पूरे राज्य में टीकाकरण की पहल
गुजरात सरकार ने 1 मार्च से 15 अप्रैल तक बड़े पैमाने पर फुट एंड माउथ डिज़ीज़ (FMD) टीकाकरण अभियान शुरू किया है। यह अभियान राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) के तहत चलाया जा रहा है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुधन की सुरक्षा करना और किसानों के लिए स्थिर आय सुनिश्चित करना है। इसका लक्ष्य डेयरी क्षेत्र में होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकना भी है, जो ग्रामीण आजीविका के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
स्टैटिक GK तथ्य: गुजरात भारत के प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों में से एक है और अमूल सहकारी आंदोलन के नेतृत्व वाली श्वेत क्रांति में इसकी अहम भूमिका रही है।
कवरेज और कार्यान्वयन
इस टीकाकरण अभियान में गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों को लक्षित किया गया है, जो FMD के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं। ये जानवर आमतौर पर ग्रामीण और अर्ध–शहरी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
पशु चिकित्सकों की टीमें गांवों और डेयरी फार्मों का दौरा कर रही हैं ताकि जानवरों को टीके लगाए जा सकें। इस अभियान के दौरान जानवरों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
घर–घर जाकर टीकाकरण करने का यह तरीका अधिकतम कवरेज सुनिश्चित करता है और ज़िलों में बीमारी फैलने की संभावना को कम करता है।
फुट एंड माउथ डिज़ीज़ (FMD) को समझना
फुट एंड माउथ डिज़ीज़ (FMD) एक अत्यधिक संक्रामक वायरल संक्रमण है जो खुर वाले जानवरों को प्रभावित करता है। यह सीधे संपर्क, दूषित सतहों और कुछ खास परिस्थितियों में हवा के ज़रिए भी तेज़ी से फैलता है।
इसके लक्षणों में बुखार, मुंह और पैरों में छाले, अत्यधिक लार आना और भूख कम लगना शामिल हैं। इन लक्षणों के कारण पशुधन की उत्पादकता में भारी गिरावट आती है।
इसका सबसे गंभीर प्रभाव दूध उत्पादन में कमी के रूप में सामने आता है, जिसका सीधा असर किसानों की आय और डेयरी आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है।
स्टैटिक GK टिप: FMD आमतौर पर इंसानों को प्रभावित नहीं करता, लेकिन पशुधन के नुकसान और व्यापार पर लगने वाली पाबंदियों के कारण इसके आर्थिक परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं।
रोग नियंत्रण में NADCP की भूमिका
राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है। इसका उद्देश्य व्यवस्थित टीकाकरण के ज़रिए FMD और ब्रुसेलोसिस जैसी बीमारियों को पूरी तरह खत्म करना है।
इस कार्यक्रम के तहत, राज्यों में चरणबद्ध तरीके से बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं। इसका लक्ष्य पशुधन की ऐसी आबादी तैयार करना है जो इन बीमारियों से पूरी तरह मुक्त हो।
यह पहल खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आय की स्थिरता और पशु उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं को बढ़ावा देती है।
INAPH के ज़रिए डिजिटल मॉनिटरिंग
गुजरात सरकार रियल–टाइम मॉनिटरिंग के लिए INAPH पोर्टल (जानवरों की उत्पादकता और स्वास्थ्य के लिए सूचना नेटवर्क) का इस्तेमाल कर रही है। हर जानवर की पहचान उसके कान में टैग लगाकर की जाती है।
टीकाकरण की स्थिति और स्वास्थ्य रिकॉर्ड जैसी जानकारी सिस्टम में अपलोड की जाती है। इससे अधिकारियों को कवरेज पर नज़र रखने और कमियों की पहचान करने में मदद मिलती है।
INAPH जैसे डिजिटल टूल पारदर्शिता बढ़ाते हैं और सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करना सुनिश्चित करते हैं।
स्टैटिक GK तथ्य: INAPH सिस्टम को राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) ने जानवरों की उत्पादकता और स्वास्थ्य की निगरानी को बेहतर बनाने के लिए विकसित किया था।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| कार्यक्रम का नाम | राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम |
| राज्य | गुजरात |
| लक्षित रोग | खुरपका-मुंहपका रोग |
| अभियान अवधि | 1 मार्च से 15 अप्रैल |
| शामिल पशु | गाय, भैंस, भेड़, बकरी |
| प्रमुख लक्षण | बुखार, मुंह में छाले, दूध उत्पादन में कमी |
| उपयोग किया गया डिजिटल टूल | INAPH पोर्टल |
| कार्यान्वयन सहयोग | पशु चिकित्सा टीमें और NDDB प्रणाली |
| आर्थिक प्रभाव | डेयरी क्षेत्र और किसानों की आय पर प्रभाव |
| राष्ट्रीय लक्ष्य | खुरपका-मुंहपका रोग और ब्रुसेलोसिस का उन्मूलन |





