कल्याणकारी योजना की पृष्ठभूमि
‘थालीकु थंगम‘ योजना तमिलनाडु सरकार द्वारा शुरू की गई एक विवाह सहायता पहल थी, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की मदद करना था। इस योजना के तहत युवतियों के विवाह के लिए स्वर्ण सहायता (सोने के रूप में मदद) प्रदान की जाती थी, जिससे परिवारों को विवाह से जुड़े पारंपरिक खर्चों को पूरा करने में मदद मिलती थी।
यह योजना आधिकारिक तौर पर ‘मूवलुर राममिरथम अम्मायर स्मारक विवाह सहायता योजना‘ का ही एक हिस्सा थी, जिसे वर्ष 2011 में शुरू किया गया था। इस योजना का लक्ष्य ऐसे परिवार थे जिनकी मासिक आय ₹6,000 से कम थी; इसके तहत परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ ‘थाली‘ (मंगलसूत्र) बनवाने के लिए सोना भी दिया जाता था।
स्थैतिक सामान्य ज्ञान (Static GK) तथ्य: मूवलुर राममिरथम अम्मायर तमिलनाडु की एक जानी-मानी समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों और ‘देवदासी प्रथा‘ को समाप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया था।
मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला
न्यायिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटना तब घटी, जब मद्रास उच्च न्यायालय की ‘खंडपीठ‘ (Division Bench) ने 12 अगस्त, 2024 को एक ‘एकल न्यायाधीश‘ (Single Judge) द्वारा पारित पिछले आदेश को रद्द कर दिया। एकल न्यायाधीश ने अपने आदेश में यह निर्देश दिया था कि इस योजना का लाभ उन परिवारों तक भी बढ़ाया जाना चाहिए जिनकी मासिक आय ₹12,000 तक है।
हालाँकि, खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह का विस्तार (आय सीमा में वृद्धि) उस ‘रिट याचिका‘ के दायरे से बाहर था। यह मामला मूल रूप से केवल इस बात को तय करने पर केंद्रित था कि क्या याचिकाकर्ता की मासिक आय ₹6,000 से कम थी—जो कि इस योजना के तहत पात्रता की निर्धारित सीमा थी।
न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि आय सीमा का विस्तार करना, असल में सरकारी नीति में बदलाव करने जैसा है; और ऐसा बदलाव न्यायिक निर्देशों के माध्यम से नहीं किया जा सकता है।
न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएँ
खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 226′ के तहत इस तरह के निर्देश जारी करना उचित नहीं है। अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को यह शक्ति प्रदान करता है कि वे मौलिक अधिकारों और अन्य कानूनी अधिकारों को लागू करवाने के लिए ‘रिट‘ (आदेश) जारी कर सकें।
न्यायाधीशों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि न्यायालय, कार्यपालिका द्वारा बनाई गई नीति के स्थान पर अपनी कोई नई नीति लागू नहीं कर सकते हैं। कल्याणकारी योजनाओं का निर्माण सरकार की ‘कार्यपालिका‘ शाखा द्वारा किया जाता है, और उनमें किसी भी प्रकार का संशोधन न्यायिक आदेशों के बजाय प्रशासनिक निर्णयों के माध्यम से ही किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने उन दलीलों को भी खारिज कर दिया जो आय की पात्रता को न्यूनतम वेतन अधिनियम से जोड़ रही थीं, यह देखते हुए कि कोई भी कानूनी प्रावधान इस योजना के लिए ऐसे विस्तार को अनिवार्य नहीं बनाता है।
स्टेटिक GK टिप: अनुच्छेद 226 हाई कोर्ट्स को हैबियस कॉर्पस, मैंडमस, प्रोहिबिशन, सर्टिओरारी और क्वो वारंटो जैसी रिट जारी करने का अधिकार देता है।
योजना का पुनर्गठन
कोर्ट द्वारा उजागर किया गया एक और महत्वपूर्ण पहलू यह था कि स्वर्ण सहायता योजना को 2 अगस्त, 2022 से बंद कर दिया गया था। सरकार ने इसकी जगह मूवलुर राममिरथम अम्मायर उच्च शिक्षा आश्वासन योजना शुरू की।
इस पुनर्गठन ने ध्यान विवाह सहायता से हटाकर महिलाओं की शिक्षा पर केंद्रित कर दिया, जिसका उद्देश्य तमिलनाडु में लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों को बढ़ावा देना था।
कोर्ट ने आगे कहा कि बंद हो चुकी योजना का विस्तार करने से राज्य पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा, खासकर सोने की बढ़ती कीमतों के कारण। कल्याणकारी योजनाओं को सामाजिक उद्देश्यों और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना चाहिए।
याचिकाकर्ता के लिए निहितार्थ
इस मामले में याचिकाकर्ता ने 2021 में इस योजना के लिए आवेदन किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आवेदन पर तभी विचार किया जा सकता है, जब उसके परिवार की आय ₹6,000 प्रति माह से कम हो, जैसा कि मूल नीति के तहत आवश्यक था।
चूंकि नीति स्वयं कानूनी चुनौती के दायरे में नहीं थी, इसलिए कोर्ट ने माना कि पात्रता मानदंडों को न्यायिक व्याख्या के माध्यम से संशोधित नहीं किया जा सकता है।
यह फैसला शक्तियों के पृथक्करण के संवैधानिक सिद्धांत को उजागर करता है, जहां नीति निर्माण कार्यपालिका की जिम्मेदारी बनी रहती है, जबकि कोर्ट्स वैधता और संवैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| योजना का नाम | थालिक्कु थंगम योजना |
| मूल योजना | मूवलूर रामामिर्थम अम्मैयार स्मारक विवाह सहायता योजना |
| प्रारंभ वर्ष | 2011 |
| पात्रता मानदंड | प्रति माह ₹6,000 से कम आय वाले परिवार |
| प्रमुख लाभ | युवतियों के विवाह के लिए सोने की सहायता |
| संबंधित न्यायालय | मद्रास उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच |
| संवैधानिक प्रावधान | भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 |
| न्यायालय का अवलोकन | न्यायपालिका कार्यपालिका की नीति का स्थानापन्न नहीं हो सकती |
| योजना की स्थिति | 2 अगस्त 2022 से बंद |
| प्रतिस्थापन योजना | मूवलूर रामामिर्थम अम्मैयार उच्च शिक्षा आश्वासन योजना |





