पॉलिसी की मंज़ूरी और स्ट्रेटेजिक विज़न
केरल सरकार ने फरवरी 2026 में भारत की पहली डेडिकेटेड ग्राफीन पॉलिसी को मंज़ूरी दी, जिसका मकसद राज्य को एडवांस्ड मटीरियल रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक ग्लोबल सेंटर में बदलना है। ग्राफीन को इसकी बेहतर ताकत, कंडक्टिविटी और फ्लेक्सिबिलिटी की वजह से एक क्रांतिकारी मटीरियल माना जाता है। यह पॉलिसी केरल की हाई–टेक्नोलॉजी इंडस्ट्रीज़ और इनोवेशन से चलने वाली इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने की लॉन्ग–टर्म स्ट्रेटेजी के साथ अलाइन है।
यह इनिशिएटिव रिसर्च इंस्टीट्यूशन, इंडस्ट्रीज़ और स्टार्ट–अप्स को जोड़ने वाला एक मज़बूत इकोसिस्टम बनाने पर फोकस करता है। इस पॉलिसी से नैनोटेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एनर्जी स्टोरेज जैसे उभरते सेक्टर्स में केरल की कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ने की उम्मीद है।
स्टेटिक GK फैक्ट: केरल 1 नवंबर, 1956 को स्टेट्स रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के तहत बना था, और इसकी राजधानी तिरुवनंतपुरम है।
ग्रेफाइन पार्क और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
पॉलिसी का एक खास हिस्सा ग्रेफाइन पार्क बनाना है, जो ग्राफीन इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक खास इंडस्ट्रियल हब है। सरकार पलक्कड़ में एक ग्राफीन इंडस्ट्रियल पार्क बनाने की योजना बना रही है, जिसे ₹200 करोड़ के इन्वेस्टमेंट के साथ एक डिजिटल इनोवेशन सेंटर से सपोर्ट मिलेगा।
इन्वेस्टमेंट को अट्रैक्ट करने के लिए, केरल सरकार द्वारा मैनेज किए जाने वाले पार्कों में यूनिट लगाने वाली कंपनियों को लीज पेमेंट पर 50 परसेंट सब्सिडी देगा। यह इंसेंटिव ऑपरेशनल कॉस्ट को कम करता है और घरेलू और ग्लोबल कंपनियों को ग्राफीन प्रोडक्शन में इन्वेस्ट करने के लिए बढ़ावा देता है।
यह इंफ्रास्ट्रक्चर कच्चे माल की रिसर्च से लेकर फाइनल प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग तक एक मजबूत सप्लाई चेन बनाने में मदद करेगा, जिससे केरल का इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम मजबूत होगा।
स्टेटिक GK टिप: पलक्कड़ को केरल का गेटवे कहा जाता है क्योंकि यह अपनी स्ट्रेटेजिक लोकेशन के कारण पलक्कड़ गैप के ज़रिए केरल और तमिलनाडु को जोड़ता है।
रिसर्च और इंडस्ट्री के बीच सहयोग को जोड़ना
यह पॉलिसी टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट को तेज़ करने के लिए एकेडमिक इंस्टीट्यूशन और इंडस्ट्री के बीच सहयोग पर ज़ोर देती है। केरल का मकसद ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी जैसी दुनिया की बड़ी यूनिवर्सिटी के साथ पार्टनरशिप करना है, जो मैटेरियल साइंस में एडवांस्ड रिसर्च के लिए जानी जाती हैं।
यूनिवर्सिटी, रिसर्च सेंटर और इंडस्ट्री को जोड़कर, यह पॉलिसी तेज़ी से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और कमर्शियलाइज़ेशन पक्का करती है। यह इंटीग्रेटेड अप्रोच इनोवेशन को सपोर्ट करता है, स्टार्ट–अप को बढ़ावा देता है, और एडवांस्ड सेक्टर में हाई–स्किल्ड रोज़गार के मौके बनाता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: साइंटिस्ट आंद्रे गीम और कॉन्स्टेंटिन नोवोसेलोव ने 2004 में मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में ग्रैफीन को अलग किया, जिसके लिए उन्हें 2010 में फ़िज़िक्स का नोबेल प्राइज़ मिला।
ग्रैफीन के गुण और इस्तेमाल
ग्रैफीन कार्बन एटम की एक सिंगल लेयर है जो हेक्सागोनल लैटिस स्ट्रक्चर में अरेंज होती है। यह स्टील से लगभग 200 गुना ज़्यादा मज़बूत होता है, जबकि बहुत हल्का और फ्लेक्सिबल रहता है। इसमें बेहतरीन इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी और थर्मल स्टेबिलिटी भी होती है, जो इसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में उपयोगी बनाती है।
ग्रैफीन का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, एयरोस्पेस, बायोमेडिकल डिवाइस और रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम में बड़े पैमाने पर होता है। तेज़ प्रोसेसर, फ़्लेक्सिबल डिस्प्ले और एफ़िशिएंट एनर्जी स्टोरेज में इसका इस्तेमाल इसे भविष्य के टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट के लिए ज़रूरी बनाता है।
स्टैटिक GK फ़ैक्ट: ग्रैफ़ीन कार्बन फ़ैमिली से जुड़ा है, जिसमें डायमंड, ग्रैफ़ाइट और फ़ुलरीन शामिल हैं, जिन्हें कार्बन के एलोट्रोप के तौर पर जाना जाता है।
आर्थिक और इंडस्ट्रियल महत्व
फ़ाइनेंस मिनिस्टर के एन बालगोपाल द्वारा पेश किया गया राज्य बजट 2026, ग्रैफ़ीन जैसी नई टेक्नोलॉजी में इन्वेस्टमेंट को सपोर्ट करता है। इंडस्ट्री मिनिस्टर पी राजीव ने ज़ोर दिया कि ग्रैफ़ीन डेवलपमेंट केरल के इंडस्ट्रियल बेस को मज़बूत करेगा और हाई–वैल्यू रोज़गार पैदा करेगा।
यह पॉलिसी केरल के सिल्वर लाइन हाई–स्पीड कॉरिडोर जैसे इंफ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर बड़े फ़ोकस के साथ भी अलाइन है, जिससे कनेक्टिविटी और इकोनॉमिक ग्रोथ में सुधार होता है। यह इनिशिएटिव केरल को भारत में एडवांस्ड मटीरियल इनोवेशन में लीडर बनाता है।
ग्रैफ़ीन मैन्युफ़ैक्चरिंग को बढ़ावा देकर, केरल का मकसद ग्लोबल टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में इंटीग्रेट करना और भविष्य के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट में अपनी भूमिका को बढ़ाना है।
स्थैतिक उस्थादियन समसामयिक विषय तालिका
| विषय | विवरण |
| नीति का नाम | केरल ग्रैफीन नीति |
| स्वीकृति वर्ष | 2026 |
| प्रमुख परियोजना | ग्रेफाइन पार्क |
| औद्योगिक पार्क स्थान | पालक्काड, केरल |
| निवेश राशि | ₹200 करोड़ डिजिटल नवाचार केंद्र |
| ग्रैफीन के खोजकर्ता | आंद्रे गीम और कोंस्तांतिन नोवोसेलोव |
| खोज वर्ष | 2004 |
| प्रमुख वैश्विक साझेदार संस्थान | ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और मैनचेस्टर विश्वविद्यालय |
| ग्रैफीन संरचना | कार्बन परमाणुओं की एकल परत, षट्भुजीय जाल संरचना |
| प्रमुख अनुप्रयोग | इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, एयरोस्पेस, जैव-चिकित्सीय उपकरण |





