नवम्बर 30, 2025 5:00 पूर्वाह्न

तमिल कविता की एक आवाज़ को विदाई

करंट अफेयर्स: इरोड तमिलनबन, साहित्य अकादमी अवॉर्ड, वनक्कम वल्लुवा, वनमबादी आंदोलन, तमिल साहित्य, तिरुक्कुरल, कविता की विरासत, तमिलनाडु, साहित्यिक समुदाय, श्रद्धांजलि

Farewell to a Voice of Tamil Poetry

शुरुआती जीवन और साहित्यिक सफ़र

इरोड तमिलनबन नाम से मशहूर कवि तमिलनाडु के थे और मॉडर्न तमिल कविता के फिर से उभरने में एक अहम किरदार बन गए। दशकों तक, उन्होंने क्लासिकल सोच को आज के ज़माने की चिंताओं के साथ मिलाकर एक अलग पहचान बनाई। उनकी लिखाई में दार्शनिक सवालों, सामाजिक बदलाव और तमिल की समृद्ध विरासत के साथ गहरा जुड़ाव दिखता था। लगातार काम करके, उन्होंने क्रिटिक्स और रीडर्स दोनों के बीच सम्मान पाया, और मॉडर्न तमिल कविता की रूपरेखा तैयार की।

खास काम और पहचान

उनका मशहूर कविताओं का कलेक्शन, वनक्कम वल्लुवा, पुरानी नैतिक क्लासिक तिरुक्कुरल की कविताओं को कविता के रूप में फिर से सोचने के लिए जाना जाता है। इस बड़ी कोशिश ने पारंपरिक नैतिक सोच को मॉडर्न कविता के एक्सप्रेशन के साथ मिला दिया। 2004 में, इस काम के लिए उन्हें मशहूर साहित्य अकादमी अवॉर्ड मिला। इस अवॉर्ड ने न सिर्फ़ उन्हें एक कवि के तौर पर ज़्यादा पहचान दिलाई, बल्कि नेशनल लेवल पर तमिल साहित्य की हमेशा रहने वाली अहमियत को भी सामने लाया।

स्टैटिक GK फैक्ट: साहित्य अकादमी अवॉर्ड भारत के सबसे बड़े साहित्यिक सम्मानों में से एक है, जिसे 1954 में शुरू किया गया था। यह अवॉर्ड साहित्य अकादमी हर साल 24 आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त भाषाओं में बेहतरीन काम के लिए देती है।

वनंबदी आंदोलन में भूमिका

तमिलनाडु वनंबदी आंदोलन नाम की साहित्यिक लहर से जुड़ा था — यह एक मॉडर्न कविता आंदोलन था जिसने तमिल गीत-संगीत को फिर से ज़िंदा करने और कविता में सामाजिक यथार्थवाद लाने की कोशिश की। अपनी कविताओं के ज़रिए, उन्होंने क्लासिकल तमिल एस्थेटिक्स से जुड़े रहते हुए आज के मुद्दों पर बात की। उनकी आवाज़ परंपरा और मॉडर्निटी के बीच एक पुल का काम करती थी, जिससे युवा कवियों को भाषा की खूबसूरती को छोड़े बिना बोल्ड थीम खोजने की प्रेरणा मिली।

लिगेसी और असर

उनके जाने से, तमिल साहित्य की दुनिया ने एक ऐसे कवि को खो दिया है जिनमें बहुत कम ईमानदारी और क्रिएटिव सोच थी। उनके काम ने नैतिक और दार्शनिक विषयों को आसान कविता में पिरोने के तरीके पर गहरा असर डाला। वनक्कम वल्लुवा के ज़रिए तिरुक्कुरल के सदियों पुराने ज्ञान को नई ज़िंदगी देकर, उन्होंने दिखाया कि कैसे पुराने लेख आज के समय में नई अहमियत पा सकते हैं। तमिल कवियों की आने वाली पीढ़ियाँ हमेशा रहने वाले ज्ञान को आज के ज़माने की बातों के साथ मिलाने की इस विरासत को आगे बढ़ा सकती हैं।

