बड़ी रेगुलेटरी राहत
भारत सरकार ने इंडियन कोस्टल शिपिंग के लिए एक बड़ा रिफॉर्म पेश किया है। इसने सिर्फ़ इंडियन वॉटर्स में चलने वाले वेसल के लिए साइन-ऑन, साइन-ऑफ़ और शोर लीव पास (SLP) के लंबे समय से चले आ रहे नियमों को खत्म कर दिया है।
यह नोटिफिकेशन मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स ने जारी किया था, जिसमें एडमिनिस्ट्रेटिव ज़िम्मेदारियों को इमिग्रेशन चेकपॉइंट्स से हटाकर पोर्ट अथॉरिटीज़ को दे दिया गया था।
इससे प्रोसीजरल देरी कम होने और इंडिया के बड़े कोस्टलाइन पर तेज़ मैरीटाइम ऑपरेशन्स में मदद मिलने की उम्मीद है।
स्टैटिक GK फैक्ट: इंडिया का कोस्टलाइन 7,516 km लंबा है, जो एशिया में सबसे बड़े कोस्टलाइन में से एक है। कौन से नियम हटाए गए हैं
पहले, नाविकों को ये करना ज़रूरी था:
- जहाज़ जॉइन करते समय साइन-ऑन करना
- ड्यूटी छोड़ने के बाद साइन-ऑफ़ करना
- किनारे जाने के लिए SLP लेना, जिसे हर 10 दिन में रिन्यू किया जाता था
ये प्रोसीजर तब भी ज़रूरी थे जब जहाज़ ने कभी इंटरनेशनल बॉर्डर पार नहीं किया हो।
क्रू को अक्सर इमिग्रेशन ऑफिस जाना पड़ता था, जिससे कम्प्लायंस का भारी बोझ पड़ता था।
नया आसान ऑपरेशनल सिस्टम
नए सिस्टम के तहत, इनके लिए इमिग्रेशन अप्रूवल की ज़रूरत नहीं है:
- कोस्टल मूवमेंट में भारतीय झंडे वाले जहाज़
- भारतीय पोर्ट के अंदर ड्रेजर और बार्ज
- पोर्ट लिमिट के अंदर चलने वाले रिसर्च जहाज़
क्रू डेटा का मेंटेनेंस और वेरिफिकेशन अब पोर्ट अथॉरिटी की ज़िम्मेदारी है।
ब्यूरो ऑफ़ इमिग्रेशन कम्प्लायंस और सिक्योरिटी की निगरानी पक्का करने के लिए सरप्राइज़ इंस्पेक्शन करेगा।
स्टेटिक GK टिप: डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग (DGS) भारत में समुद्री मामलों को रेगुलेट करता है।
यह फ़ैसला क्यों ज़रूरी है
इस सुधार का मकसद भारत के समुद्री सेक्टर में बिज़नेस करने में आसानी को मज़बूत करना है। इससे:
- एडमिनिस्ट्रेटिव देरी कम होगी
- ऑपरेशनल कॉस्ट कम होगी
- इंडियन फ्लैग वाले जहाजों के ज़्यादा इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा
- क्रू वेलफेयर और काम से संतुष्टि में सुधार होगा
भारतीय नाविकों के लिए बेहतर मोबिलिटी सीधे देश के स्ट्रेटेजिक मैरीटाइम मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम को सपोर्ट करती है।
स्टैटिक GK फैक्ट: सागरमाला प्रोग्राम (2015) लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने के लिए पोर्ट-लेड डेवलपमेंट पर फोकस करता है।
बयान और इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट
इस फैसले की केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने तारीफ की, जिन्होंने भारतीय मैरीटाइम वर्कफोर्स को मजबूत बनाने और पुरानी ब्यूरोक्रेसी को हटाने पर सरकार के फोकस पर ज़ोर दिया।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के ग्लोबल मैरीटाइम पावर के तौर पर उभरने के लक्ष्य के लिए एक मॉडर्न कोस्टल शिपिंग इकोसिस्टम ज़रूरी है।
मॉनिटर करने के लिए चुनौतियाँ
आसानी से लागू करना ज़रूरी है:
- कभी-कभी इंटरनेशनल लेवल पर जाने वाले जहाजों के लिए साफ बाउंड्री नियम
- पोर्ट अथॉरिटीज़ को क्रू के सही डॉक्यूमेंटेशन को मैनेज करने की ट्रेनिंग
- BOI द्वारा रेगुलर और बिना किसी भेदभाव के मॉनिटरिंग
ये सेफगार्ड रेगुलेटरी एफिशिएंसी को अपनाते हुए सिक्योरिटी पक्का करने में मदद करेंगे।
स्टैटिक GK फैक्ट: फिलीपींस के बाद भारत दुनिया में नाविकों का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है।
स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| नीति फोकस | साइन–ऑन, साइन–ऑफ और एस.एल.पी. नियमों का हटाया जाना |
| लागू पोत | तटीय संचालन पोत, ड्रेजर, बार्ज, एवं शोध जहाज |
| पर्यवेक्षण परिवर्तन | आव्रजन प्राधिकरण से बंदरगाह प्राधिकरण को अधिकार हस्तांतरण |
| निगरानी एजेंसी | आव्रजन ब्यूरो — आकस्मिक जाँच के साथ |
| समुद्री तटरेखा लंबाई | 7,516 किलोमीटर |
| प्रमुख समुद्री पहल | सागरमाला कार्यक्रम — वर्ष 2015 में प्रारम्भ |
| क्रू कल्याण लाभ | कम कागज़ी कार्यवाही और कम विलंब |
| राष्ट्रीय उद्देश्य | समुद्री दक्षता बढ़ाना एवं भारतीय ध्वज वाले पोतों को प्रोत्साहन |
| प्रमुख मंत्रालय | गृह मंत्रालय |
| प्रमुख समर्थक | केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल |





