बजट 2026 में सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा
Nirmala Sitharaman द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026 में 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को जीवंत सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई। इस पहल का उद्देश्य विरासत पर्यटन, ऐतिहासिक जागरूकता और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। चयनित स्थलों में Lothal, Dholavira, Rakhigarhi, Sarnath, Hastinapur, Leh Palace तथा Adichanallur जैसी ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जगहें शामिल हैं।
यह पहल आधुनिक आधारभूत संरचना के माध्यम से आगंतुक सहभागिता बढ़ाते हुए प्राचीन सभ्यताओं के अवशेषों के संरक्षण के राष्ट्रीय संकल्प को दर्शाती है। इन स्थलों को अनुभवात्मक अध्ययन केंद्रों में परिवर्तित किया जाएगा, जहाँ पुरातत्त्व और पर्यटन का समन्वय होगा।
स्थैतिक तथ्य: केंद्रीय बजट प्रत्येक वर्ष भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अंतर्गत वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
सिंधु घाटी और बौद्ध स्थलों का महत्व
इस योजना के अंतर्गत चुने गए अनेक स्थल सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित हैं, जो विश्व की प्राचीनतम शहरी सभ्यताओं में से एक है। हरियाणा का Rakhigarhi तथा गुजरात के Dholavira और Lothal उन्नत नगर नियोजन और व्यापार व्यवस्था (2600–1900 ईसा पूर्व) के प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।
इसी प्रकार उत्तर प्रदेश के Sarnath और Hastinapur जैसे बौद्ध विरासत स्थल भी शामिल किए गए हैं। सारनाथ वह पवित्र स्थान है जहाँ Gautama Buddha ने अपना प्रथम उपदेश दिया था।
स्थैतिक तथ्य: गुजरात स्थित Dholavira को वर्ष 2021 में विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त हुआ।
आदिचनल्लूर और प्राचीन तमिल सभ्यता
तमिलनाडु के थूथुकुडी ज़िले में स्थित Adichanallur भारत के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में से एक है। यह Thamirabharani नदी के तट पर स्थित है, जिसने दक्षिण भारत में प्रारंभिक मानव बसावट को सहारा दिया।
यहाँ की खुदाइयों से लौह युगीन कलश संस्कृति और प्राचीन तमिल सभ्यता के लगभग 2500 वर्ष पुराने प्रमाण प्राप्त हुए हैं। उन्नत धातु तकनीक, विशिष्ट दफ़न विधियाँ और सामाजिक संगठन के संकेत इस क्षेत्र के सांस्कृतिक विकास की पुष्टि करते हैं।
स्थैतिक तथ्य: Thamirabharani नदी पश्चिमी घाट से निकलकर पूर्णतः तमिलनाडु राज्य में बहती है।
दफ़न प्रणाली और पुरातात्विक खोजें
आदिचनल्लूर विशेष रूप से अपने कलश दफ़न प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ मृत व्यक्तियों को बड़े मिट्टी के पात्रों में दफ़नाया जाता था। इन कलशों में लौह उपकरण, आभूषण, मिट्टी के बर्तन और मानव कंकाल प्राप्त हुए हैं, जो उस समय की सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाते हैं।
इन अवशेषों का वैज्ञानिक प्रलेखन 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश पुरातत्वविद् Alexander Rea द्वारा किया गया। उनके कार्य ने इस स्थल को राष्ट्रीय महत्व का पुरातात्विक केंद्र स्थापित करने में योगदान दिया।
स्थैतिक तथ्य: Archaeological Survey of India की स्थापना वर्ष 1861 में Alexander Cunningham द्वारा की गई थी।
संरक्षण और पर्यटन विकास
Adichanallur आधुनिक संरक्षण उपायों के लिए भी उल्लेखनीय है। यह भारत का पहला पुरातात्विक स्थल बना जहाँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने ऐसे मार्ग बनाए जिनसे आगंतुक बिना नुकसान पहुँचाए खुदाई क्षेत्र को देख सकें।
बजट 2026 के अंतर्गत आदिचनल्लूर को एक प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे इसकी शैक्षिक उपयोगिता और वैश्विक पहचान में वृद्धि होगी। यह पहल तमिलनाडु की प्राचीन विरासत को संरक्षित करते हुए दक्षिण भारतीय सभ्यता की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करेगी।
स्थैतिक उस्थादियन समसामयिक विषय तालिका
| विषय | विवरण |
| बजट घोषणा | बजट 2026 में 15 पुरातात्त्विक विरासत स्थलों के विकास की घोषणा |
| प्रमुख मंत्री | निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत |
| प्रमुख सभ्यता स्थल | सिंधु घाटी सभ्यता के स्थल जैसे राखीगढ़ी, लोथल और धोलावीरा शामिल |
| तमिलनाडु स्थल | आदिचनल्लूर, तूतीकोरिन (थूथुकुडी) जिला, तमिलनाडु |
| नदी का स्थान | तामिराभरणी नदी के तट पर स्थित |
| ऐतिहासिक काल | लौह युग और प्राचीन तमिल सभ्यता के प्रमाण |
| दफन प्रथा | औजार, आभूषण और मिट्टी के बर्तनों सहित कलश दफन के लिए प्रसिद्ध |
| पुरातात्त्विक खोज | कलशों का प्रथम दस्तावेजीकरण पुरातत्वविद् अलेक्जेंडर री द्वारा |
| संरक्षण नवाचार | भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का पहला स्थल जहाँ वॉक-थ्रू रैंप सुविधा |
| पर्यटन उद्देश्य | विरासत पर्यटन और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना |





