बढ़ता डिजिटल गलत इस्तेमाल
UN Women ने चेतावनी दी है कि दुनिया की 44% महिलाओं और लड़कियों को डिजिटल हिंसा से कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती है। AI से चलने वाले नकली नाम, गुमनामी और दुनिया भर के कानूनों की कमी की वजह से ऑनलाइन गलत इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। महिलाओं को टारगेटेड हमलों का सामना करना पड़ रहा है जो उनके अधिकारों, आज़ादी और सम्मान का उल्लंघन करते हैं।
डिजिटल हिंसा का क्या मतलब है
डिजिटल हिंसा में हैरेसमेंट, बदनामी, पीछा करना, धमकियां और बिना सहमति के निजी तस्वीरें बांटना शामिल है। इससे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और यहां तक कि राजनीतिक नुकसान भी हो सकता है।
स्टैटिक GK फैक्ट: ह्यूमन राइट्स का यूनिवर्सल डिक्लेरेशन (1948) सुरक्षा, प्राइवेसी और बराबरी के अधिकार को मान्यता देता है — डिजिटल जगहों पर भी। ऑनलाइन हिंसा का लेवल
टेक्नोलॉजी से होने वाली हिंसा (TF VAWG) दुनिया भर में 16–58% तक फैली हुई है। गलत जानकारी और बदनामी (67%) इसके सबसे आम रूप हैं। लगभग 73% महिला पत्रकारों ने बताया है कि उन्हें ऑनलाइन हिंसा का सामना करना पड़ा है। इससे उनके पब्लिक में हिस्सा लेने और प्रोफेशनल सेफ्टी पर बुरा असर पड़ता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हमले बढ़ रहे हैं
जेनरेटिव AI गलत इरादे वाले यूज़र्स को डीपफेक पोर्नोग्राफिक वीडियो बनाने, पहचान चुराने और बड़े पैमाने पर परेशान करने की इजाज़त देता है। 90–95% ऑनलाइन डीपफेक बिना सहमति के होते हैं और लगभग 90% में महिलाओं को दिखाया जाता है, जिससे नुकसान पहुंचाने वाले पावर स्ट्रक्चर को मजबूती मिलती है। AI ऑटोमेटेड डॉक्सिंग, स्टॉकिंग और ब्लैकमेल के ज़रिए गलत इस्तेमाल को बढ़ाता है।
औरतों से नफ़रत करने वाले डिजिटल इकोसिस्टम
मैनोस्फीयर का बढ़ना — यानी औरतों के खिलाफ सोच को बढ़ावा देने वाली ऑनलाइन कम्युनिटी — नफ़रत को बढ़ा रहा है। ये ग्रुप औरतों से नफ़रत करने वाला कंटेंट फैलाते हैं जो हिंसा को नॉर्मल बनाता है, खासकर महिला एक्टिविस्ट, एथलीट, सेलिब्रिटी और पत्रकारों के खिलाफ। स्टैटिक GK टिप: भारत में, सोशल मीडिया की पहुंच 825 मिलियन से ज़्यादा यूज़र्स तक है, जिससे मौके और रिस्क दोनों बढ़ रहे हैं।
कमज़ोर कानून और चुनौतियाँ
कई ग्लोबल कानून तेज़ी से बदलते AI के साथ तालमेल बिठाने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं। UK का ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट, मेक्सिको का ले ओलंपिया और EU का डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट जैसे उदाहरण प्रोग्रेस दिखाते हैं लेकिन असमान सुरक्षा जारी है। अधिकार क्षेत्र की रुकावटों के कारण क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल क्राइम को ट्रैक करना मुश्किल बना हुआ है।
महिलाओं की भागीदारी पर असर
हैरेसमेंट के डर से महिलाएं पब्लिक लाइफ से दूर हो जाती हैं। डिजिटल हिंसा उनके पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन को कम करती है, करियर के ऑप्शन पर असर डालती है और मेंटल हेल्थ पर असर डालती है। यह चुनावों के दौरान महिला उम्मीदवारों और चुने हुए नेताओं को भी टारगेट करती है, जिससे ऑनलाइन डेमोक्रेटिक असमानता पैदा होती है।
ग्लोबल रिस्पॉन्स को मज़बूत करना
सरकारों, प्लेटफॉर्म और सिविल सोसाइटी को अकाउंटेबिलिटी के लिए मज़बूत फ्रेमवर्क को कोऑर्डिनेट करना चाहिए। महिला अधिकार ग्रुप्स में इन्वेस्टमेंट से सर्वाइवर-सेंटर्ड सपोर्ट पक्का हो सकता है। डिजिटल लिटरेसी और ऑनलाइन सेफ्टी को बढ़ावा देने वाले प्रोग्राम लड़कियों को कॉन्फिडेंस के साथ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने में मदद कर सकते हैं।
पॉज़िटिव बदलाव के लिए टेक्नोलॉजी
बॉडीगार्ड.AI जैसे इनोवेटिव डिजिटल टूल, जो एक फ्रेंच टेक सॉल्यूशन है, रियल टाइम में एब्यूसिव कंटेंट को फिल्टर करते हैं। AI डेवलपर्स के साथ पार्टनरशिप से ज़िम्मेदार इनोवेशन पक्का हो सकता है, जिससे डिजिटल दुनिया ज़्यादा सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाली बन सकती है।
स्टैटिक GK फैक्ट: भारत का इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 साइबर क्राइम को रेगुलेट करता है और सेक्शन 66E जैसे बदलावों के ज़रिए महिलाओं के लिए सुरक्षा उपाय देता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| Topic | Detail |
| यूएन वीमेन अलर्ट | 44% महिलाएँ और लड़कियाँ कानूनी डिजिटल सुरक्षा से वंचित |
| प्रमुख खतरा | एआई आधारित प्रतिरूपण (Impersonation) और डीपफेक दुरुपयोग |
| सबसे आम रूप | दुष्प्रचार और मानहानि (67%) |
| निशाना बनने वाली पत्रकार | 73% पत्रकार ऑनलाइन हिंसा झेलती हैं |
| प्रचलन सीमा | 16–58% महिलाएँ TF-VAWG (टेक-फैसिलिटेटेड हिंसा) का सामना करती हैं |
| बढ़ती प्रवृत्ति | “मैनोस्फेयर” और स्त्री-विरोधी ऑनलाइन संस्कृति का विस्तार |
| कानूनी चिंता | एआई-संचालित अपराधों को रोकने के लिए क़ानून पर्याप्त तेजी से नहीं विकसित हो रहे |
| सहायता दृष्टिकोण | महिला अधिकार संगठनों के माध्यम से सर्वाइवर सपोर्ट |
| सकारात्मक तकनीक | Bodyguard.AI द्वारा अपमानजनक सामग्री फ़िल्टरिंग |
| प्रमुख भारतीय कानून | सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (सुरक्षा हेतु संशोधित प्रावधान) |





