Akasha300 का परिचय
केरल के स्टार्टअप Spacetime 4D द्वारा विकसित Akasha300 3D प्रिंटर, ISRO के Liquid Propulsion Systems Centre (LPSC) को सौंप दिया गया है। यह भारत के अंतरिक्ष निर्माण इकोसिस्टम में एक बड़ी प्रगति है।
यह प्रिंटर एक इंडस्ट्रियल–ग्रेड सिस्टम है जिसे उच्च तापमान और कई तरह के मटीरियल से 3D प्रिंटिंग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह आयातित एयरोस्पेस कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करके ‘आत्मनिर्भर भारत‘ की दिशा में भारत के प्रयासों को बढ़ावा देता है।
Static GK तथ्य: ISRO की स्थापना 1969 में हुई थी और इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है।
उन्नत डिज़ाइन और क्षमताएँ
Akasha300 को पारंपरिक 3D प्रिंटरों के विपरीत, इंजीनियरिंग–ग्रेड थर्मोप्लास्टिक्स और कंपोजिट्स को संभालने के लिए इंजीनियर किया गया है। यह 350°C तक के नोज़ल तापमान पर काम कर सकता है, और इसे 550°C तक अपग्रेड करने की क्षमता है।
इसमें एक डुअल एक्सट्रूज़न सिस्टम है, जिससे एक ही समय में कई मटीरियल की प्रिंटिंग की जा सकती है। इसका हीटेड बेड और कंट्रोल्ड चैंबर उत्पादन के दौरान सटीकता और संरचनात्मक स्थिरता सुनिश्चित करते हैं।
Static GK टिप: एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग में वस्तुएँ परत–दर–परत बनाई जाती हैं, जिससे सबट्रैक्टिव तरीकों की तुलना में कचरा कम निकलता है।
मटीरियल में नवाचार और एयरोस्पेस में उपयोग
यह प्रिंटर PEEK (Polyether Ether Ketone) और PEKK जैसे उन्नत मटीरियल को सपोर्ट करता है, जो अपने उच्च शक्ति–से–वजन अनुपात और तापीय प्रतिरोध के लिए जाने जाते हैं। ये मटीरियल उन कंपोनेंट्स के लिए ज़रूरी हैं जो अंतरिक्ष की अत्यधिक कठोर परिस्थितियों का सामना करते हैं।
यह कार्बन–फाइबर–प्रबलित कंपोजिट्स के उपयोग को भी संभव बनाता है, जो हल्के होने के साथ-साथ बेहद टिकाऊ भी होते हैं। इससे रॉकेट और उपग्रहों का प्रदर्शन और दक्षता बेहतर होती है।
ISRO के मिशनों में भूमिका
LPSC में इस प्रिंटर की तैनाती से रैपिड प्रोटोटाइपिंग की क्षमताएँ बढ़ गई हैं। अब इंजीनियर कंपोनेंट्स को महीनों के बजाय कुछ ही दिनों में डिज़ाइन, टेस्ट और संशोधित कर सकते हैं।
इससे रॉकेट इंजनों और प्रणोदन प्रणालियों के विकास में काफी तेज़ी आती है। तेज़ पुनरावृति चक्र मिशन की तत्परता और नवाचार की गति को बढ़ाते हैं।
Static GK तथ्य: LPSC PSLV और GSLV जैसे लॉन्च वाहनों में उपयोग होने वाली तरल प्रणोदन प्रणालियों को विकसित करने के लिए ज़िम्मेदार है।
सहायता इकोसिस्टम और विकास
इस प्रिंटर को IIST के Space Technology Innovation and Incubation Centre (STIIC) और Kerala Startup Mission (KSUM) के सहयोग से विकसित किया गया था। यह भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के बीच सहयोग की भूमिका को उजागर करता है।
यह एक रिसर्च प्लेटफॉर्म के तौर पर भी काम करता है, जिससे वैज्ञानिक भविष्य के मिशनों के लिए नए मटीरियल और जटिल डिज़ाइनों के साथ प्रयोग कर पाते हैं।
लागत–दक्षता और आत्मनिर्भरता
पारंपरिक निर्माण विधियों में अक्सर मटीरियल की बर्बादी होती है और लागत भी ज़्यादा आती है। इसके विपरीत, Akasha300 कई महत्वपूर्ण फायदे देता है।
यह उत्पादन का समय कम करता है, बर्बादी को न्यूनतम करता है, और कुल लागत को घटाता है। भारत के अंतरिक्ष मिशनों का कुशलतापूर्वक विस्तार करने के लिए यह बहुत ज़रूरी है।
स्टैटिक GK टिप: तिरुवनंतपुरम में ISRO की कई प्रमुख सुविधाएँ स्थित हैं, जिनमें विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) भी शामिल है।
भविष्य के प्रभाव
Akasha300 जैसी उन्नत 3D प्रिंटिंग तकनीकों को अपनाने से भारत अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष निर्माण के क्षेत्र में सबसे आगे खड़ा हो जाता है। यह स्वदेशी क्षमताओं को मज़बूत करता है और दीर्घकालिक नवाचार को बढ़ावा देता है।
लगातार निवेश के साथ, ऐसी तकनीकें उपग्रह उत्पादन, गहरे अंतरिक्ष मिशनों और दोबारा इस्तेमाल होने वाले लॉन्च सिस्टम में क्रांति ला सकती हैं।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| प्रिंटर का नाम | आकाशा300 त्रि-आयामी प्रिंटर |
| विकसितकर्ता | Spacetime 4D स्टार्टअप |
| तैनाती स्थल | ISRO Liquid Propulsion Systems Centre |
| प्रमुख तकनीक | उच्च तापमान बहु-सामग्री त्रि-आयामी प्रिंटिंग |
| उपयोग की गई सामग्री | उच्च गुणवत्ता वाले पॉलिमर और कार्बन-फाइबर मिश्रित पदार्थ |
| मुख्य लाभ | तेज नमूना निर्माण और लागत में कमी |
| सहयोगी संस्थान | STIIC at IIST, Kerala Startup Mission |
| रणनीतिक प्रभाव | आत्मनिर्भर भारत और अंतरिक्ष नवाचार को बढ़ावा |