स्टेटिक GK टिप: तिरुक्कुरल, जिसे संत-कवि तिरुवल्लुवर का माना जाता है, माना जाता है कि इसे पहली सदी BCE और 5वीं सदी CE के बीच लिखा गया था, और यह दुनिया में सबसे ज़्यादा ट्रांसलेट की गई रचनाओं में से एक है।

आखिरी विचार

इरोड तमिलनबन का जाना तमिल कविता में एक चमकदार सफ़र का अंत है। भाषा की सुंदरता, नैतिक गहराई और सांस्कृतिक निरंतरता के प्रति उनका समर्पण साहित्य के चाहने वालों और प्रेमियों, दोनों के लिए एक मिसाल कायम करता है। उनकी आवाज़ भले ही शांत हो गई हो, लेकिन उनकी कविताएँ गूंजती रहती हैं, जो सोचने, हमदर्दी और नई सोच की प्रेरणा देती हैं।

Static Usthadian Current Affairs Table

Topic Detail
कवि इरोड तमिऴनबन
प्रमुख कृति वनक्कम वल्लुवा
संबद्ध आंदोलन वनमबाड़ी आंदोलन
पुरस्कार साहित्य अकादमी पुरस्कार 2004
साहित्यिक योगदान परंपरा और यथार्थवाद का संगम करती आधुनिक तमिल कविता
शास्त्रीय संदर्भ तिरुक्कुरल की कवितामयी पुनर्व्याख्या
विरासत तमिल कवियों की नई पीढ़ी को प्रेरित किया
महत्व तमिल साहित्य की राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिकता को सुदृढ़ किया
Farewell to a Voice of Tamil Poetry
  1. तमिलनाडु एक मशहूर तमिल कवि के जाने का दुख मना रहा है।
  2. कवि की रचनाओं ने मॉडर्न तमिल साहित्य को बेहतर बनाया।
  3. उनकी लिखाई में संस्कृति, पहचान और आज के मुद्दों का मेल था।
  4. उन्होंने तमिल साहित्य के शौकीनों की कई पीढ़ियों को प्रभावित किया।
  5. उनकी कविताएँ तमिल साहित्य की बड़ी पत्रिकाओं में छपीं।
  6. उन्हें बेहतरीन कविता के लिए कई अवॉर्ड मिले।
  7. कवि ने तमिल की ग्लोबल कल्चरल पहुँच में योगदान दिया।
  8. उनकी रचनाओं में समाज, प्रकृति और भावनाओं के विषय दिखे।
  9. उन्होंने युवा लेखकों को क्रिएटिव तरीके से अपनी बात कहने के लिए प्रेरित किया।
  10. कई कविताएँ एजुकेशनल सिलेबस का हिस्सा बनीं।
  11. उनका जाना तमिल बुद्धिजीवियों के लिए एक नुकसान है।
  12. जानकार उनके काम को कविता के अलग-अलग दौर के बीच एक पुल मानते हैं।
  13. उन्होंने आज के तमिल पद्य के विकास में मदद की।
  14. उनकी कविताओं के पब्लिक में पढ़े जाने से तमिल कल्चरल पहचान बनी।
  15. उनके गीतों ने परफ़ॉर्मिंग आर्ट्स और थिएटर पर असर डाला।
  16. लिटरेरी ग्रुप्स ने उनके सम्मान में इवेंट्स ऑर्गनाइज़ किए।
  17. उनकी कविताओं ने सामाजिक सच्चाइयों पर सोचने को बढ़ावा दिया।
  18. तमिल लिटरेचर उन्हें पोएटिक सोच का पिलर मानता है।
  19. उनकी लेगेसी उनके पब्लिश हुए कलेक्शन से जारी है।
  20. वे तमिल लिटरेरी ट्रेडिशन में एक मशहूर हस्ती बने हुए हैं।

Q1. इरोड तमिलानबन को किस पुस्तक के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?


Q2. वे किस साहित्यिक आंदोलन से जुड़े थे?


Q3. उन्होंने साहित्य अकादमी पुरस्कार कब जीता?


Q4. उनका कार्य किस शास्त्रीय तमिल ग्रंथ का पुनर्व्याख्यान है?


Q5. तिरुक्कुरल किस काल में लिखा गया माना जाता है?


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