मंज़ूरी और रणनीतिक संदर्भ
गुजरात सरकार ने गांधीनगर के पास GIFT सिटी में इंडियन AI रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (IAIRO) की स्थापना के लिए सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है। यह फैसला भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च इकोसिस्टम को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है। यह मंज़ूरी मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में दी गई।
यह पहल समावेशी विकास और तकनीकी नेतृत्व के लिए AI का लाभ उठाने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसका लक्ष्य भारत को उन्नत AI रिसर्च और एप्लाइड इनोवेशन के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
स्टेटिक GK तथ्य: गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT सिटी) भारत का पहला ऑपरेशनल स्मार्ट सिटी और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र है।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप फ्रेमवर्क
IAIRO की स्थापना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत की जाएगी। इस पार्टनरशिप में गुजरात सरकार, केंद्र सरकार और इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) मुख्य निजी भागीदार के रूप में शामिल हैं।
यह त्रिपक्षीय मॉडल सरकार और उद्योग के बीच एक समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसे एक स्थायी AI रिसर्च संस्थान बनाने के लिए नीतिगत समर्थन, सार्वजनिक फंडिंग और क्षेत्रीय विशेषज्ञता को एक साथ लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
स्टेटिक GK टिप: भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन परियोजनाओं में दक्षता में सुधार करते हुए वित्तीय बोझ को कम करने के लिए आमतौर पर PPP मॉडल का उपयोग किया जाता है।
कानूनी ढांचा और फंडिंग पैटर्न
यह संगठन कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक सेक्शन 8 गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में पंजीकृत होगा। यह ढांचा यह सुनिश्चित करता है कि यदि कोई लाभ होता है, तो उसे रिसर्च और संस्थागत विकास में फिर से निवेश किया जाए।
कुल परियोजना लागत पाँच वर्षों में ₹300 करोड़ होने का अनुमान है। फंडिंग समान रूप से साझा की जाएगी, जिसमें राज्य सरकार, केंद्र सरकार और निजी भागीदार प्रत्येक 33.33% का योगदान देंगे। इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस 2025-26 के दौरान ₹25 करोड़ का योगदान देगा।
राष्ट्रीय और राज्य AI नीतियों के साथ तालमेल
IAIRO इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के इंडिया AI मिशन के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। यह मिशन कंप्यूटिंग क्षमता के निर्माण, इनोवेशन को बढ़ावा देने और सभी क्षेत्रों में ज़िम्मेदार AI अपनाने को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
राज्य स्तर पर, यह पहल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा तैयार किए गए गुजरात AI एक्शन प्लान का समर्थन करती है। गुजरात ने AI-आधारित विकास रणनीतियों को गाइड करने के लिए एक डेडिकेटेड AI टास्क फोर्स भी बनाया है।
स्टैटिक GK फैक्ट: MeitY भारत में डिजिटल गवर्नेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और उभरती टेक्नोलॉजी के लिए नोडल मिनिस्ट्री है।
जनादेश और मुख्य कार्य
IAIRO को एक मल्टीडिसिप्लिनरी AI रिसर्च हब के रूप में देखा जा रहा है। इसके जनादेश में एडवांस्ड AI रिसर्च और डेवलपमेंट, AI-संचालित प्रोडक्ट्स का निर्माण, और एकेडेमिया, स्टार्टअप और सरकारी एजेंसियों के साथ सहयोग शामिल है।
मुख्य फोकस क्षेत्रों में इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी जेनरेशन, कैपेसिटी बिल्डिंग और पॉलिसी-ओरिएंटेड AI रिसर्च शामिल हैं। संगठन का लक्ष्य मूलभूत रिसर्च और वास्तविक दुनिया के एप्लीकेशन्स के बीच के अंतर को पाटना है।
टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और कंप्यूट मॉडल
संगठन एक हाइब्रिड कंप्यूट मॉडल के तहत काम करेगा। यह मॉडल जटिल AI वर्कलोड को सपोर्ट करने के लिए ऑन-प्रिमाइसेस हाई-परफॉर्मेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केलेबल कंप्यूटिंग रिसोर्सेज के साथ इंटीग्रेट करता है।
यह दृष्टिकोण लॉन्ग-टर्म रिसर्च, सुरक्षित डेटा हैंडलिंग और कंप्यूट-इंटेंसिव AI मॉडल के विकास को सक्षम बनाता है। यह डेटा सॉवरेनिटी की आवश्यकता वाले संवेदनशील क्षेत्रों में इनोवेशन को भी सपोर्ट करता है।
स्टैटिक GK टिप: स्केलेबिलिटी, सुरक्षा और लागत दक्षता को संतुलित करने के लिए AI रिसर्च में हाइब्रिड कंप्यूटिंग का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
क्षेत्रीय प्रभाव और विकास लक्ष्य
IAIRO से हेल्थकेयर, शिक्षा, कृषि और गवर्नेंस में AI-आधारित हस्तक्षेपों को बढ़ावा देने की उम्मीद है। व्यापक उद्देश्य जिम्मेदार AI डिप्लॉयमेंट के माध्यम से स्थायी विकास को बढ़ावा देते हुए जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना है।
GIFT सिटी में AI रिसर्च को संस्थागत बनाकर, गुजरात भारत में एक प्रमुख टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| संगठन का नाम | भारतीय एआई अनुसंधान संगठन (IAIRO) |
| स्थान | GIFT सिटी, गांधीनगर के निकट, गुजरात |
| मॉडल | सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) |
| कानूनी स्थिति | कंपनी अधिनियम की धारा 8 के अंतर्गत गैर-लाभकारी कंपनी |
| परियोजना व्यय | पाँच वर्षों में ₹300 करोड़ |
| निजी भागीदार | इंडियन फ़ार्मास्युटिकल एलायंस |
| राष्ट्रीय समन्वय | इंडिया एआई मिशन |
| प्रौद्योगिकी मॉडल | हाइब्रिड कंप्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर |





