पृष्ठभूमि और अनुमोदन
केंद्रीय कैबिनेट ने महाराष्ट्र में नासिक, सोलापुर और अक्कलकोट को जोड़ने वाले 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। यह फैसला नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने लिया।
इस परियोजना में ₹19,142 करोड़ का निवेश होगा और इसे BOT (टोल) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। यह भारत के एकीकृत, उच्च क्षमता वाले परिवहन बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है।
स्टेटिक जीके तथ्य: ग्रीनफील्ड परियोजनाएं पहले से अविकसित भूमि पर बनाए गए बुनियादी ढांचे को संदर्भित करती हैं, जिससे बेहतर डिजाइन मानकों और संरेखण लचीलेपन की अनुमति मिलती है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
इस कॉरिडोर की कुल लंबाई 374 किमी होगी और यह पूरी तरह से एक्सेस-कंट्रोल्ड होगा। यह डिज़ाइन नियंत्रित प्रवेश और निकास बिंदुओं के साथ निर्बाध उच्च गति आवाजाही सुनिश्चित करता है।
इस राजमार्ग की योजना सड़क सुरक्षा में सुधार, भीड़भाड़ कम करने और यात्री और माल ढुलाई दोनों यातायात का समर्थन करने के लिए बनाई गई है। एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर विश्व स्तर पर कम दुर्घटना दर और उच्च औसत गति से जुड़े होते हैं।
स्टेटिक जीके टिप: एक्सेस-कंट्रोल्ड राजमार्ग आमतौर पर धीमी गति वाले यातायात और सीधे क्रॉसिंग को प्रतिबंधित करते हैं, जिससे परिचालन दक्षता में सुधार होता है।
कनेक्टिविटी और नेटवर्क एकीकरण
नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट कॉरिडोर नासिक, अहिल्यानगर, सोलापुर और अक्कलकोट सहित प्रमुख शहरी और आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगा। यह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और समृद्धि महामार्ग जैसे रणनीतिक राष्ट्रीय गलियारों के साथ एकीकृत होगा।
यह संरेखण कुरनूल और चेन्नई बंदरगाह की ओर जाने वाले दक्षिणी गलियारों के साथ भी संबंधों को मजबूत करता है, जिससे एक प्रभावी पश्चिम तट-पूर्वी तट कनेक्टिविटी धुरी बनती है। यह एकीकरण भारत की मल्टीमॉडल परिवहन योजना को बढ़ाता है।
स्टेटिक जीके तथ्य: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर है और राष्ट्रीय माल ढुलाई का एक मुख्य आधार है।
लॉजिस्टिक्स और यात्रा दक्षता में लाभ
इस परियोजना का एक प्रमुख परिणाम यात्रा के समय में लगभग 17 घंटे की कमी की उम्मीद है, जिससे लगभग 45% समय की बचत होगी। यह कॉरिडोर यात्रा की दूरी को भी 201 किमी कम कर देगा।
ये सुधार राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम द्वारा समर्थित औद्योगिक समूहों के लिए माल ढुलाई दक्षता में काफी वृद्धि करेंगे। तेज़ आवाजाही से ईंधन की लागत कम होती है, उत्सर्जन कम होता है, और सप्लाई चेन की विश्वसनीयता बेहतर होती है।
स्टैटिक GK टिप: लॉजिस्टिक्स दक्षता भारत द्वारा अपनी वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्रमुख संकेतक है।
आर्थिक और क्षेत्रीय विकास पर प्रभाव
इस कॉरिडोर से नासिक, अहिल्यानगर, धाराशिव और सोलापुर जिलों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से क्षेत्र में कृषि बाजारों, विनिर्माण इकाइयों और MSMEs को फायदा होगा।
यह परियोजना प्रस्तावित पुणे-नासिक एक्सप्रेसवे की भी पूरक है, जिसे औद्योगिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की आवश्यकता के रूप में पहचाना गया है।
स्टैटिक GK तथ्य: महाराष्ट्र लगातार औद्योगिक उत्पादन और लॉजिस्टिक्स मांग के मामले में भारत के शीर्ष राज्यों में शुमार है।
राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा विजन के साथ तालमेल
यह कॉरिडोर पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप है, जो सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों में एकीकृत योजना पर केंद्रित है। यह परियोजना निर्बाध गतिशीलता और समन्वित बुनियादी ढांचे के निष्पादन का समर्थन करती है।
यह मंज़ूरी कॉरिडोर-आधारित विकास की ओर बदलाव को दर्शाती है, जो गति, सुरक्षा और आर्थिक एकीकरण को जोड़ती है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| परियोजना का नाम | नासिक–सोलापुर–अक्कलकोट ग्रीनफ़ील्ड कॉरिडोर |
| लंबाई | 374 किमी |
| कुल लागत | ₹19,142 करोड़ |
| लेन विन्यास | 6-लेन, एक्सेस-नियंत्रित राजमार्ग |
| क्रियान्वयन मॉडल | BOT (टोल) |
| सम्मिलित राज्य | महाराष्ट्र |
| यात्रा प्रभाव | 17 घंटे की समय बचत एवं 201 किमी दूरी में कमी |
| राष्ट्रीय संबद्धता | पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान |





