निर्यात सहायता तंत्र में निरंतर सुधार की अनुमति देता है।
Static GK fact: भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलता है—यह प्रणाली 1867 में ब्रिटिश काल में प्रारंभ हुई थी।
मिशन के प्रमुख उद्देश्य
- MSMEs और प्रथम-बार निर्यातकों के लिए सस्ती और सुलभ व्यापार वित्त
• गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांडिंग और वैश्विक मानकों के माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना
• टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में रोजगार सृजन
लाभार्थी समूह
मिशन मुख्य रूप से MSMEs, नए निर्यातकों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को समर्थन प्रदान करेगा।
ये सेक्टर भारत के माल निर्यात में प्रमुख योगदान देते हैं।
Static GK Tip: MSMEs भारत के GDP में 30% और निर्यात में लगभग 45% योगदान करते हैं।
मिशन की संरचना
मिशन को दो प्रमुख उप-योजनाओं में विभाजित किया गया है:
1. Niryat Protsahan (वित्तीय सहायता योजना)
- ब्याज सबवेंशन
• गारंटी समर्थन
• ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए निर्यात क्रेडिट कार्ड
ये उपाय छोटे निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाते हैं।
2. Niryat Disha (गैर–वित्तीय समर्थन योजना)
- वैश्विक मानकों के लिए गुणवत्ता प्रमाणन
• अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्रों के लिए सहायता
• ब्रांडिंग और लॉजिस्टिक्स तैयारी
इसका उद्देश्य अनुपालन लागत को कम करना और वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाना है।
संस्थागत तंत्र
मिशन का क्रियान्वयन DGFT, वाणिज्य विभाग, MSME मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, Export Promotion Councils, वित्तीय संस्थान और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।
यह संरचना सभी प्रमुख निर्यात केंद्रों में समान सहायता सुनिश्चित करेगी।
मौजूदा योजनाओं का एकीकरण
EPM के तहत पहले से चल रही योजनाओं जैसे:
• Interest Equalisation Scheme (IES)
• Market Access Initiative (MAI)
को समेकित किया गया है।
इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और योजना संचालन में एकरूपता आएगी।
Static GK fact: IES वर्ष 2015 में शुरू की गई थी ताकि MSME निर्यातकों को कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध हो सके।
निर्यात क्रेडिट से संबंधित अपडेट
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Credit Guarantee Scheme for Exporters (CGSE) को भी मंजूरी दी है।
• ₹20,000 करोड़ तक का कोलेटरल–फ्री क्रेडिट
• 100% गारंटी—NCGTC द्वारा
• लाभार्थी: MSME और non-MSME निर्यातक
• निगरानी: वित्तीय सेवाएँ विभाग (DFS) के सचिव की अध्यक्षता में Management Committee
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| मिशन अवधि | छह वर्ष (FY 2025–26 से FY 2030–31) |
| कुल व्यय | ₹25,060 करोड़ |
| वित्तीय उप-योजना | Niryat Protsahan |
| गैर-वित्तीय उप-योजना | Niryat Disha |
| कार्यान्वयन एजेंसी | DGFT एवं विभिन्न मंत्रालय |
| लक्ष्य समूह | MSMEs, नए निर्यातक, श्रम-प्रधान क्षेत्र |
| एकीकृत योजनाएँ | IES, MAI |
| क्रेडिट समर्थन (CGSE) | ₹20,000 करोड़ तक |
| गारंटी कवरेज | 100% (NCGTC) |
| निरीक्षण प्राधिकरण | सचिव, DFS की अध्यक्षता वाली समिति |





