प्रारंभिक जीवन और विधिक उपलब्धियाँ
चित्तरंजन दास (1870–1925), जिन्हें देशबंधु (राष्ट्र के मित्र) के रूप में सम्मानित किया जाता है, एक प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी और वकील थे। उन्होंने 1908 के अलीपुर बम कांड में अरविन्दो घोष का सफलतापूर्वक बचाव किया। दास ने 1910–11 के ढाका साजिश प्रकरण में भी पक्ष-वकालत की, जिससे उनकी विधिक कुशलता व्यापक रूप से स्वीकृत हुई। स्थैतिक जीके तथ्य: अलीपुर बम कांड बंगाल के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महत्वपूर्ण मुकदमों में से एक था।
राजनीतिक नेतृत्व
दास ने 1920 के असहयोग आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। उनकी नेतृत्व क्षमता के चलते वे 1922 के गया अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। 1923 में उन्होंने पं. मोतीलाल नेहरू और वित्तलभाई पटेल के साथ मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की, जिसका उद्देश्य विधानसभाओं में प्रवेश कर औपनिवेशिक नीतियों को भीतर से चुनौती देना था। स्थैतिक जीके टिप: स्वराज पार्टी ने स्वशासन के लिए संघर्ष जारी रखते हुए संवैधानिक सुधारों की माँग को आगे बढ़ाया।
शिक्षा और नागरिक जीवन में योगदान
1921 में दास ने ढाका में नेशनल यूनिवर्सिटी की स्थापना की, जिससे बंगाल में उच्च शिक्षा को बढ़ावा मिला। वे 1924 में कलकत्ता म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के पहले निर्वाचित मेयर बने, जो शहरी प्रशासन और लोककल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। स्थैतिक जीके तथ्य: कलकत्ता म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन की स्थापना 1876 में हुई—यह भारत की प्राचीन नगरपालिकाओं में से एक है।
साहित्यिक और पत्रकारिता योगदान
दास एक उत्पादक लेखक और संपादक भी थे। उन्होंने फ़ॉरवर्ड नामक समाचारपत्र की स्थापना की, जिसे बाद में लिबर्टी नाम दिया गया; सुभाषचंद्र बोस इसके संपादक रहे। उनकी प्रमुख कृतियों में India for Indians और Freedom through Disobedience शामिल हैं, जिनमें स्वराज, देशभक्ति और सक्रिय नागरिक भागीदारी पर बल है। स्थैतिक जीके टिप: “Freedom through Disobedience” में अहिंसक असहयोग को स्वतंत्रता-संग्राम का प्रभावी साधन बताया गया।
मूल्य और विरासत
देशबंधु चित्तरंजन दास अपने अटूट देशप्रेम, दूरदर्शी नेतृत्व और निस्वार्थ सेवा के लिए स्मरण किए जाते हैं। वकील, राजनेता, शिक्षाविद और लेखक—इन सभी रूपों में उनका बहुआयामी योगदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा देने में निर्णायक रहा। उनका जीवन ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व पर आधारित नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत करता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| जन्म–मृत्यु | 1870–1925 |
| उपाधि | देशबंधु (राष्ट्र के मित्र) |
| विधिक उपलब्धियाँ | अलीपुर बम कांड (1908) में बचाव, ढाका साजिश प्रकरण (1910–11) में पक्ष-वकालत |
| राजनीतिक भूमिकाएँ | कांग्रेस अध्यक्ष (गया, 1922); स्वराज पार्टी के सह-संस्थापक (1923) |
| शैक्षिक योगदान | नेशनल यूनिवर्सिटी, ढाका की स्थापना (1921) |
| नागरिक योगदान | कलकत्ता म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के पहले निर्वाचित मेयर (1924) |
| साहित्य/पत्रकारिता | समाचारपत्र: फ़ॉरवर्ड/लिबर्टी; पुस्तकें: India for Indians, Freedom through Disobedience |
| मुख्य मूल्य | देशभक्ति, नेतृत्व, निस्वार्थ सेवा |





