बड़ी मंज़ूरी और स्ट्रेटेजिक महत्व
Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA) ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे भारत के पहले अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड-कम-रेल टनल प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट का मकसद असम के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी को मज़बूत करना और नॉर्थईस्ट इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना है।
यह प्रोजेक्ट यात्रा की दूरी और समय को काफी कम कर देगा, जिससे इकोनॉमिक इंटीग्रेशन और डिफेंस मोबिलिटी में सुधार होगा। इसे भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत एक ज़रूरी कदम माना जाता है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ कनेक्टिविटी को मज़बूत करने पर फोकस करती है।
स्टेटिक GK फैक्ट: CCEA की अध्यक्षता भारत के प्रधानमंत्री करते हैं और यह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोनॉमिक प्रोजेक्ट को मंज़ूरी देता है।
लोकेशन और टेक्निकल डिटेल्स
यह टनल ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनाई जाएगी, जो असम में नेशनल हाईवे-15 (NH-15) पर गोहपुर और नेशनल हाईवे-715 (NH-715) पर नुमालीगढ़ को जोड़ेगी। प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 33.7 किलोमीटर है, जिसमें अप्रोच रोड और टनल इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
इसकी खासियत 15.79 किलोमीटर लंबी ट्विन ट्यूब अंडरवाटर टनल है, जो सड़क और रेल ट्रांसपोर्टेशन दोनों में मदद करेगी। यह पहली बार है जब भारत में ऐसा इंटीग्रेटेड टनल सिस्टम लागू किया जा रहा है।
स्टेटिक GK टिप: ब्रह्मपुत्र नदी एशिया की सबसे लंबी नदियों में से एक है और तिब्बत में अंगसी ग्लेशियर से निकलती है, जहाँ इसे यारलुंग त्सांगपो के नाम से जाना जाता है।
इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन मॉडल
यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड के तहत डेवलप किया जाएगा। इस मॉडल के तहत, एक कॉन्ट्रैक्टर पूरे प्रोसेस के लिए ज़िम्मेदार होता है, जिसमें डिज़ाइन, मटीरियल प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन शामिल है।
यह तरीका प्रोजेक्ट को तेज़ी से पूरा करने में मदद करता है और कई एजेंसियों के बीच कोऑर्डिनेशन की दिक्कतों को कम करता है। सरकार फंडिंग देती है, जबकि कॉन्ट्रैक्टर एक तय टाइमलाइन और लागत के अंदर पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर देता है।
यह टनल चार-लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का हिस्सा होगी, जिससे हाई-स्पीड और बिना रुकावट के आवाजाही पक्की होगी। ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स बिना डेवलप हुई ज़मीन पर शुरू से बनाए जाते हैं, जिससे मॉडर्न डिज़ाइन और एफिशिएंसी मिलती है।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत की पहली अंडरवाटर मेट्रो टनल कोलकाता में हुगली नदी के नीचे कोलकाता मेट्रो ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के हिस्से के तौर पर बनाई गई थी।
इकोनॉमिक और डिफेंस महत्व
यह प्रोजेक्ट इंडस्ट्रियल ज़ोन, ट्रेड सेंटर और दूर-दराज के इलाकों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाकर रीजनल इकोनॉमिक डेवलपमेंट को काफी बढ़ावा देगा। इससे असम में टूरिज्म, एग्रीकल्चर और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर को फायदा होगा।
यह टनल नेशनल सिक्योरिटी के लिए भी स्ट्रेटेजिक महत्व रखती है। नॉर्थईस्ट इलाके में सैनिकों और इक्विपमेंट की तेज़ आवाजाही से भारत की डिफेंस तैयारियां मज़बूत होती हैं, खासकर बॉर्डर इलाकों में।
बेहतर कनेक्टिविटी नुमालीगढ़ रिफाइनरी जैसे इंडस्ट्रियल हब के डेवलपमेंट में मदद करेगी, जो असम की एक बड़ी पेट्रोलियम रिफाइनरी है।
स्टेटिक GK टिप: नुमालीगढ़ रिफाइनरी 1999 में बनी थी और असम के गोलाघाट जिले में स्थित है।
नॉर्थईस्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में भूमिका
यह प्रोजेक्ट नॉर्थईस्ट में इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की भारत की बड़ी कोशिश का हिस्सा है, जिसे पहले मुश्किल इलाके और नदी की रुकावटों की वजह से कनेक्टिविटी की दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
टनल, पुल और हाईवे जैसे मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर इस इलाके को बाकी भारत के साथ जोड़ देंगे। इससे इकोनॉमिक ग्रोथ, देश की एकता और इलाके की स्थिरता को सपोर्ट मिलता है।
ट्विन ट्यूब टनल प्रोजेक्ट भारत की इंजीनियरिंग काबिलियत और इंफ्रास्ट्रक्चर के मॉडर्नाइजेशन में एक बड़ा मील का पत्थर है।
स्थैतिक उस्थादियन समसामयिक विषय तालिका
| विषय | विवरण |
| परियोजना का नाम | ट्विन ट्यूब सड़क-सह-रेल सुरंग परियोजना |
| स्वीकृति प्राधिकरण | आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति |
| स्थान | असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे |
| कुल परियोजना लंबाई | 33.7 किलोमीटर |
| सुरंग की लंबाई | 15.79 किलोमीटर की दोहरी सुरंग |
| संपर्क बिंदु | गोहपुर (राष्ट्रीय राजमार्ग-15) और नुमालीगढ़ (राष्ट्रीय राजमार्ग-715) |
| निर्माण मॉडल | अभियांत्रिकी, क्रय और निर्माण मॉडल |
| प्रमुख विशेषता | चार लेन नियंत्रित प्रवेश वाली ग्रीनफील्ड परियोजना |
| सामरिक महत्व | पूर्वोत्तर संपर्क और रक्षा गतिशीलता में सुधार |
| नदी का महत्व | ब्रह्मपुत्र एशिया की सबसे लंबी नदियों में से एक है |





