चुनावी प्रोसेस में डिजिटल इनोवेशन
Bihar ने AI-पावर्ड रिमोट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम पेश किया है, जो भारत के चुनावी डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में एक अहम कदम है। इस प्लेटफॉर्म को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में पेश किया गया था, जिसमें सबको साथ लेकर चलने वाली डेमोक्रेटिक भागीदारी को मजबूत करने में इसकी भूमिका पर ज़ोर दिया गया था। इसे बिहार स्टेट इलेक्शन कमीशन ने उन वोटर्स के लिए एक्सेसिबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए डेवलप और लागू किया था जो पोलिंग बूथ पर नहीं जा सकते थे।
इस सिस्टम को पहली बार 2025 के शहरी लोकल बॉडी इलेक्शन के दौरान इस्तेमाल किया गया था, जहाँ इसने प्रैक्टिकल फीजिबिलिटी दिखाई। अधिकारी अब भविष्य के स्टेट असेंबली इलेक्शन के लिए इसके संभावित विस्तार का मूल्यांकन कर रहे हैं, जिससे बिहार एडवांस्ड डिजिटल वोटिंग सॉल्यूशन अपनाने में पायनियर बन गया है।
स्टेटिक GK फैक्ट: Election Commission of India एक संवैधानिक संस्था है जिसे संविधान के आर्टिकल 324 के तहत बनाया गया है।
भारत का पहला मोबाइल बेस्ड वोटिंग सिस्टम
यह सिस्टम “ई–वोटिंग SECBHR” नाम के एक खास एंड्रॉयड एप्लिकेशन से चलता है, जिसे Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) ने स्टेट इलेक्शन कमीशन के साथ मिलकर बनाया है। इससे एलिजिबल वोटर अपने पर्सनल स्मार्टफोन का इस्तेमाल करके सुरक्षित रूप से वोट डाल सकते हैं।
इस सुविधा से मुख्य रूप से माइग्रेंट वर्कर, स्टूडेंट, बुज़ुर्ग नागरिक, प्रेग्नेंट महिलाएँ और दिव्यांग लोग लाभान्वित होते हैं, जिन्हें अक्सर पोलिंग स्टेशन तक पहुँचने में मुश्किल होती है। इस पहल का मकसद वोटर टर्नआउट बढ़ाना और फिजिकल रुकावटों को हटाकर डेमोक्रेटिक इनक्लूसिवनेस को मज़बूत करना है।
स्टैटिक GK टिप: C-DAC Ministry of Electronics and Information Technology के तहत काम करता है और इसने PARAM सीरीज़ के तहत भारत के सुपरकंप्यूटर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
आइडेंटिटी वेरिफिकेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंटीग्रेशन
सुरक्षित वोटिंग पक्का करने के लिए, यूज़र को OTP वेरिफिकेशन का इस्तेमाल करके अपनी पहचान ऑथेंटिकेट करनी होगी, इसके बाद AI-बेस्ड फेशियल रिकग्निशन और लाइव सेल्फी वैलिडेशन करना होगा। यह वेरिफिकेशन प्रोसेस यूज़र की फेशियल इमेज को ऑफिशियल इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) डेटाबेस से मैच करता है।
यह मल्टी–लेयर ऑथेंटिकेशन इंपर्सोनेशन के रिस्क को कम करता है और यह पक्का करता है कि सिर्फ़ रजिस्टर्ड वोटर ही सिस्टम को एक्सेस कर सकें। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्यूरेसी को बेहतर बनाता है और रिमोट वोटिंग सिस्टम में भरोसा मजबूत करता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) 1993 में चुनावी धोखाधड़ी को रोकने और भरोसेमंद वोटर पहचान बनाने के लिए शुरू किया गया था।
ब्लॉकचेन सिक्योरिटी और ट्रांसपेरेंसी फीचर्स
वोटिंग प्लेटफॉर्म वोटों के टैम्पर–प्रूफ स्टोरेज को पक्का करने के लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है। हर वोट एन्क्रिप्टेड होता है और एक डिसेंट्रलाइज्ड डिजिटल लेजर में स्टोर होता है, जिससे बिना इजाज़त के बदलाव लगभग नामुमकिन हो जाते हैं।
एडवांस्ड सिक्योरिटी मैकेनिज्म में डुअल एन्क्रिप्शन, लाइवनेस डिटेक्शन और डिजिटल सिग्नेचर ऑथेंटिकेशन शामिल हैं। वोट एनॉनिमाइज्ड रहते हैं, और डिक्रिप्शन सिर्फ पोलिंग खत्म होने के बाद सख्त निगरानी में होता है। सिस्टम में Voter Verified Paper Audit Trail (VVPAT) जैसे ऑडिट फीचर्स भी शामिल हैं, जो ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी पक्का करते हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: VVPAT को 2013 में भारतीय चुनावों में पेश किया गया था ताकि वोटर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में अपने डाले गए वोट को वेरिफाई कर सकें।
चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
टेक्नोलॉजिकल सुरक्षा उपायों के बावजूद, डिवाइस सिक्योरिटी, फेशियल रिकग्निशन एक्यूरेसी और डेटा प्राइवेसी रिस्क को लेकर चिंताएं हैं। यह सिस्टम अभी सिर्फ़ Android डिवाइस को सपोर्ट करता है, जिससे सभी वोटर्स के लिए एक्सेस सीमित हो जाता है।
पायलट टेस्टिंग के दौरान, 14,804 कोशिशों में से 3,830 सफल मॉक रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड किए गए, जो टेक्निकल सुधार की गुंजाइश के साथ-साथ ऑपरेशनल वायबिलिटी को दिखाता है। अधिकारियों से उम्मीद है कि वे बड़े पैमाने पर लागू करने से पहले सिस्टम को बेहतर बनाएंगे।
यह पहल भारत के चुनावी सुधारों में एक बड़ी तरक्की दिखाती है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और मोबाइल टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट कर डेमोक्रेटिक भागीदारी और ट्रांसपेरेंसी को मज़बूत किया गया है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| प्रणाली का नाम | ई-वोटिंग SECBHR |
| विकसित किया गया | Centre for Development of Advanced Computing |
| कार्यान्वयन प्राधिकरण | बिहार राज्य निर्वाचन आयोग |
| पहली बार प्रदर्शित | इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 |
| पहली तैनाती | 2025 बिहार शहरी स्थानीय निकाय चुनाव |
| उपयोग की गई प्रमुख तकनीकें | कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, फेशियल रिकग्निशन |
| पहचान सत्यापन | ओटीपी प्रमाणीकरण और EPIC डेटाबेस मिलान |
| सुरक्षा तंत्र | द्विस्तरीय एन्क्रिप्शन और विकेन्द्रीकृत लेजर स्टोरेज |
| चुनावी पारदर्शिता समर्थन | मतदाता सत्यापित पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) अवधारणा का एकीकरण |
| सी-डैक का संचालन मंत्रालय | Ministry of Electronics and Information Technology |





