नवम्बर 30, 2025 5:41 पूर्वाह्न

आदित्य-एल1 मिशन कोरोनाल मास इजेक्शन की निगरानी करता है

समसामयिक विषय: आदित्य-एल1, कोरोनाल मास इजेक्शन, वीईएलसी, नासा, पीएसएलवी-सी57, लैग्रेंज प्वाइंट 1, सौर पवन, सूट, एस्पेक्स, सौर फ्लेयर्स

Aditya-L1 Mission Monitors Coronal Mass Ejections

मिशन का सार

आदित्य-L1 भारत का पहला समर्पित सौर मिशन है, जिसे 2023 में PSLV-C57 से प्रक्षेपित किया गया। यह लैग्रेंज बिंदु-1 (L1) के चारों ओर हेलो कक्षा में स्थापित है, जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर है। मिशन का मुख्य उद्देश्य कोरोनल हीटिंग, सौर पवन (Solar Wind) त्वरण, सौर फ्लेयर्स, और पृथ्वी-निकट अंतरिक्ष मौसम का अध्ययन करना है।
स्थैतिक जीके तथ्य: लैग्रेंज बिंदु वे स्थान हैं जहाँ दो विशाल पिंडों का गुरुत्वाकर्षण बल किसी छोटे पिंड के परिक्रमण हेतु आवश्यक अभिकेन्द्रीय बल के बराबर हो जाता है।

उपकरण और पेलोड

मिशन पर 7 पेलोड हैं—कुछ रिमोट सेंसिंग और कुछ इन-सीटू। प्रमुख रिमोट सेंसिंग उपकरण हैं VELC (Visible Emission Line Coronagraph) और SUIT (Solar Ultraviolet Imaging Telescope)। इन-सीटू पेलोड ASPEX (Aditya Solar wind Particle Experiment) सौर पवन के कणों और उनके गुणों को सीधे नापता है।
स्थैतिक जीके टिप: L1 पर हेलो कक्षा अंतरिक्ष यान को न्यूनतम ईंधन में स्थिति बनाए रखने में सहायक होती है।

पहली दृश्यमान-प्रकाश CME प्रेक्षण

VELC की मदद से भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों ने NASA के सहयोग से CME का पहली बार दृश्यमान-प्रकाश स्पेक्ट्रोस्कोपिक प्रेक्षण किया। CME सूर्य की कोरोना परत से प्लाज़्मा और चुम्बकीय क्षेत्र के विशाल उत्सर्जन होते हैं, जो पृथ्वी के अंतरिक्ष मौसम को प्रभावित कर सकते हैं। इस अवलोकन से प्लाज़्मा घनत्व, गति और चुम्बकीय अभिविन्यास जैसे महत्त्वपूर्ण मानकों का आकलन संभव हुआ।
स्थैतिक जीके तथ्य: CMEs उपग्रहों, विद्युत ग्रिड और संचार प्रणालियों को प्रभावित करने वाले भू-चुम्बकीय तूफ़ान पैदा कर सकते हैं।

अंतरिक्ष मौसम के लिए महत्त्व

CME को समझना उन सौर तूफ़ानों की भविष्यवाणी के लिए आवश्यक है जो संचार नेटवर्क, नेविगेशन और उपग्रह परिचालन को बाधित कर सकते हैं। आदित्य-L1 सूर्य की लगातार निगरानी प्रदान करता है, जिससे पूर्वानुमान क्षमता बेहतर होती है। डेटा सौर पवन के वितरण, ताप-विषमदिशात्मकता (temperature anisotropy) और फ्लेयर गतिविधि पर वैश्विक अध्ययनों में भी योगदान देता है।

वैश्विक मिशनों से तुलना

भारत अब उन चुनिंदा देशों में है जिनके पास समर्पित सौर प्रेक्षण मिशन हैं। जापान का Hinotori (ASTRO-A), अमेरिका का Parker Solar Probe (2018) और NASA-ESA का SOHO पूरक सौर आँकड़े देते हैं।
स्थैतिक जीके तथ्य: Parker Solar Probe पहली अंतरिक्षयान है जिसने सूर्य की कोरोना में प्रवेश कर इन-सीटू माप किए।

