नीति की घोषणा और दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने राज्य की समुद्री अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए तमिलनाडु जहाज़ निर्माण नीति 2026 शुरू की है। यह नीति जहाज़ निर्माण, मरम्मत और रीसाइक्लिंग उद्योगों के लिए एक मज़बूत इकोसिस्टम बनाने पर केंद्रित है।
इसका उद्देश्य तमिलनाडु को भारत में समुद्री विनिर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है। यह नीति तटीय आर्थिक क्षेत्रों को बेहतर बनाने और बंदरगाह–आधारित विकास के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।
स्टेटिक GK तथ्य: तमिलनाडु की तटरेखा लगभग 1,076 किमी लंबी है, जो इसे भारत के प्रमुख समुद्री राज्यों में से एक बनाती है।
जहाज़ निर्माण क्लस्टरों का विकास
इस नीति की एक प्रमुख विशेषता रणनीतिक तटीय क्षेत्रों में जहाज़ निर्माण क्लस्टरों का निर्माण करना है। ये क्लस्टर दक्षता में सुधार के लिए बुनियादी ढांचे, कुशल श्रमिकों और लॉजिस्टिक्स सहायता को एकीकृत करेंगे।
क्लस्टर–आधारित दृष्टिकोण लागत को कम करता है और उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है। यह समुद्री क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश को भी आकर्षित करता है।
स्टेटिक GK सुझाव: तमिलनाडु के प्रमुख बंदरगाहों में चेन्नई बंदरगाह, एन्नोर (कामराजर) बंदरगाह और तूतीकोरिन बंदरगाह शामिल हैं।
विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) की भूमिका
नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए, तमिलनाडु राज्य उद्योग संवर्धन निगम (SIPCOT) के तहत एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) स्थापित किया जाएगा। यह SPV जहाज़ निर्माण परियोजनाओं की योजना, वित्तपोषण और निष्पादन का समन्वय करेगा।
SPV मॉडल बेहतर शासन और त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया सुनिश्चित करता है। यह बुनियादी ढांचे के विकास में सार्वजनिक–निजी भागीदारी को भी सुगम बनाता है।
स्टेटिक GK तथ्य: SIPCOT एक राज्य–स्वामित्व वाला संगठन है जो तमिलनाडु में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ज़िम्मेदार है।
हरित पहलों के लिए प्रोत्साहन
यह नीति सतत जहाज़ निर्माण प्रथाओं पर ज़ोर देती है। जो जहाज़ निर्माण इकाइयाँ हरित पहलों में कम से कम ₹100 करोड़ का निवेश करेंगी, उन्हें 50% सब्सिडी मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा ₹50 करोड़ या परियोजना लागत का 2% होगी।
यह प्रोत्साहन अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों और ऊर्जा–कुशल प्रक्रियाओं जैसी पर्यावरण–अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देता है। यह पर्यावरण संरक्षण के लिए वैश्विक समुद्री मानकों के अनुरूप है।
Static GK टिप: भारत पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन (IMO) के नियमों का हस्ताक्षरकर्ता है।
आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव
इस नीति से रोज़गार पैदा होने और समुद्री क्षेत्र से होने वाले निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे वैश्विक जहाज़ निर्माण और मरम्मत बाज़ारों में भारत की स्थिति भी मज़बूत होगी।
जहाज़ों की रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देकर, यह नीति सर्कुलर इकॉनमी के तरीकों का समर्थन करती है। इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होता है और पर्यावरण पर पड़ने वाला बुरा असर कम होता है।
Static GK तथ्य: जहाज़ों की रीसाइक्लिंग के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है; गुजरात में स्थित अलंग दुनिया का सबसे बड़ा जहाज़ तोड़ने वाला यार्ड है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| नीति का नाम | तमिलनाडु शिपबिल्डिंग नीति 2026 |
| घोषित द्वारा | एम. के. स्टालिन |
| उद्देश्य | जहाज निर्माण, मरम्मत और पुनर्चक्रण पारिस्थितिकी तंत्र का विकास |
| प्रमुख रणनीति | शिपबिल्डिंग क्लस्टरों का निर्माण |
| कार्यान्वयन निकाय | SIPCOT के अंतर्गत विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) |
| हरित प्रोत्साहन | ₹50 करोड़ तक 50% सब्सिडी |
| निवेश शर्त | हरित पहलों में न्यूनतम ₹100 करोड़ का निवेश |
| आर्थिक प्रभाव | रोजगार सृजन और निर्यात में वृद्धि |
| पर्यावरणीय फोकस | सतत शिपबिल्डिंग प्रथाओं को बढ़ावा |





