परियोजना अधिसूचना और कानूनी स्थिति
तमिलनाडु सरकार ने आधिकारिक तौर पर परंदूर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजना को एक ‘विशेष परियोजना‘ घोषित कर दिया है। यह वर्गीकरण तमिलनाडु भूमि समेकन (विशेष परियोजनाओं के लिए) अधिनियम, 2023 के तहत प्रदान किया गया है।
यह दर्जा भूमि अधिग्रहण और अनुमोदन प्रक्रियाओं को तेज़ बनाता है। यह कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके बुनियादी ढांचे के विकास में देरी को कम करने में मदद करता है।
स्टेटिक GK तथ्य: ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा एक पूरी तरह नया हवाई अड्डा होता है जिसे शुरू से बनाया जाता है, जबकि ब्राउनफील्ड परियोजनाएँ मौजूदा हवाई अड्डों के विस्तार से जुड़ी होती हैं।
भूमि समेकन ढांचा
तमिलनाडु भूमि समेकन अधिनियम 2023 के तहत, जिन परियोजनाओं के लिए 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि की आवश्यकता होती है, उन्हें ‘विशेष परियोजना‘ के रूप में अधिसूचित किया जा सकता है। यह प्रावधान खंडित भूमि के टुकड़ों के त्वरित समेकन को सुनिश्चित करता है।
परंदूर हवाई अड्डा परियोजना के लिए लगभग 5,746 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। इसमें से लगभग 1,700 एकड़ भूमि पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है, जो परियोजना में निरंतर प्रगति का संकेत है।
राज्य सरकार द्वारा पाँच सदस्यों वाली विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति जन सुनवाई आयोजित करेगी और पारदर्शिता तथा हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मसौदा भूमि समेकन योजना तैयार करेगी।
परियोजना का पैमाना और निवेश
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹27,400 करोड़ है, जो इसे तमिलनाडु की सबसे बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक बनाती है। इस हवाई अड्डे को चार चरणों में विकसित करने की योजना है।
एक बार पूरा हो जाने पर, इसमें प्रति वर्ष लगभग 100 मिलियन यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी। इससे मौजूदा चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पड़ने वाला दबाव काफी कम हो जाएगा।
स्टेटिक GK सुझाव: चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत के सबसे पुराने हवाई अड्डों में से एक है; इसकी स्थापना 1910 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी।
तमिलनाडु के लिए रणनीतिक महत्व
परंदूर हवाई अड्डा तमिलनाडु को एक प्रमुख विमानन और लॉजिस्टिक्स केंद्र में बदलने की क्षमता रखता है। यह पर्यटन, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देगा।
यह परियोजना UDAN (उड़े देश का आम नागरिक) जैसी योजनाओं के तहत विमानन बुनियादी ढांचे के विस्तार के भारत के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है। यह क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक विकास को भी समर्थन प्रदान करती है।
बेहतर कनेक्टिविटी से आस–पास के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को फ़ायदा होगा और परंदूर क्षेत्र में शहरी विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
चुनौतियाँ और चिंताएँ
इसके फ़ायदों के बावजूद, इस प्रोजेक्ट को ज़मीन अधिग्रहण और पर्यावरणीय प्रभाव से जुड़ी चिंताओं का सामना करना पड़ा है। स्थानीय समुदायों ने विस्थापन और रोज़ी–रोटी के नुकसान के मुद्दे उठाए हैं।
सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक चर्चाओं और उचित मुआवज़े के ज़रिए इन चिंताओं को दूर करना है। दीर्घकालिक सफलता के लिए टिकाऊ विकास के तरीके आवश्यक होंगे।
स्टैटिक GK तथ्य: भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लागू करने से पहले अक्सर पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की मंज़ूरी आवश्यक होती है।
आगे की राह
परंदूर हवाई अड्डा परियोजना का सफल क्रियान्वयन भूमि के कुशल एकीकरण, हितधारकों के सहयोग और समय पर मंज़ूरी मिलने पर निर्भर करता है। पारदर्शी शासन इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सही योजना और कार्यान्वयन के साथ, यह प्रोजेक्ट भारत के एविएशन सेक्टर में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है और तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति को मज़बूत कर सकता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| परियोजना का नाम | परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट |
| कानूनी स्थिति | तमिलनाडु अधिनियम 2023 के तहत विशेष परियोजना |
| भूमि आवश्यकता | 5,746 एकड़ |
| अधिग्रहित भूमि | लगभग 1,700 एकड़ |
| परियोजना लागत | ₹27,400 करोड़ |
| विकास चरण | चार चरण |
| यात्री क्षमता | प्रति वर्ष 100 मिलियन |
| मुख्य विशेषता | तेज़ भूमि समेकन और अनुमोदन |





