चांडीपुरा वायरस की जांच के लिए केंद्र ने नेशनल आउटब्रेक टीम तैनात की
केंद्र सरकार ने गुजरात और राजस्थान में नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम (NJORT) तैनात करके संदिग्ध चांडीपुरा वायरस बीमारी (CHPV) के मामलों पर अपनी प्रतिक्रिया तेज कर दी है।
यह मल्टी–डिसिप्लिनरी (कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों वाली) टीम आउटब्रेक की जांच, बीमारी की निगरानी, लैब में जांच, मरीजों के इलाज और वेक्टर (रोग फैलाने वाले जीवों) की निगरानी में राज्य सरकारों की मदद करेगी।
इस पहल का समन्वय इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के तहत किया जा रहा है, जिसमें नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) मुख्य समन्वय की भूमिका निभा रहा है।
चांडीपुरा वायरस क्या है?
चांडीपुरा वायरस एक वायरल पैथोजन है जो गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी, खासकर एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) से जुड़ा है।
यह मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (रेत की मक्खी) के जरिए फैलने से जुड़ा है, हालांकि आउटब्रेक के दौरान फैलने के खास तरीकों और इसमें शामिल वेक्टर का पता लगाने के लिए जांच जरूरी है।
नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम में कौन-कौन शामिल है?
NJORT में प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य और पशु-स्वास्थ्य संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं।
प्रमुख संगठन
- नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC)
• इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)
• पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD)
यह टीम गुजरात और राजस्थान में स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेगी।
केंद्र ने टीम क्यों तैनात की है?
केंद्र ने एक समन्वित वैज्ञानिक जांच शुरू की है क्योंकि मौजूदा आउटब्रेक के कई पहलुओं का और आकलन करने की जरूरत है।
मुख्य उद्देश्य
- महामारी विज्ञान संबंधी जांच करना
• बीमारी की निगरानी को मजबूत करना
• लैब में जांच में सुधार करना
• मरीजों के इलाज में मदद करना
• फैलने के संभावित तरीकों की जांच करना
• वेक्टर की निगरानी करना
• संभावित रिज़र्वॉयर (वायरस के स्रोत) की पहचान करना
• सही सार्वजनिक–स्वास्थ्य उपायों की सिफारिश करना
NCDC के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर को भी फील्ड-लेवल की गतिविधियों में समन्वय करने और तेजी से प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कर दिया गया है।
एकीकृत वैज्ञानिक जांच
कई खास रिसर्च संस्थान इस जांच में योगदान दे रहे हैं।
प्रमुख रिसर्च संस्थान
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी (NIV)
• नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी (NIE)
• नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वेक्टर–बॉर्न डिज़ीज़ेज़ रिसर्च (NIVCR)
• नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वेटेरिनरी एपिडेमियोलॉजी एंड डिज़ीज़ इंफॉर्मेटिक्स (NIVEDI)
इस मल्टी–डिसिप्लिनरी (कई क्षेत्रों से जुड़ी) जांच में इन चीज़ों की पड़ताल की जा रही है:
- फैलने के तरीके (ट्रांसमिशन पैटर्न)
• क्लिनिकल लक्षण
• महामारी से जुड़े ट्रेंड
• इलाज के संभावित तरीके
• वायरस की जेनेटिक विशेषताएं
• संभावित वाहक (वेक्टर) और रिज़र्वॉयर (जहाँ वायरस पनपता है)
प्रभावित इलाकों में बेहतर निगरानी
जिन इलाकों से संदिग्ध मामले सामने आ रहे हैं, वहाँ निगरानी बढ़ा दी गई है।
स्वास्थ्य अधिकारी इन मरीज़ों पर नज़र रख रहे हैं:
- एक्यूट फेब्राइल इलनेस (AFI) – तेज़ बुखार वाली बीमारी
• एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES) – दिमागी बुखार
समुदाय स्तर पर भी जांच की जा रही है ताकि ये समझा जा सके:
- बीमारी के फैलने का दायरा
• बिना लक्षण वाले संभावित संक्रमण
• समुदाय स्तर पर फैलाव
• ऐसे समूह जिन्हें ज़्यादा खतरा हो सकता है
इकट्ठा की गई जानकारी अधिकारियों को बीमारी के फैलाव का पैमाना तय करने और सही कंट्रोल उपाय करने में मदद करेगी।
केंद्र की प्रतिक्रिया का महत्व
NJORT की तैनाती बीमारी के फैलाव को संभालने के लिए एक मल्टी–सेक्टरल (कई क्षेत्रों को शामिल करने वाले) तरीके को दिखाती है, जिसमें पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट, मेडिकल रिसर्चर, एपिडेमियोलॉजिस्ट और जानवरों की सेहत के एक्सपर्ट एक साथ आते हैं।
यह तालमेल वाला तरीका इन चीज़ों के लिए ज़रूरी है:
- मामलों का जल्दी पता लगाना
• लैब में तेज़ी से पुष्टि
• बेहतर निगरानी
• फैलने के रास्तों की पहचान
• मरीज़ों की देखभाल को बेहतर बनाना
• वेक्टर (वाहक) की बेहतर निगरानी
• सबूतों पर आधारित पब्लिक हेल्थ उपाय
उस्तादियन समसामयिकी स्थायी तथ्य तालिका
| तथ्य | विवरण |
| रोग | चांदीपुरा वायरस रोग (CHPV) |
| जांच के अंतर्गत राज्य | गुजरात और राजस्थान |
| प्रतिक्रिया दल | राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया दल (NJORT) |
| प्रमुख समन्वय एजेंसी | राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) |
| अन्य एजेंसियाँ | ICMR और DAHD |
| निगरानी कार्यक्रम | एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) |
| निगरानी की जाने वाली स्थितियाँ | AFI और AES |
| आपातकालीन केंद्र | NCDC सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन संचालन केंद्र |
| प्रमुख अनुसंधान संस्थान | NIV, NIE, NIVCR और NIVEDI |
| मुख्य फोकस | निगरानी, निदान, महामारी विज्ञान और वाहक जांच |
| संचरण संबंधी जांच | वाहक और संभावित रोग भंडार |
| प्रमुख उद्देश्य | प्रकोप प्रतिक्रिया और नियंत्रण को मजबूत करना |





