इंस्टीट्यूशनल कदम
भारत के कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) ने 19 नवंबर 2025 को हैदराबाद में एक नए नेशनल हब — फाइनेंशियल ऑडिट के लिए सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस — की स्थापना की घोषणा की। इस सेंटर को भारत के पब्लिक-फाइनेंस सिस्टम में ऑडिट क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट के तौर पर देखा जा रहा है।
स्टैटिक GK फैक्ट: CAG संविधान के आर्टिकल 148 के तहत भारत में सुप्रीम ऑडिट इंस्टीट्यूशन है।
उद्देश्य और मुख्य काम
यह सेंटर फाइनेंशियल ऑडिटिंग में ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस के लिए एक इनक्यूबेटर के तौर पर काम करेगा, और उन्हें भारतीय हालात के हिसाब से ढालेगा। यह ऑडिटर के प्रोफेशनल डेवलपमेंट पर ज़ोर देगा, रिसर्च को सपोर्ट करेगा, और पूरे डिपार्टमेंट में ऑडिट मेथड के स्टैंडर्डाइजेशन को आगे बढ़ाएगा। एक बड़ा बदलाव डेटा-ड्रिवन ऑडिटिंग की तरफ है: सैंपल-बेस्ड चेक से हटकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस्ड एनालिटिक्स का इस्तेमाल करके कॉम्प्रिहेंसिव डेटासेट एनालिसिस की ओर बढ़ना। अकाउंट्स ऑफिस को अब सिर्फ फॉर्मैलिटी के बजाय डिटेल्ड फाइनेंशियल जानकारी (वाउचर, सैंक्शन, चालान) के रिपॉजिटरी के तौर पर देखा जाता है।
एक और पहलू है ऑडिट प्रोसेस में एनवायर्नमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ESG) क्राइटेरिया को इंटीग्रेट करना — जो ट्रेडिशनल फाइनेंशियल ओवरसाइट से परे मॉडर्न अकाउंटेबिलिटी की मांगों को दिखाता है।
बदलाव का महत्व
यह पहल भारत में पब्लिक-सेक्टर ऑडिटिंग के तरीके में एक स्ट्रेटेजिक बदलाव को दिखाता है। नया सेंटर एक यूनिफाइड अप्रोच को इनेबल करता है, जिससे ऑटोनॉमस बॉडी और PSU में ऑडिट टेम्प्लेट में अंतर कम होता है।
पूरे डेटासेट और AI का इस्तेमाल करके, CAG को ज़्यादा कम्पेरेबिलिटी और क्लैरिटी के साथ शार्प, एविडेंस-बेस्ड ऑडिट फाइंडिंग्स की उम्मीद है। स्टैंडर्डाइज्ड मेथडोलॉजी फिस्कल ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक फाइनेंस में भरोसे को मजबूत करती हैं। गवर्नेंस और एग्जाम के लिए ज़रूरी बातें
गवर्नेंस के लिए, यह डेवलपमेंट ऑडिट इकोसिस्टम की क्षमता को बढ़ाता है ताकि वह ईज़ ऑफ़ लिविंग, ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस और दूसरे नागरिक-केंद्रित नतीजों जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को सपोर्ट कर सके।
कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए, यह टॉपिक ऑडिट इनोवेशन, फिस्कल ओवरसाइट मैकेनिज्म, गवर्नेंस में टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी ऑडिटिंग जैसे विषयों पर बात करता है।
स्टेटिक GK टिप: हैदराबाद तेज़ी से सभी सेक्टर में एडवांस्ड सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस के लिए एक नेशनल हब बनता जा रहा है।
चुनौतियाँ और आगे का रास्ता
मुख्य चुनौतियों में ऑडिट ऑफिस में क्षमता बनाना, पुराने अकाउंटिंग सिस्टम को अपग्रेड करना और यह पक्का करना शामिल है कि ESG मेट्रिक्स सिर्फ़ ऐड-ऑन न रहकर रूटीन ऑडिट प्लानिंग में शामिल हो जाएं। राज्य-विशिष्ट बदलावों का सम्मान करने के लिए स्टैंडर्ड मेथड में फ्लेक्सिबिलिटी की ज़रूरत है।
स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| संस्थान | भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) |
| पहल | वित्तीय लेखा परीक्षा उत्कृष्टता केंद्र, हैदराबाद |
| घोषणा तिथि | 19 नवम्बर 2025 |
| प्रमुख फोकस क्षेत्र | नवाचार, शोध, वित्तीय लेखा परीक्षा में प्रशिक्षण |
| कार्य-पद्धति परिवर्तन | नमूना-आधारित लेखा परीक्षा से पूर्ण आँकड़ा–आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता संचालित विश्लेषण की ओर |
| तकनीकी उपकरण | कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उन्नत आँकड़ा विश्लेषण प्रणाली |
| सतत विकास संबंध | लेखा परीक्षा योजना में पर्यावरण–सामाजिक–सुशासन (ईएसजी) मापदंडों का समावेश |
| रणनीतिक उद्देश्य | लेखा परीक्षा पद्धतियों का मानकीकरण तथा राजकोषीय पारदर्शिता को सुदृढ़ करना |





