छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल की मंज़ूरी
छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने राज्य के भीतर अवैध धार्मिक धर्मांतरण को रोकने के लिए धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 के मसौदे को मंज़ूरी दे दी है। यह फ़ैसला रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान लिया गया।
अब यह विधेयक छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान पेश किया जाएगा। यदि यह पारित हो जाता है, तो यह कानून राज्य के उस कानूनी ढाँचे का हिस्सा बन जाएगा जो धार्मिक धर्मांतरण की प्रथाओं को नियंत्रित करता है।
स्टेटिक GK तथ्य: छत्तीसगढ़ का गठन 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद हुआ था, जिससे यह भारत के सबसे नए राज्यों में से एक बन गया।
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य
धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 का मुख्य उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत बयानी के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है। सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी धार्मिक धर्मांतरण पूरी तरह से व्यक्ति की अपनी स्वैच्छिक पसंद से ही हो।
अधिकारियों का मानना है कि यह कानून व्यक्तियों को अपना धर्म बदलने के लिए दबाव या हेरफेर का शिकार होने से बचाने में मदद करेगा। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना भी है।
यह कदम कई भारतीय राज्यों द्वारा विशिष्ट कानूनी प्रावधानों के माध्यम से धर्मांतरण की गतिविधियों को विनियमित करने के व्यापक प्रयासों को दर्शाता है।
विधेयक के मुख्य प्रावधान
प्रस्तावित छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 उन शर्तों को रेखांकित करता है जिनके तहत धार्मिक धर्मांतरण को अवैध माना जा सकता है। यह उन अनैतिक या अवैध प्रथाओं को रोकने पर केंद्रित है जो व्यक्तियों को अपना धर्म बदलने के लिए प्रभावित करती हैं।
विधेयक का मसौदा निम्नलिखित माध्यमों से किए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाता है:
- बल या ज़बरदस्ती
• प्रलोभन या वित्तीय प्रोत्साहन
• धोखाधड़ी या गलत बयानी
• अनुचित प्रभाव या हेरफेर
इस कानून का उद्देश्य धार्मिक धर्मांतरण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
स्टेटिक GK सुझाव: ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे कई भारतीय राज्यों ने धार्मिक धर्मांतरण को विनियमित करने के लिए इसी तरह के धर्म स्वतंत्रता कानून बनाए हैं।
राज्य सरकार की भूमिका
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस विधेयक को मिली मंज़ूरी छत्तीसगढ़ सरकार का एक महत्वपूर्ण नीतिगत फ़ैसला है। राज्य विधानसभा में पेश होने के बाद, बिल पर विधायकों द्वारा बहस की जाएगी और वोटिंग होगी।
अगर बिल को विधानसभा से मंज़ूरी मिल जाती है, तो यह औपचारिक रूप से राज्य का कानून बन जाएगा और प्रशासन को अवैध धर्मांतरण के मामलों से निपटने में मार्गदर्शन देगा।
यह कदम सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक नियमन से जुड़े कानून बनाने में राज्य विधानसभाओं की भूमिका को उजागर करता है।
स्टेटिक GK तथ्य: भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत, “सार्वजनिक व्यवस्था“ और “पुलिस“ राज्य सूची के अंतर्गत आते हैं, जिससे राज्य सरकारों को इन विषयों से संबंधित कानून बनाने की अनुमति मिलती है।
भारतीय संविधान में धर्म की स्वतंत्रता
भारतीय संविधान अनुच्छेद 25 से 28 के तहत धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है। ये प्रावधान व्यक्तियों को स्वतंत्र रूप से अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने की अनुमति देते हैं।
हालाँकि, ये अधिकार पूर्ण नहीं हैं। संविधान सरकारों को सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के हित में धार्मिक गतिविधियों को विनियमित करने की अनुमति देता है।
प्रस्तावित छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 इसी संवैधानिक ढांचे के अंतर्गत आता है। राज्य सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वायत्तता दोनों की रक्षा करना है, साथ ही धर्मांतरण से जुड़ी गैर–कानूनी प्रथाओं को रोकना है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| विधेयक का नाम | धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026 |
| राज्य | छत्तीसगढ़ |
| अनुमोदन प्राधिकरण | छत्तीसगढ़ राज्य मंत्रिमंडल |
| मुख्यमंत्री | विष्णु देव साय |
| उद्देश्य | अवैध धार्मिक धर्मांतरण को रोकना |
| प्रतिबंधित तरीके | बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी, गलत प्रस्तुति, अनुचित प्रभाव |
| विधायी प्रक्रिया | छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 25–28 धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं |
| संवैधानिक सीमा | धार्मिक गतिविधियों को सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के लिए विनियमित किया जा सकता है |
| राज्य गठन | छत्तीसगढ़ का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ |





