CSR के दायरे पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) सिर्फ़ सामाजिक कल्याण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्वाभाविक रूप से पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी भी शामिल है।
यह व्याख्या दिसंबर 2025 में MK रंजीतसिंह और अन्य बनाम भारत संघ मामले में दी गई थी।
कोर्ट ने CSR दायित्वों को संवैधानिक कर्तव्यों से जोड़ा, जिससे पर्यावरणीय शासन में कॉर्पोरेट जवाबदेही की समझ का विस्तार हुआ।
यह फैसला जैव विविधता संरक्षण में कॉर्पोरेट भागीदारी के लिए कानूनी आधार को मज़बूत करता है।
संवैधानिक कर्ता के रूप में निगम
कोर्ट ने निगमों को कानूनी व्यक्ति और समाज के महत्वपूर्ण अंग के रूप में मान्यता दी।
संवैधानिक कर्ता के रूप में, निगम संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के तहत मौलिक कर्तव्यों से बंधे हैं।
अनुच्छेद 51A(g) प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने का कर्तव्य अनिवार्य करता है, जिसमें वन, झीलें, नदियाँ और वन्यजीव शामिल हैं।
यह जीवित प्राणियों के प्रति करुणा की भी आवश्यकता बताता है, जो नैतिक ज़िम्मेदारी को मानवीय हितों से परे तक बढ़ाता है।
स्टेटिक जीके तथ्य: मौलिक कर्तव्यों को सूचीबद्ध करने वाला अनुच्छेद 51A 42वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।
एक संवैधानिक दायित्व के रूप में CSR
कोर्ट ने इस विचार को खारिज कर दिया कि CSR केवल कॉर्पोरेट दान का एक रूप है।
इसने फैसला सुनाया कि पर्यावरण संरक्षण पर CSR खर्च एक संवैधानिक दायित्व है, न कि स्वैच्छिक परोपकारी गतिविधि।
इसलिए, पर्यावरणीय स्थिरता कॉर्पोरेट शासन का एक अनिवार्य घटक बन जाती है।
यह व्याख्या CSR को अल्पकालिक छवि-निर्माण अभ्यासों के बजाय दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों के साथ जोड़ती है।
स्टेटिक जीके टिप: मौलिक कर्तव्य गैर-न्यायसंगत हैं, लेकिन अदालतें अक्सर उनका उपयोग वैधानिक और संवैधानिक ज़िम्मेदारियों की व्याख्या करने के लिए करती हैं।
प्रदूषक भुगतान सिद्धांत और प्रजातियों का संरक्षण
फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू जैव विविधता संरक्षण पर प्रदूषक भुगतान सिद्धांत का अनुप्रयोग था।
जहाँ कॉर्पोरेट गतिविधियाँ लुप्तप्राय प्रजातियों को खतरा पहुँचाती हैं या नुकसान पहुँचाती हैं, वहाँ कंपनियों को बहाली की लागत वहन करनी होगी।
कोर्ट ने इन-सीटू संरक्षण (प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवासों में संरक्षित करना) और एक्स-सीटू संरक्षण (जैसे प्रजनन कार्यक्रम और वन्यजीव अभयारण्य) दोनों पर ज़ोर दिया।
CSR फंड को कानूनी रूप से इन संरक्षण उपायों की ओर निर्देशित किया जा सकता है।
यह दृष्टिकोण पर्यावरणीय देयता को CSR अनुपालन के साथ एकीकृत करता है, जिससे पारिस्थितिक नुकसान के लिए जवाबदेही मज़बूत होती है।
भारत में CSR का कानूनी ढांचा
CSR कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के तहत एक वैधानिक आवश्यकता है।
यह उन कंपनियों पर लागू होता है जो नेट वर्थ, टर्नओवर, या नेट प्रॉफिट की तय सीमा को पूरा करती हैं।
योग्य कंपनियों को पिछले तीन सालों के अपने औसत नेट प्रॉफिट का कम से कम 2% CSR गतिविधियों पर खर्च करना होगा।
चल रहे प्रोजेक्ट से संबंधित बिना खर्च की गई रकम को तय फंड में ट्रांसफर करना होगा।
स्टेटिक GK तथ्य: भारत कानून के ज़रिए CSR खर्च को अनिवार्य करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।
CSR गतिविधियों के तहत पर्यावरणीय स्थिरता
कंपनी अधिनियम में साफ तौर पर स्वीकार्य CSR गतिविधियों में पर्यावरणीय स्थिरता को शामिल किया गया है।
इसमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना और पेड़-पौधों और जीवों की सुरक्षा शामिल है।
CSR को अनुच्छेद 51A(g) से जोड़कर, सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय CSR खर्च की संवैधानिक वैधता को मज़बूत किया।
इस फैसले से भविष्य की कॉर्पोरेट नीतियों और पर्यावरणीय मुकदमों पर असर पड़ने की उम्मीद है।
कॉर्पोरेट गवर्नेंस के लिए निहितार्थ
यह फैसला स्वैच्छिक पर्यावरणीय जिम्मेदारी से संविधान समर्थित कॉर्पोरेट कर्तव्य की ओर एक बदलाव का प्रतीक है।
कंपनियों के बोर्ड को अब पर्यावरणीय सुरक्षा को CSR योजना और अनुपालन ढांचे में शामिल करना होगा।
यह कॉर्पोरेट कानून को संवैधानिक मूल्यों के साथ जोड़कर भारत के व्यापक पर्यावरणीय न्यायशास्त्र को भी मज़बूत करता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| सर्वोच्च न्यायालय मामला | MK Ranjitsinh एवं अन्य बनाम भारत संघ |
| मुख्य निर्णय | CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) में पर्यावरणीय उत्तरदायित्व स्वाभाविक रूप से शामिल है |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 51A(g) – पर्यावरण की रक्षा करना मौलिक कर्तव्य |
| कानूनी ढांचा | धारा 135, कंपनी अधिनियम, 2013 |
| CSR व्यय मानदंड | पिछले तीन वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का न्यूनतम 2% |
| लागू पर्यावरणीय सिद्धांत | प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (Polluter Pays Principle) |
| संरक्षण पद्धतियाँ | इन-सीटू एवं एक्स-सीटू संरक्षण |
| वैश्विक महत्व | भारत अनिवार्य CSR कानून लागू करने वाला पहला देश |