Static Usthadian Current Affairs Table

विषय विवरण
मिशन नाम आदित्य-L1
प्रक्षेपण वर्ष 2023
लॉन्च वाहन PSLV-C57
कक्षा L1 के चारों ओर हेलो कक्षा (पृथ्वी से ~15 लाख किमी)
मिशन आयु 5 वर्ष
मुख्य पेलोड VELC, SUIT, ASPEX (कुल 7)
पहला CME अवलोकन VELC से दृश्यमान-प्रकाश स्पेक्ट्रोस्कोपी द्वारा
सहयोग भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) एवं NASA
उद्देश्य कोरोनल हीटिंग, सौर पवन, सौर फ्लेयर्स और स्पेस वेदर का अध्ययन
वैश्विक सौर मिशन Hinotori (जापान), Parker Solar Probe (अमेरिका), SOHO (NASA-ESA)
Aditya-L1 Mission Monitors Coronal Mass Ejections
  1. आदित्यएल1 भारत का पहला सौर मिशन है जिसे 2023 में प्रक्षेपित किया गया।
  2. PSLV-C57 द्वारा लैग्रेंज बिंदु 1 (L1) की परिक्रमा कक्षा में प्रक्षेपित किया गया।
  3. पृथ्वी से दूरी: 5 मिलियन किमी
  4. मिशन अवधि: 5 वर्ष
  5. यह कोरोनाल तापन, सौर पवन, सौर ज्वालाएँ और अंतरिक्ष मौसम का अध्ययन करता है।
  6. VELC, SUIT, ASPEX सहित 7 वैज्ञानिक पेलोड ले जाता है।
  7. VELC ने पहला दृश्यमानप्रकाश कोरोनाल मास इजेक्शन (CME) देखा।
  8. यह मिशन IIA (Indian Institute of Astrophysics) और NASA के सहयोग से संचालित है।
  9. CME (Coronal Mass Ejection) पृथ्वी पर भूचुंबकीय तूफान पैदा कर सकता है।
  10. L1 बिंदु पर हेलो कक्षा निरंतर सौर अवलोकन को सक्षम बनाती है।
  11. ASPEX वास्तविक समय में सौर पवन कणों को मापता है।
  12. यह अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में उपग्रहों की सुरक्षा को सुधारता है।
  13. पावर ग्रिड और संचार प्रणालियों की सुरक्षा में मदद करता है।
  14. तुलनीय मिशन: Parker Solar Probe (अमेरिका), SOHO (NASA–ESA), Hinotori (जापान)
  15. Parker Solar Probe सूर्य के कोरोना में प्रवेश करने वाला पहला अंतरिक्ष यान है।
  16. यह मिशन भारत की सौर अनुसंधान क्षमता को मज़बूत करता है।
  17. सौर भौतिकी में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देता है।
  18. यह सौर तूफानों और ज्वालाओं की भविष्यवाणी में सहायक है।
  19. प्लाज़्मा घनत्व और चुंबकीय क्षेत्रों की समझ में योगदान देता है।
  20. यह भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा में एक गौरवपूर्ण मील का पत्थर है।

Q1. भारत का आदित्य–L1 मिशन कब प्रक्षेपित किया गया था?


Q2. लग्रांज बिंदु 1 पृथ्वी से लगभग कितनी दूरी पर स्थित है?


Q3. आदित्य–L1 पर कौन-से उपकरण ने पहली बार दृश्य प्रकाश (Visible Light) में CME को रिकॉर्ड किया?


Q4. किस भारतीय संस्थान ने NASA के साथ CME अध्ययन में सहयोग किया?


Q5. 2018 में Parker Solar Probe मिशन किस देश ने प्रक्षेपित किया था?


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