नई दिल्ली में शताब्दी समारोह
भारत ने 7 नवम्बर 2025 को नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में भव्य समारोह के साथ हॉकी उत्कृष्टता के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया। यह शताब्दी कार्यक्रम खेल की उस ऐतिहासिक यात्रा को समर्पित था जो औपनिवेशिक काल से शुरू होकर राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन गई।
इस अवसर पर डॉ. मनसुख मांडविया, किरेन रिजिजू और उदयनिधि स्टालिन सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों, ओलंपियन खिलाड़ियों और सैकड़ों युवा खिलाड़ियों ने भाग लिया।
स्थैतिक जीके तथ्य: मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, जो भारत के महानतम हॉकी खिलाड़ी ध्यानचंद के नाम पर है, वर्ष 1933 में बनाया गया था और 2010 राष्ट्रमंडल खेलों से पहले इसका नवीनीकरण किया गया।
गौरवशाली विरासत को श्रद्धांजलि
इस शताब्दी समारोह ने ध्यानचंद और बलबीर सिंह सीनियर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने भारत के हॉकी स्वर्ण युग की नींव रखी।
इस अवसर पर “100 इयर्स ऑफ इंडियन हॉकी” शीर्षक से एक विशेष स्मारक ग्रंथ जारी किया गया, जिसमें भारत की हॉकी यात्रा को 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से लेकर वर्तमान तक दर्ज किया गया है।
इस पुस्तक में 1928 से 1980 तक भारत के आठ ओलंपिक स्वर्ण पदकों और 2009 के बाद हॉकी इंडिया द्वारा खेल के पेशेवरकरण एवं जमीनी ढांचे में सुधार की कहानी बताई गई है।
स्थैतिक जीके टिप: भारत ने अपना पहला ओलंपिक हॉकी स्वर्ण पदक 1928 में जीता था, जिसमें ध्यानचंद ने पूरे टूर्नामेंट में 14 गोल किए थे।
राष्ट्रीय सहभागिता और जमीनी विकास
शताब्दी वर्ष के अवसर पर पूरे देश में 550 ज़िलों में 1,400 से अधिक हॉकी मैच आयोजित किए गए। इस अभियान का उद्देश्य स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय क्लबों को जोड़कर जमीनी स्तर पर हॉकी के पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना था।
मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रियों की टीम (Union Ministers’ XI) और हॉकी इंडिया मिश्रित टीम (पुरुष एवं महिला) के बीच एक प्रदर्शनी मैच हुआ, जो समावेशन, लैंगिक समानता और टीम भावना का प्रतीक था।
प्रदर्शनी और ऐतिहासिक झलकियाँ
एक विशेष फोटो प्रदर्शनी में भारत की हॉकी यात्रा को 1936 के बर्लिन ओलंपिक से लेकर 2020 के टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक तक दर्शाया गया।
दर्शकों ने दुर्लभ तस्वीरें, पुरानी हॉकी स्टिक्स और टीम स्मृति चिन्ह देखे, जिसने भारत की सफलता और संघर्ष की दृश्य यात्रा प्रस्तुत की।
स्थैतिक जीके तथ्य: 1936 के बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद की कप्तानी में भारत ने जर्मनी को 8–1 से हराया था — यह हॉकी इतिहास की सबसे महान जीतों में से एक मानी जाती है।
राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक
शताब्दी संदेश ने इस बात पर बल दिया कि हॉकी केवल एक खेल नहीं बल्कि भारतीय पहचान की धड़कन है।
13 ओलंपिक पदक विजयों के साथ भारत अभी भी विश्व का सबसे सफल हॉकी राष्ट्र है।
यह शताब्दी समारोह न केवल अतीत की उपलब्धियों को सम्मानित करता है, बल्कि भविष्य के लिए नवाचार, समावेशन और संस्थागत सहयोग के माध्यम से भारतीय हॉकी के पुनरुत्थान का संकल्प भी मजबूत करता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| कार्यक्रम | भारतीय हॉकी शताब्दी समारोह 2025 |
| तिथि | 7 नवम्बर 2025 |
| स्थल | मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, नई दिल्ली |
| मुख्य अतिथि | डॉ. मनसुख मांडविया, किरेन रिजिजू, उदयनिधि स्टालिन |
| आयोजित मैच | 550 ज़िलों में 1,400 से अधिक मैच |
| स्मारक ग्रंथ | “100 इयर्स ऑफ इंडियन हॉकी” |
| प्रदर्शनी मैच | केंद्रीय मंत्रियों की टीम बनाम हॉकी इंडिया मिश्रित टीम |
| ओलंपिक रिकॉर्ड | 8 स्वर्ण पदक, कुल 13 ओलंपिक पदक |
| प्रमुख हस्तियाँ | ध्यानचंद, बलबीर सिंह सीनियर |
| मुख्य संदेश | हॉकी भारत की शान और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक |





