वैश्विक फोकस अनुकूलन पर
ब्राज़ील के बेलेंम में आयोजित होने वाला COP30 सम्मेलन (नवंबर 2025) वैश्विक जलवायु शासन में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा, क्योंकि यह जलवायु अनुकूलन (Adaptation) को केंद्र में रखता है।
अब तक जलवायु कार्रवाई का प्रमुख ध्यान उत्सर्जन में कमी (Mitigation) पर था, परंतु अब दुनिया को बढ़ते तापमान, बाढ़, सूखा, और समुद्र–स्तर वृद्धि के प्रति अनुकूल होने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
सम्मेलन का केंद्रीय विषय है — $1.3 ट्रिलियन वार्षिक अनुकूलन वित्त रोडमैप के माध्यम से लचीलापन निर्माण, जिसमें भारत सहित 35 से अधिक देश सहभागी हैं।
Static GK Fact: COP30 का आयोजन नवंबर 2025 में बेलेंम, ब्राज़ील में UNFCCC ढाँचे के तहत किया जाएगा।
जलवायु अनुकूलन क्या है
जलवायु अनुकूलन का अर्थ है प्राकृतिक और मानव प्रणालियों में परिवर्तन कर जलवायु प्रभावों से होने वाले नुकसान को कम करना।
जहाँ Mitigation भविष्य में तापमान वृद्धि को रोकने का प्रयास करता है, वहीं Adaptation यह स्वीकार करता है कि कुछ परिवर्तन अब अपरिहार्य हैं।
उदाहरण —
- बाढ़-प्रतिरोधी घरों का निर्माण
- सूखा-सहिष्णु फसलों की खेती
- तटीय सुरक्षा के लिए मैंग्रोव पुनर्स्थापन
Static GK Tip: संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा संधि (UNFCCC) हर वर्ष COP सम्मेलन आयोजित करती है, जो वैश्विक जलवायु नीतियों को दिशा देते हैं।
COP30 के एजेंडे में अनुकूलन क्यों प्रमुख है
अल्पविकसित देश (LDCs) और छोटे द्वीपीय विकासशील राष्ट्र (SIDS) के लिए जलवायु अनुकूलन जीवित रहने का प्रश्न है।
UN के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील (Simon Stiell) ने कहा है कि अनुकूलन को “विकल्प नहीं, आवश्यकता” के रूप में देखा जाना चाहिए, ताकि खाद्य, जल और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
2023 में जलवायु वित्त का असंतुलन स्पष्ट था —
- 43% फंड Mitigation में गया
- जबकि केवल 23% Adaptation के लिए उपलब्ध हुआ।
विकासशील देशों को 2030 तक प्रति वर्ष $2.4 ट्रिलियन की आवश्यकता होगी ताकि वे अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा कर सकें।
Static GK Fact: SIDS वे निचले द्वीप राष्ट्र हैं जो समुद्र-स्तर वृद्धि और चरम मौसम से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
$1.3 ट्रिलियन अनुकूलन वित्त रोडमैप
“बаку से बेलेंम रोडमैप (Baku to Belém Roadmap for 1.3T)”, जिसे भारत सहित 35 देशों के वित्त मंत्रियों ने अनुमोदित किया, का उद्देश्य अनुकूलन वित्त अंतर को पाटना है।
इस योजना के प्रमुख बिंदु हैं —
- बहुपक्षीय विकास बैंकों (MDBs) का सुधार ताकि वे अनुकूलन परियोजनाओं को प्राथमिकता दें।
- रियायती वित्त (Concessional Finance) का विस्तार — कम ब्याज और अधिक अवधि वाले ऋण।
- 2030 तक निजी निवेशकों से $65 बिलियन प्रतिवर्ष जुटाने का लक्ष्य।
उदाहरण के तौर पर —
- भारत के जलवायु-लचीले कृषि प्रोजेक्ट, जिन्हें ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) का सहयोग प्राप्त है।
- बांग्लादेश के बाढ़-नियंत्रण कार्यक्रम।
Static GK Tip: ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) की स्थापना 2010 में विकासशील देशों की जलवायु परियोजनाओं में सहायता के लिए की गई थी।
राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाओं की प्रगति
सितंबर 2025 तक, 144 देशों ने अपनी राष्ट्रीय अनुकूलन योजनाएँ (National Adaptation Plans – NAPs) तैयार कीं, जिनमें 23 LDCs और 14 SIDS शामिल हैं।
भारत की राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) में कृषि, जल संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण जैसी मिशन योजनाएँ शामिल हैं।
वहीं फिजी की NAP में तटीय पुनर्वास और बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएँ प्रमुख हैं।
Static GK Fact: भारत की NAPCC की शुरुआत 2008 में हुई थी, जिसमें आठ राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं।
आर्थिक दृष्टि से अनुकूलन का महत्व
अनुकूलन को लागत नहीं, निवेश माना जा रहा है — यह भविष्य के नुकसान को घटाता है और आजीविका को सशक्त बनाता है।
उदाहरण के लिए, भारत की जल जीवन मिशन ग्रामीण घरों में नल से जल आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है, जिससे स्वास्थ्य सुधार और जल सुरक्षा दोनों मजबूत हुए हैं।
COP30 से अपेक्षाएँ हैं कि वैश्विक समुदाय निम्नलिखित ठोस कदम उठाए —
- अनुकूलन प्रगति संकेतक (Adaptation Indicators) तैयार करना
- वित्तीय जवाबदेही रोडमैप बनाना
- राष्ट्रीय लचीलापन ढाँचे (Resilience Frameworks) को मजबूत करना
साइमन स्टील के शब्दों में, “अनुकूलन वह कड़ी है जो जलवायु कार्रवाई को लोगों के वास्तविक जीवन से जोड़ती है।”
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय (Topic) | विवरण (Detail) |
| COP30 स्थल | बेलेंम, ब्राज़ील (नवंबर 2025) |
| केंद्रीय विषय | जलवायु अनुकूलन और लचीलापन |
| वित्तीय रोडमैप | “बаку से बेलेंम रोडमैप” – $1.3 ट्रिलियन |
| प्रमुख समर्थक | भारत सहित 35 देश |
| UN जलवायु प्रमुख | साइमन स्टील |
| वित्त असंतुलन (2023) | 43% Mitigation, 23% Adaptation |
| वार्षिक वित्त आवश्यकता | 2030 तक $2.4 ट्रिलियन (विकासशील देशों के लिए) |
| ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) | 2010 में स्थापित |
| भारत की NAPCC | 2008 में शुरू, आठ राष्ट्रीय मिशन |
| SIDS | समुद्र-स्तर वृद्धि से प्रभावित छोटे द्वीपीय राष्ट्र |





