लेजिस्लेटिव कामकाज में डिजिटल रिफॉर्म
आंध्र प्रदेश लेजिस्लेचर असेंबली ने 14 फरवरी, 2026 को MLA के लिए AI-बेस्ड डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम शुरू किया, जो एक बड़ा एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म है। इस पहल की घोषणा स्पीकर चौधरी अय्यन्ना पात्रुडू ने बजट सेशन 2026 की शुरुआत के दौरान की थी। इसका मकसद लेजिस्लेटिव कार्यवाही में अकाउंटेबिलिटी, ट्रांसपेरेंसी और एफिशिएंसी में सुधार करना है।
यह नोटिफिकेशन लेजिस्लेचर सेक्रेटरी जनरल प्रसन्ना कुमार सूर्यदेवरा ने जारी किया, जिसमें इसे तुरंत लागू करने की पुष्टि की गई। फिजिकल अटेंडेंस रजिस्टर पर साइन करने का पारंपरिक सिस्टम बंद कर दिया गया। यह लेजिस्लेटिव संस्थाओं में टेक्नोलॉजी–ड्रिवन गवर्नेंस की ओर एक बदलाव को दिखाता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: आंध्र प्रदेश लेजिस्लेचर असेंबली एक यूनिकैमरल लेजिस्लेचर है जिसमें 175 चुने हुए MLA होते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फेशियल रिकग्निशन की भूमिका
अटेंडेंस सिस्टम, MLA की मौजूदगी रिकॉर्ड करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाली फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है। असेंबली चैंबर के अंदर खास PTZ (पैन–टिल्ट–ज़ूम) कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे चेहरे के फीचर्स के आधार पर विधायकों की पहचान करते हैं और उनकी फिजिकल मौजूदगी को वेरिफाई करते हैं।
अटेंडेंस तभी रिकॉर्ड की जाती है जब सदस्य अपनी तय सीटों पर बैठते हैं, जिससे सही पहचान पक्की होती है। यह सिस्टम मौजूदगी के समय को भी मॉनिटर करता है, देर से आने वालों और जल्दी जाने वालों का पता लगाता है। इससे पूरा और भरोसेमंद अटेंडेंस डेटा पक्का होता है।
स्टैटिक GK टिप: फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी एक बायोमेट्रिक सिस्टम है जो चेहरे की खासियतों के आधार पर लोगों की पहचान करता है।
जवाबदेही और अनुशासन को मजबूत करना
यह सुधार तब लाया गया जब कुछ विधायकों ने कार्यवाही में हिस्सा लिए बिना ही हाजिरी लगा दी थी। नया सिस्टम मैनुअल रजिस्टर को खत्म करके ऐसे गलत इस्तेमाल को रोकता है। यह पक्का करता है कि अटेंडेंस सीधे असेंबली चैंबर के अंदर असल मौजूदगी से जुड़ी हो।
हिस्सेदारी के समय को डिजिटली मॉनिटर करके, असेंबली का मकसद लेजिस्लेटिव अनुशासन और प्रोसीजरल इंटीग्रिटी को बेहतर बनाना है। यह सुधार इंस्टीट्यूशनल जवाबदेही को मजबूत करता है और जिम्मेदार लेजिस्लेटिव व्यवहार को बढ़ावा देता है।
नो वर्क नो पे प्रपोज़ल से कनेक्शन
डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम की शुरुआत स्पीकर के सुझाए गए “नो वर्क नो पे” पॉलिसी प्रपोज़ल से जुड़ी है। इस प्रपोज़ल पर उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुए 86वें ऑल इंडिया प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस में चर्चा हुई। इस पॉलिसी का मकसद उन लेजिस्लेटर को सैलरी या अलाउंस देने से मना करना है जो असेंबली सेशन में शामिल नहीं होते हैं।
स्पीकर ने काम न करने के बहुत ज़्यादा मामलों में राइट टू रिकॉल मैकेनिज्म पर भी विचार करने का सुझाव दिया। ये उपाय चुने हुए रिप्रेजेंटेटिव के बीच अकाउंटेबिलिटी पक्का करने की एक बड़ी कोशिश को दिखाते हैं।
स्टैटिक GK फैक्ट: ऑल इंडिया प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ लेजिस्लेटिव बॉडीज़ के स्पीकर गवर्नेंस रिफॉर्म्स पर चर्चा करते हैं।
बड़े डिजिटल गवर्नेंस इनिशिएटिव्स का हिस्सा
यह रिफॉर्म पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में डिजिटल गवर्नेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ते हुए अपनाने को दिखाता है। पूरे भारत में सरकारें एफिशिएंसी, ट्रांसपेरेंसी और मॉनिटरिंग को बेहतर बनाने के लिए AI का तेज़ी से इस्तेमाल कर रही हैं। आंध्र प्रदेश असेंबली अपने लेजिस्लेटिव प्रोसेस को मॉडर्न बनाकर इस ट्रेंड में शामिल हो गई है।
यह इनिशिएटिव जनता का भरोसा बढ़ाता है और डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशन्स को मज़बूत करता है। यह टेक्नोलॉजी-ड्रिवन रिफॉर्म्स को अपनाने में दूसरी लेजिस्लेटिव बॉडीज़ के लिए एक मिसाल भी कायम करता है।
स्टैटिक GK टिप: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मतलब है मशीनें ऐसे काम करती हैं जिनके लिए आम तौर पर इंसानी इंटेलिजेंस की ज़रूरत होती है, जैसे पहचानना और फ़ैसला लेना।
स्थैतिक उस्थादियन समसामयिक विषय तालिका
| विषय | विवरण |
| सुधार | आंध्र प्रदेश विधानसभा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू |
| कार्यान्वयन तिथि | 14 फरवरी 2026 |
| घोषणा की | चिंताकायला अय्यन्ना पात्रुडु |
| प्रयुक्त तकनीक | फेसियल रिकग्निशन तकनीक एवं पीटीजेड कैमरे |
| मुख्य उद्देश्य | जवाबदेही और पारदर्शिता में सुधार |
| पूर्व प्रणाली | मैनुअल उपस्थिति रजिस्टर समाप्त |
| निगरानी सुविधा | विधायकों की उपस्थिति अवधि का ट्रैक |
| संबंधित सम्मेलन | 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन |
| नीति संबंध | ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ प्रस्ताव का समर्थन |
| विधानसभा की सदस्य संख्या | 175 सदस्य |





