आंध्र प्रदेश में रणनीतिक घोषणा
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने जनवरी 2026 में होप आइलैंड में एक नए स्पेसपोर्ट की स्थापना की घोषणा की। यह प्रोजेक्ट राज्य की स्पेस सिटी पहल का हिस्सा है, जिसका मकसद भविष्य के लिए तैयार स्पेस और एयरोस्पेस इकोसिस्टम बनाना है।
यह सुविधा मुख्य रूप से प्राइवेट लॉन्च मिशन के लिए डिज़ाइन की गई है, जो पूरी तरह से सरकार के नेतृत्व वाले स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर से हटकर पब्लिक-प्राइवेट स्पेस डेवलपमेंट मॉडल की ओर एक बदलाव है। यह भारत के कमर्शियलाइज़्ड स्पेस इकोनॉमी की ओर बदलाव को दिखाता है।
स्पेस सिटी विज़न
स्पेस सिटी पहल का मकसद लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च सुविधाओं, स्टार्टअप और इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को एक ही ग्रोथ कॉरिडोर में इंटीग्रेट करना है। इस बड़े विज़न के तहत होप आइलैंड को एक स्पेशलाइज़्ड लॉन्च हब के तौर पर प्लान किया गया है।
इसका फोकस कमर्शियल ऑपरेटरों, प्राइवेट लॉन्च सर्विस प्रोवाइडर्स और उभरते स्पेस स्टार्टअप को सक्षम बनाना है। यह ISRO के नेतृत्व वाली सुविधाओं से परे एक नया संस्थागत स्पेस इकोसिस्टम बनाता है।
भारत के स्पेसपोर्ट नेटवर्क में भूमिका
भारत का स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर एक मल्टी-स्पेसपोर्ट सिस्टम में विकसित हो रहा है। हर साइट को एक खास ऑपरेशनल भूमिका के लिए डिज़ाइन किया गया है।
श्रीहरिकोटा बड़े मिशन के लिए प्राथमिक राष्ट्रीय लॉन्च केंद्र बना हुआ है। कुलशेखरपट्टनम को SSLV पोलर ऑर्बिट मिशन के लिए विकसित किया जा रहा है।
होप आइलैंड एक प्राइवेट और कमर्शियल लॉन्च-केंद्रित स्पेसपोर्ट के रूप में काम करेगा, जिससे मिशन में विविधता और ऑपरेशनल लचीलापन सुनिश्चित होगा।
स्टैटिक GK तथ्य: श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर पूर्वी तट पर स्थित है ताकि पूर्वी लॉन्च के लिए पृथ्वी की घूर्णन गति का लाभ उठाया जा सके।
प्राइवेट स्पेस सेक्टर को बढ़ावा
होप आइलैंड स्पेसपोर्ट सीधे तौर पर भारत के स्पेस सेक्टर के उदारीकरण का समर्थन करता है। प्राइवेट कंपनियाँ तेजी से लॉन्च व्हीकल, सैटेलाइट प्लेटफॉर्म और स्पेस सेवाओं का विकास कर रही हैं।
यह सुविधा छोटे और मध्यम-लिफ्ट लॉन्च मिशन को तेजी से सक्षम बनाएगी, जिससे राष्ट्रीय लॉन्च शेड्यूल पर निर्भरता कम होगी। यह वैश्विक कमर्शियल लॉन्च बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करता है।
यह रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में प्राइवेट भागीदारी को बढ़ावा देने वाली राष्ट्रीय नीतियों के भी अनुरूप है।
भौगोलिक और कक्षीय लाभ
लॉन्च दक्षता में स्थान एक निर्णायक भूमिका निभाता है। भारत का पूर्वी तट अंतरिक्ष लॉन्च के लिए प्राकृतिक लाभ प्रदान करता है। पृथ्वी का पश्चिम से पूर्व की ओर घूमना पूर्व की ओर लॉन्च किए गए रॉकेटों को वेलोसिटी में मदद करता है। इससे ईंधन की खपत कम होती है और पेलोड की क्षमता बढ़ती है।
बंगाल की खाड़ी में होप आइलैंड का तटीय स्थान ऑर्बिटल फ्लेक्सिबिलिटी और मिशन ऑप्टिमाइजेशन में मदद करता है।
स्टेटिक GK टिप: भूमध्य रेखा के करीब लॉन्च साइट्स को पृथ्वी के घूमने से ज़्यादा टेंजेंशियल वेलोसिटी मिलती है, जिससे लॉन्च की क्षमता बेहतर होती है।
होप आइलैंड की पारिस्थितिक और भौगोलिक पहचान
होप आइलैंड आंध्र प्रदेश के काकीनाडा के तट पर एक छोटा टैडपोल के आकार का द्वीप है। यह बंगाल की खाड़ी में स्थित है और गोदावरी नदी की एक सहायक नदी, कोरिंगा नदी से जमा हुई गाद से बना है।
उत्तरी सिरे को गोदावरी पॉइंट के नाम से जाना जाता है, जो काकीनाडा खाड़ी में प्रवेश का निशान है। यह द्वीप पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील है और कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य के पास स्थित है।
इसके समुद्र तट ओलिव रिडले कछुओं के लिए घोंसले बनाने की जगह हैं, जो एक कमजोर प्रजाति है, जिससे इस क्षेत्र को रणनीतिक महत्व के साथ-साथ पारिस्थितिक महत्व भी मिलता है।
रणनीतिक राष्ट्रीय महत्व
होप आइलैंड स्पेसपोर्ट भारत के अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे की मजबूती को मजबूत करता है। यह विकेंद्रीकरण, मिशन विशेषज्ञता और निजी क्षेत्र के एकीकरण का समर्थन करता है।
यह परियोजना भारत के राज्य-संचालित अंतरिक्ष कार्यक्रम से एक हाइब्रिड वाणिज्यिक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव को दर्शाती है। यह भारत को उभरती हुई वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है।
स्थिर उस्थादियन समसामयिक घटनाएँ तालिका
| विषय | विवरण |
| परियोजना | होप आइलैंड स्पेसपोर्ट |
| राज्य | आंध्र प्रदेश |
| घोषणा करने वाले | एन. चंद्रबाबू नायडू |
| पहल | स्पेस सिटी |
| मुख्य फोकस | निजी एवं वाणिज्यिक प्रक्षेपण मिशन |
| राष्ट्रीय भूमिका | पूरक अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र |
| मौजूदा प्रमुख स्पेसपोर्ट | श्रीहरिकोटा |
| आगामी स्पेसपोर्ट | कुलसेकरपट्टिनम |
| भौगोलिक लाभ | पूर्वी तटरेखा |
| रणनीतिक उद्देश्य | भारत के वाणिज्यिक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना |





