विधायी निर्णय
लोकसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है, जिसके तहत अमरावती को आधिकारिक तौर पर आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी घोषित किया गया है। इस संशोधन से राज्य की राजधानी को लेकर पहले से चली आ रही कानूनी अस्पष्टता दूर हो गई है। इस विधेयक को सभी दलों का समर्थन मिला, हालाँकि YSR कांग्रेस पार्टी ने सदन से वॉकआउट कर दिया। यह विधेयक 2 जून, 2024 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू होगा, जिससे कानूनी निश्चितता सुनिश्चित होगी। स्टेटिक GK तथ्य: लोकसभा भारत की संसद का निचला सदन है, जिसमें 543 निर्वाचित सदस्य होते हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि
इस मुद्दे की शुरुआत आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 से हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप तेलंगाना राज्य का गठन हुआ। हैदराबाद को अधिकतम दस वर्षों की अवधि के लिए संयुक्त राजधानी के रूप में नामित किया गया था। हालाँकि, इस अधिनियम में आंध्र प्रदेश के लिए किसी स्थायी राजधानी का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। इसके परिणामस्वरूप लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रही और नीतियों में कई बार बदलाव किए गए। स्टेटिक GK सुझाव: हैदराबाद मूसी नदी के तट पर स्थित है और यह भारत का एक प्रमुख IT हब है।
अमरावती और भूमि पूलिंग मॉडल
- चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में, अमरावती को शुरू में एक ‘ग्रीनफ़ील्ड‘ राजधानी शहर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत एक बड़े पैमाने पर भूमि पूलिंग योजना लागू की गई, जिसमें किसानों से लगभग 30,000 एकड़ ज़मीन ली गई थी। इस मॉडल का उद्देश्य वैश्विक स्तर के बुनियादी ढाँचे से युक्त एक आधुनिक प्रशासनिक शहर का निर्माण करना था। यह भारत की सबसे बड़ी स्वैच्छिक भूमि पूलिंग पहलों में से एक थी। स्टेटिक GK तथ्य: अमरावती आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर स्थित है।
तीन राजधानियों का प्रस्ताव
2019 में सरकार बदलने के बाद, YSR कांग्रेस पार्टी ने एक विकेंद्रीकृत शासन मॉडल का प्रस्ताव रखा। इसमें तीन राजधानियों का सुझाव दिया गया था: विशाखापत्तनम को कार्यकारी, अमरावती को विधायी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी के रूप में। इस प्रस्ताव के कारण प्रशासनिक दक्षता, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक व्यवहार्यता को लेकर बहस छिड़ गई। इसके चलते कानूनी चुनौतियाँ भी सामने आईं और जनता ने विरोध प्रदर्शन भी किए। स्टेटिक GK सुझाव: विशाखापत्तनम भारत के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह शहरों में से एक है।
संशोधन का महत्व
यह नया संशोधन अमरावती को स्पष्ट कानूनी मान्यता प्रदान करता है, जिससे भविष्य में नीतियों में किसी भी तरह के बदलाव की गुंजाइश खत्म हो जाती है। यह प्रशासनिक स्थिरता को मज़बूत करता है और शासन में निरंतरता सुनिश्चित करता है। इस निर्णय से रुके हुए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को फिर से शुरू होने और निवेशकों के विश्वास में सुधार होने की उम्मीद है। एक ही राजधानी वाला मॉडल केंद्रीकृत निर्णय लेने और बेहतर समन्वय को बढ़ावा देता है।
स्टेटिक GK तथ्य: कुरनूल ने 1953 से 1956 तक थोड़े समय के लिए आंध्र राज्य की राजधानी के रूप में कार्य किया था।
शासन और विकास पर प्रभाव
अमरावती को एकमात्र राजधानी घोषित करना नीतिगत स्पष्टता और दीर्घकालिक योजना की दिशा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत है। इससे शहरी विकास को बढ़ावा मिलने और निवेश आकर्षित होने की संभावना है। यह कदम राज्य के विभाजन के बाद लगभग एक दशक से चली आ रही अनिश्चितता को भी समाप्त करता है। यह एक विश्व स्तरीय प्रशासनिक केंद्र बनाने की सरकार की परिकल्पना के अनुरूप है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| पारित विधेयक | आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 |
| राजधानी की स्थिति | अमरावती को एकमात्र राजधानी घोषित |
| पूर्वव्यापी प्रभाव | 2 जून 2024 से लागू |
| मूल अधिनियम | आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 |
| संयुक्त राजधानी | हैदराबाद अधिकतम 10 वर्षों तक |
| भूमि समेकन | लगभग 30,000 एकड़ अधिग्रहित |
| तीन राजधानी योजना | विशाखापट्टनम, अमरावती, कर्नूल |
| प्रमुख प्रभाव | शासन में स्पष्टता और अवसंरचना विकास |





