वैश्विक विकास भागीदार के रूप में भारत
नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026′ में बोलते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक संघर्षों और अनिश्चितता के बीच भारत को एक स्थिर आर्थिक भागीदार के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में सुधार किसी मजबूरी के कारण नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास के साथ किए जा रहे हैं, और उन्होंने देश के बढ़ते आर्थिक आत्मविश्वास को रेखांकित किया।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल–जून 2026 के दौरान भारत की GDP विकास दर 7.8% रही। IMF ने 2026-27 के लिए अपने विकास पूर्वानुमान को बढ़ाकर 7% कर दिया है, जबकि RBI ने 7.1% विकास दर का अनुमान लगाया है।
स्टैटिक GK तथ्य: GDP (सकल घरेलू उत्पाद) एक निश्चित अवधि के दौरान किसी देश के भीतर उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को मापता है।
आर्थिक मजबूती और संरचनात्मक सुधार
मोदी ने भारत के आर्थिक लचीलेपन के कई संकेतकों पर प्रकाश डाला:
- चालू खाता घाटा (CAD): जो 12-13 साल पहले GDP के 4% से अधिक था, वह पिछले वर्ष घटकर GDP का 0.61% रह गया है।
• विदेशी मुद्रा भंडार: रिपोर्ट के अनुसार, यह 700 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है।
• बैंकिंग क्षेत्र: इसे कई दशकों में अपनी सबसे मजबूत स्थिति में बताया गया है।
• सॉवरेन रेटिंग (संप्रभु रेटिंग): भारत की रेटिंग में सुधार हुआ है, जो बेहतर आर्थिक बुनियादी ढांचे को दर्शाता है।
प्रमुख संरचनात्मक सुधारों में वस्तु एवं सेवा कर (GST), दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC), 29 श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) में मिलाना, और व्यवसाय से जुड़े कई छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाना (decriminalisation) शामिल हैं। मोदी ने सुधारों की इस निरंतर प्रक्रिया को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” (सुधार एक्सप्रेस) का नाम दिया।
स्टैटिक GK तथ्य: GST 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था। संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत GST परिषद का प्रावधान है।
वैश्विक चुनौतियां और विश्वास का संकट
मोदी ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ‘विश्वास‘ को एक बड़ी चुनौती के रूप में चिह्नित किया। सप्लाई चेन, ऊर्जा संसाधन, महत्वपूर्ण खनिज, भुगतान प्रणालियाँ और तकनीक का इस्तेमाल अब भू-राजनीतिक दबाव डालने के साधनों के रूप में तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने वैश्विक व्यापार में रणनीतिक ‘चोकपॉइंट्स‘ (अहम रुकावट वाले बिंदुओं) के उभरने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण हो रहे तेजी से बदलाव, और बढ़ती उम्र वाली आबादी से जुड़ी आर्थिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।
ये घटनाक्रम मजबूत सप्लाई चेन, भरोसेमंद साझेदारियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित करते हैं।
सशक्त बनाने की शक्ति
मोदी के संबोधन का मुख्य विचार “सशक्त बनाने की शक्ति” (Power to Empower) था—यानी भारत की बढ़ती क्षमताओं का इस्तेमाल केवल खुद को फायदा पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि अन्य देशों के लिए अवसर पैदा करने के लिए करना।
इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:
- किफायती दवाएं: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करना।
• डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): आधार और UPI जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल पहचान और भुगतान के क्षेत्र में अपने अनुभव को साझा करना।
• कुशल कार्यबल (Skilled Workforce): वैश्विक उद्योगों के लिए प्रतिभा उपलब्ध कराना।
• ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs): रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2,000 से अधिक ऐसे केंद्र हैं जो अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक कार्यों में मदद करते हैं।
• वैक्सीन कूटनीति (Vaccine Diplomacy): महामारी के दौरान 100 से अधिक देशों को COVID-19 वैक्सीन की आपूर्ति करना।
मोदी ने मानवता और जानवरों के लिए AI के उपयोग पर भी चर्चा की, और तकनीकी विकास से मिलने वाले व्यापक सामाजिक लाभों पर जोर दिया।
स्टैटिक GK टिप: भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में डिजिटल पहचान, भुगतान और डेटा-साझाकरण प्रणालियाँ शामिल हैं, जो वित्तीय समावेशन और सार्वजनिक सेवाओं को कुशलतापूर्वक पहुँचाने में मदद कर सकती हैं।
सशक्तिकरण और ‘ग्लोबल साउथ‘
प्रधानमंत्री ने इस सोच को घरेलू शासन व्यवस्था तक भी पहुँचाया। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों का उद्देश्य नागरिकों को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए, न कि उन्हें प्रशासनिक प्रणालियों पर निर्भर रखना।
उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने 25 करोड़ (250 मिलियन) लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। उन्होंने ‘ग्लोबल साउथ‘ (विकासशील देशों के समूह) के साथ सहयोग पर भी जोर दिया, जिसके माध्यम से भारत अपने साझेदार देशों के साथ ज्ञान, तकनीक और विकास के अनुभव साझा करता है।
निष्कर्ष
भारत का ‘वैश्विक विकास–साझेदार‘ (Global Growth-Partner) दृष्टिकोण आर्थिक मजबूती, संरचनात्मक सुधारों, तकनीकी क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मेल है। “सशक्त बनाने की शक्ति” (Power to Empower) का यह नजरिया राष्ट्रीय विकास को एक ऐसे माध्यम के रूप में पेश करता है, जो साझा समृद्धि को बढ़ावा देता है और वैश्विक स्थिरता को मजबूत करता है।
स्थिर उस्तादियन करेंट अफेयर्स तालिका
| तथ्य | विवरण |
| प्रधानमंत्री | नरेंद्र मोदी |
| मंच | ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026, नई दिल्ली |
| अप्रैल–जून GDP वृद्धि | दी गई रिपोर्ट के अनुसार 7.8% |
| IMF वृद्धि पूर्वानुमान | दी गई रिपोर्ट के अनुसार 2026–27 के लिए 7% |
| RBI वृद्धि अनुमान | दी गई रिपोर्ट के अनुसार 7.1% |
| GST की शुरुआत | 1 जुलाई 2017 |
| GST परिषद | संविधान का अनुच्छेद 279A |
| IBC | दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 |
| डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म | यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) |
| मूल दर्शन | सशक्त बनाने की शक्ति |





