मिशन का सार
आदित्य-L1 भारत का पहला समर्पित सौर मिशन है, जिसे 2023 में PSLV-C57 से प्रक्षेपित किया गया। यह लैग्रेंज बिंदु-1 (L1) के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित है, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर है। मिशन का मुख्य उद्देश्य कोरोनल हीटिंग, सौर पवन (Solar Wind) त्वरण, सौर फ्लेयर्स, और पृथ्वी-निकट अंतरिक्ष मौसम का अध्ययन करना है।
स्थैतिक जीके तथ्य: लैग्रेंज बिंदु वे स्थान हैं जहाँ दो विशाल पिंडों का गुरुत्वाकर्षण बल किसी छोटे पिंड के परिक्रमण हेतु आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल के बराबर हो जाता है।
उपकरण और पेलोड
मिशन पर 7 पेलोड हैं—कुछ रिमोट सेंसिंग और कुछ इन-सीटू। प्रमुख रिमोट सेंसिंग उपकरण हैं VELC (Visible Emission Line Coronagraph) और SUIT (Solar Ultraviolet Imaging Telescope)। इन-सीटू पेलोड ASPEX (Aditya Solar wind Particle Experiment) सौर पवन के कणों और उनके गुणों को सीधे नापता है।
स्थैतिक जीके टिप: L1 पर हेलो कक्षा अंतरिक्ष यान को न्यूनतम ईंधन में स्थिति बनाए रखने में सहायक होती है।
पहली दृश्यमान-प्रकाश CME प्रेक्षण
VELC की मदद से भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों ने NASA के सहयोग से CME का पहली बार दृश्यमान-प्रकाश स्पेक्ट्रोस्कोपिक प्रेक्षण किया। CME सूर्य की कोरोना परत से प्लाज़्मा और चुम्बकीय क्षेत्र के विशाल उत्सर्जन होते हैं, जो पृथ्वी के अंतरिक्ष मौसम को प्रभावित कर सकते हैं। इस अवलोकन से प्लाज़्मा घनत्व, गति और चुम्बकीय अभिविन्यास जैसे महत्त्वपूर्ण मानकों का आकलन संभव हुआ।
स्थैतिक जीके तथ्य: CMEs उपग्रहों, विद्युत ग्रिड और संचार प्रणालियों को प्रभावित करने वाले भू-चुम्बकीय तूफ़ान पैदा कर सकते हैं।
अंतरिक्ष मौसम के लिए महत्त्व
CME को समझना उन सौर तूफ़ानों की भविष्यवाणी के लिए आवश्यक है जो संचार नेटवर्क, नेविगेशन और उपग्रह परिचालन को बाधित कर सकते हैं। आदित्य-L1 सूर्य की लगातार निगरानी प्रदान करता है, जिससे पूर्वानुमान क्षमता बेहतर होती है। डेटा सौर पवन के वितरण, ताप-विषमदिशात्मकता (temperature anisotropy) और फ्लेयर गतिविधि पर वैश्विक अध्ययनों में भी योगदान देता है।
वैश्विक मिशनों से तुलना
भारत अब उन चुनिंदा देशों में है जिनके पास समर्पित सौर प्रेक्षण मिशन हैं। जापान का Hinotori (ASTRO-A), अमेरिका का Parker Solar Probe (2018) और NASA-ESA का SOHO पूरक सौर आँकड़े देते हैं।
स्थैतिक जीके तथ्य: Parker Solar Probe पहली अंतरिक्षयान है जिसने सूर्य की कोरोना में प्रवेश कर इन-सीटू माप किए।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| मिशन नाम | आदित्य-L1 |
| प्रक्षेपण वर्ष | 2023 |
| लॉन्च वाहन | PSLV-C57 |
| कक्षा | L1 के चारों ओर हेलो कक्षा (पृथ्वी से ~15 लाख किमी) |
| मिशन आयु | 5 वर्ष |
| मुख्य पेलोड | VELC, SUIT, ASPEX (कुल 7) |
| पहला CME अवलोकन | VELC से दृश्यमान-प्रकाश स्पेक्ट्रोस्कोपी द्वारा |
| सहयोग | भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) एवं NASA |
| उद्देश्य | कोरोनल हीटिंग, सौर पवन, सौर फ्लेयर्स और स्पेस वेदर का अध्ययन |
| वैश्विक सौर मिशन | Hinotori (जापान), Parker Solar Probe (अमेरिका), SOHO (NASA-ESA) |





