भारतीय सेना द्वारा ऐतिहासिक चिकित्सा उपलब्धि
भारतीय सेना ने iStent के साथ भारत की पहली 3D फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी करके एक बड़ा मेडिकल मील का पत्थर हासिल किया है।
यह प्रक्रिया 31 दिसंबर, 2025 को आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), दिल्ली कैंट में की गई थी।
यह प्रगति ग्लूकोमा के सटीक निदान और उपचार में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो अपरिवर्तनीय अंधापन के प्रमुख कारणों में से एक है।
आर्मी हॉस्पिटल में सफल सर्जरी
इस अग्रणी प्रक्रिया का नेतृत्व नेत्र विज्ञान विभाग के प्रमुख ब्रिगेडियर डॉ. संजय मिश्रा ने किया।
सर्जरी में उन्नत त्रि-आयामी इमेजिंग का उपयोग करके आंख के एक्वस ह्यूमर ड्रेनेज मार्गों का रीयल-टाइम विज़ुअलाइज़ेशन शामिल था।
इस लाइव मैपिंग के आधार पर, सर्जनों ने एक iStent लगाया, जो एक माइक्रोस्कोपिक डिवाइस है जिसे आंख से तरल पदार्थ के प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
स्टेटिक जीके तथ्य: आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) सशस्त्र बलों के तहत भारत के प्रमुख तृतीयक देखभाल चिकित्सा संस्थानों में से एक है।
3D फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी को समझना
3D फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी एक अत्याधुनिक इमेजिंग तकनीक है जो यह मैप करती है कि आंख से तरल पदार्थ कैसे निकलता है।
यह सर्जनों को सटीक रूप से यह पहचानने की अनुमति देता है कि ड्रेनेज चैनल कहाँ अवरुद्ध हैं या खराब तरीके से काम कर रहे हैं।
यह रीयल-टाइम मैपिंग सामान्य सर्जिकल दृष्टिकोणों पर निर्भर रहने के बजाय लक्षित हस्तक्षेप को सक्षम बनाती है।
स्टेटिक जीके टिप: एक्वस ह्यूमर वह साफ तरल पदार्थ है जो आंखों के दबाव को बनाए रखता है और आंखों के ऊतकों को पोषण देता है।
उन्नत इमेजिंग प्रौद्योगिकी की भूमिका
इस प्रक्रिया की सफलता एक चल स्टैंड-माउंटेड स्पेक्ट्रैलिस इमेजिंग सिस्टम द्वारा संभव हुई जो 3D ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप के साथ एकीकृत है।
यह सेटअप सर्जरी के दौरान आंख की आंतरिक ड्रेनेज संरचनाओं के उच्च-परिभाषा, ज़ूम किए गए, रीयल-टाइम दृश्य प्रदान करता है।
बढ़ी हुई दृश्य स्पष्टता iStent के सटीक प्लेसमेंट को सुनिश्चित करती है, जिससे सर्जिकल सटीकता और रोगी की सुरक्षा में सुधार होता है।
ग्लूकोमा उपचार में iStent का महत्व
iStent एक माइक्रो-इम्प्लांट है जिसका उपयोग न्यूनतम इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी में किया जाता है।
यह एक्वस ह्यूमर के प्राकृतिक प्रवाह को बेहतर बनाकर इंट्राओकुलर दबाव को कम करने में मदद करता है।
आंखों का दबाव कम करना ग्लूकोमा के कारण होने वाली ऑप्टिक तंत्रिका क्षति को धीमा करने या रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
स्टैटिक GK फैक्ट: सामान्य इंट्राओकुलर प्रेशर आमतौर पर 10–21 mm Hg के बीच होता है।
भारत में ग्लूकोमा देखभाल के लिए महत्व
ग्लूकोमा अक्सर बिना किसी शुरुआती चेतावनी के चुपचाप बढ़ता है।
भारत में कई मरीजों का पता तभी चलता है जब स्थायी दृष्टि हानि हो चुकी होती है।
3D फ्लेक्स एक्वस एंजियोग्राफी की शुरुआत से पहले पता लगाना और सटीक इलाज संभव होता है, जिससे लंबे समय तक देखने के नतीजे बेहतर होते हैं।
कमांड हॉस्पिटल लखनऊ तक विस्तार
इस प्रक्रिया की सफलता के बाद, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएँ कमांड हॉस्पिटल, लखनऊ में भी यही उन्नत सिस्टम लगाने की योजना बना रही हैं।
यह अस्पताल छह राज्यों और नेपाल में लगभग 3.5 लाख मरीजों को सेवा देता है।
यह विस्तार रक्षा कर्मियों, पूर्व सैनिकों और नागरिकों के लिए उन्नत नेत्र देखभाल को काफी मजबूत करेगा।
स्टैटिक GK फैक्ट: सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएँ कमांड, जोनल और पेरिफेरल अस्पतालों के माध्यम से पूरे भारत में व्यापक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करती हैं।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| चिकित्सा उपलब्धि | भारत में पहली बार iStent के साथ 3D फ्लेक्स एक्वियस एंजियोग्राफी |
| प्रक्रिया करने वाली संस्था | भारतीय सेना |
| अस्पताल | आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), दिल्ली कैंट |
| प्रमुख सर्जन | ब्रिगेडियर डॉ. संजय मिश्रा |
| लक्षित रोग | ग्लूकोमा |
| प्रमुख उपकरण | iStent माइक्रो-इम्प्लांट |
| इमेजिंग तकनीक | 3D माइक्रोस्कोप के साथ स्पेक्ट्रालिस सिस्टम |
| भविष्य में विस्तार | कमांड हॉस्पिटल, लखनऊ |
| लाभार्थी वर्ग | रक्षा कर्मी, पूर्व सैनिक एवं नागरिक |
| राष्ट्रीय महत्व | सटीक नेत्र शल्य चिकित्सा में उल्लेखनीय प्रगति |





