संरक्षण के लिए निधि आवंटन
तमिलनाडु सरकार ने चार कम ज्ञात संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए ₹1 करोड़ की मंजूरी दी है।
इसमें से ₹48.5 लाख राशि लायन-टेल्ड मकाक (Lion-tailed Macaque) के संरक्षण के लिए निर्धारित की गई है। यह प्राइमेट प्रजाति पश्चिमी घाट (Western Ghats) की स्थानिक (Endemic) और गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically Endangered) प्रजाति है।
इस निधि का उपयोग आवास संरक्षण (Habitat Protection) और जनसंख्या पुनर्वास (Population Recovery) के लिए किया जाएगा।
मद्रास हेजहॉग (Madras Hedgehog), जो तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है, के संरक्षण हेतु ₹20.5 लाख आवंटित किए गए हैं।
इस प्रजाति के लिए आवास संरक्षण और जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे ताकि इसकी संख्या में और गिरावट न हो।
हाइना और महसीर के लिए संरक्षण प्रयास
स्ट्राइप्ड हाइना (Striped Hyena), जो मुदुमलाई टाइगर रिज़र्व जैसे क्षेत्रों में पाई जाती है, को ₹14 लाख दिए गए हैं।
संरक्षण उपायों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और जनसंख्या की निगरानी शामिल है।
गंभीर रूप से संकटग्रस्त हंप-हेडेड महसीर (Hump-headed Mahseer) के लिए ₹17 लाख आवंटित किए गए हैं।
संरक्षण कार्यक्रमों में मॉयर नदी (Moyar River) में इन-सीटू (In situ) प्रजनन और प्राकृतिक पुनःस्थापन (Restocking) शामिल है।
स्थैतिक सामान्य ज्ञान तथ्य: हंप-हेडेड महसीर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की मछलियों में से एक है, जो 1.5 मीटर तक लंबी हो सकती है।
आवास संपर्कता पहल
लायन-टेल्ड मकाक की आवाजाही को बढ़ाने के लिए कैनोपी ब्रिज (Canopy Bridges) बनाए जाएंगे, जिससे वनखंडों के बीच संपर्क (Forest Connectivity) सुधरेगा।
ये पुल मानव बस्तियों से अलग किए गए वनों को जोड़ते हैं, जिससे आवास खंडन (Habitat Fragmentation) में कमी आती है।
महसीर मछली के लिए इन-सीटू प्रजनन कार्यक्रमों से नदियों में प्राकृतिक आबादी बहाल की जाएगी।
इसके साथ जल गुणवत्ता की निगरानी और आवास संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा।
स्थैतिक सामान्य ज्ञान टिप: पश्चिमी घाट, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) है, में 5000 से अधिक पुष्पीय पौधों की प्रजातियाँ और 300 से अधिक स्थानिक कशेरुकी प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता
संरक्षित क्षेत्रों के आसपास के स्थानीय समुदायों को संरक्षण अभियानों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा।
ईको-टूरिज्म (Eco-Tourism) और सामुदायिक विकास कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों की वन संसाधनों पर निर्भरता घटाने की योजना है।
जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है, क्योंकि संकटग्रस्त प्रजातियाँ पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रभाव और महत्व
यह वित्तीय सहायता और संरक्षण पहलें उन कम प्रसिद्ध प्रजातियों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जो अक्सर बाघ या हाथी जैसी प्रमुख प्रजातियों की छाया में उपेक्षित रह जाती हैं।
इनका संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता (Ecosystem Integrity) बनाए रखने के साथ-साथ भारत की जैव विविधता संधि (Convention on Biological Diversity – CBD) के प्रति प्रतिबद्धता को भी सुदृढ़ करता है।
स्थैतिक सामान्य ज्ञान तथ्य: भारत 17 मेगाविविध देशों में से एक है — यह विश्व की कुल दर्ज प्रजातियों का 7–8% हिस्सा अपने केवल 2.4% भूभाग में समेटे हुए है।
स्थैतिक उस्तादियन करंट अफेयर्स तालिका
| विषय | विवरण |
| स्वीकृत निधि | ₹1 करोड़ – तमिलनाडु सरकार द्वारा |
| लायन-टेल्ड मकाक | ₹48.5 लाख; आवास – पश्चिमी घाट; कैनोपी ब्रिज स्थापित किए जाएंगे |
| मद्रास हेजहॉग | ₹20.5 लाख; तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, केरल के अर्ध-शुष्क क्षेत्र |
| स्ट्राइप्ड हाइना | ₹14 लाख; Near Threatened; मुदुमलाई टाइगर रिज़र्व क्षेत्र |
| हंप-हेडेड महसीर | ₹17 लाख; मॉयर नदी; इन–सीटू प्रजनन और पुनःस्थापन कार्यक्रम |
| संरक्षण उपाय | कैनोपी ब्रिज, आवास पुनर्स्थापन, सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम |
| महत्व | जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना |
| स्थैतिक तथ्य | पश्चिमी घाट – UNESCO साइट; भारत – मेगाविविध देश; महसीर – भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की मछली |





