भारत की अंडरवाटर रक्षा को नई दिशा
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने नई पीढ़ी के मैन-पोर्टेबल ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (MP-AUVs) विकसित किए हैं।
ये सिस्टम विशाखापत्तनम स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी (NSTL) द्वारा डिजाइन किए गए हैं और जल के भीतर खदानों (mines) की पहचान क्षमता को मजबूत करने का लक्ष्य रखते हैं।
इनका उद्देश्य तेज, सुरक्षित और स्वायत्त माइन काउंटरमेज़र मिशन पूरा करना है, जिसमें मानव हस्तक्षेप न्यूनतम हो।
Static GK fact: DRDO की स्थापना 1958 में भारत की रक्षा अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने के लिए हुई थी।
कॉम्पैक्ट और बुद्धिमान डिजाइन
MP-AUVs हल्के अंडरवाटर ड्रोन हैं जिन्हें जल्दी से ले जाया और तैनात किया जा सकता है।
इनका कॉम्पैक्ट डिजाइन तेज मिशन स्टार्ट की अनुमति देता है।
ये साइड स्कैन सोनार, अंडरवाटर कैमरे और डीप लर्निंग आधारित टारगेट रिकॉग्निशन का उपयोग करके “माइन-लाइक ऑब्जेक्ट्स (MLOs)” की पहचान और वर्गीकरण उच्च सटीकता से करते हैं।
ये ऑनबोर्ड उपकरण वास्तविक समय में खतरे का विश्लेषण प्रदान करते हैं।
Static GK Tip: साइड स्कैन सोनार समुद्र तल की मैपिंग और माइन डिटेक्शन में नौसेनाओं द्वारा व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
अंडरवाटर नेटवर्किंग के माध्यम से समन्वय
MP-AUV सिस्टम की सबसे बड़ी क्षमताओं में से एक है अंडरवाटर ध्वनिक संचार।
इससे कई AUV एक-दूसरे से मिशन डेटा साझा कर सकते हैं, जिससे समूह समन्वय और स्थितिजन्य जागरूकता बेहतर होती है।
मल्टी-AUV संचालन कम समय में बड़े क्षेत्रों को कवर कर सकता है, जिससे मिशन की दक्षता बढ़ती है।
सफल फील्ड ट्रायल
NSTL/हार्बर में किए गए परीक्षणों ने सभी प्रमुख प्रदर्शन मानकों को सफलतापूर्वक सत्यापित किया।
AUVs ने खदानों की पहचान और वर्गीकरण में लगातार उच्च सटीकता दिखाई।
संचार लिंक ने परीक्षणों के दौरान समन्वित संचालन को सक्षम बनाया।
इन परिणामों से यह सिद्ध हो गया कि यह प्रणाली संचालनात्मक तैनाती के लिए तैयार है।
Static GK fact: NSTL भारत की प्रमुख अंडरवाटर हथियार और समुद्री सिस्टम अनुसंधान प्रयोगशाला है।
नौसैनिक अभियानों के लिए सामरिक महत्व
DRDO नेतृत्व के अनुसार, MP-AUVs भारत की समुद्री रक्षा क्षमता में एक बड़ा उन्नयन है।
इनका मैन-पोर्टेबल रूप छोटे जहाजों से भी तैनाती की अनुमति देता है।
यह खदान क्षेत्रों में मानव जोखिम को कम करते हुए सुरक्षित नेविगेशन सक्षम करता है।
सिस्टम भारत के समुद्री क्षेत्र में स्वदेशी रक्षा तकनीक को मजबूत करने के लक्ष्य से मेल खाता है।
Static GK Tip: भारत की तटरेखा 7,516 किमी लंबी है, जिससे अंडरवाटर सुरक्षा राष्ट्रीय रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनती है।
उत्पादन और उद्योग साझेदारी
सफल परीक्षणों के बाद MP-AUVs का उत्पादन शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है।
भारतीय रक्षा उद्योग साझेदार इनके निर्माण की जिम्मेदारी संभालेंगे, जिससे मेक इन इंडिया कार्यक्रम को भी बढ़ावा मिलेगा।
यह भारत की उन्नत अंडरवाटर प्रणालियों में दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय (Topic) | विवरण (Detail) |
| विकसित करने वाली संस्था | नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी, विशाखापत्तनम |
| मूल संगठन | रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) |
| प्रणाली प्रकार | मैन-पोर्टेबल स्वायत्त अंडरवाटर वाहन |
| प्राथमिक उद्देश्य | माइन काउंटरमेज़र मिशन |
| प्रमुख तकनीकें | सोनार इमेजिंग, अंडरवाटर कैमरे, एआई-आधारित वर्गीकरण, ध्वनिक संचार |
| परीक्षण स्थान | NSTL/हार्बर |
| तैनाती लाभ | तेज, पोर्टेबल और स्वायत्त संचालन |
| सामरिक महत्व | अंडरवाटर रक्षा क्षमताओं को बढ़ाता है |
| उद्योग की भूमिका | भारतीय रक्षा उद्योग उत्पादन में सहयोग करेगा |
| अपेक्षित समयरेखा | आने वाले महीनों में उत्पादन प्रारंभ |





