नया एयरपोर्ट प्रपोजल
तमिलनाडु सरकार ने प्रपोज्ड होसुर एयरपोर्ट के लिए सिविल एविएशन मिनिस्ट्री को साइट क्लीयरेंस रिक्वेस्ट सबमिट करके एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। इस प्लान का मकसद कृष्णागिरी जिले में एयर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और इलाके की बढ़ती इंडस्ट्रियल एक्टिविटी को सपोर्ट करना है।
एयरपोर्ट की लोकेशन शूलागिरी तालुक में पहचानी गई है, जो बेरीगई और बगलूर के बीच स्ट्रेटेजिक रूप से स्थित है ताकि पर्याप्त ज़मीन अवेलेबिलिटी और कम से कम डिस्प्लेसमेंट सुनिश्चित हो सके।
स्टैटिक GK फैक्ट: सिविल एविएशन मिनिस्ट्री 1947 में बनी थी और पूरे भारत में एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की देखरेख करती है।
लोकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान
शुरुआती ब्लूप्रिंट में एक टर्मिनल और दो रनवे शामिल हैं, जिन्हें पैसेंजर और कार्गो ट्रैफिक में भविष्य की ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मॉड्यूलर अप्रोच एयरपोर्ट को बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ऑपरेशन शुरू करने की अनुमति देता है, जबकि डिमांड बढ़ने पर एक्सपेंशन के लिए जगह भी रखता है। तमिलनाडु का मकसद कई नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले स्केलेबल मॉडल को दोहराना है, जहाँ ट्रैफिक के अनुमान के आधार पर एयरपोर्ट में और एयरपोर्ट बनाए जाते हैं।
स्टेटिक GK टिप: PPP मॉडल के तहत भारत का पहला ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट हैदराबाद राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट था, जो 2008 में खुला था।
एयरस्पेस की पाबंदियाँ और डिफेंस की भागीदारी
एक बड़ी प्रोसेस की ज़रूरत एयरस्पेस की पाबंदियों में ढील देना है, क्योंकि यह इलाका HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) के ऑपरेशनल कंट्रोल में आता है। राज्य सरकार ने डिफेंस मिनिस्ट्री से सिविल फ्लाइट ऑपरेशन शुरू करने के लिए इन पाबंदियों में ढील देने की ऑफिशियल रिक्वेस्ट की है।
सिविलियन और डिफेंस एविएशन अथॉरिटी के बीच कोऑर्डिनेशन ज़रूरी है, खासकर उन इलाकों में जहाँ फ्लाइट ज़ोन ओवरलैप होते हैं।
स्टेटिक GK फैक्ट: HAL की स्थापना 1940 में हुई थी और इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु में होसुर इलाके के पास है।
प्रोजेक्ट टाइमलाइन और उम्मीदें
अनुमान के मुताबिक, साइट क्लियरेंस में छह से आठ महीने लग सकते हैं, जो केंद्र सरकार के इवैल्यूएशन प्रोसेस पर निर्भर करता है। इस अप्रूवल के बाद ही प्रोजेक्ट डिटेल्ड डिज़ाइन और एनवायर्नमेंटल असेसमेंट के लिए आगे बढ़ सकता है। ज़मीन खरीदने, कंस्ट्रक्शन और रेगुलेटरी प्रोसेस को ध्यान में रखते हुए, असल कमर्शियल पैसेंजर ऑपरेशन शुरू होने में आठ साल तक लग सकते हैं।
स्टैटिक GK टिप: भारत में एयरपोर्ट के लिए एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस मिनिस्ट्री ऑफ़ एनवायरनमेंट, फ़ॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज (MoEFCC) रेगुलेट करता है।
क्षेत्रीय महत्व
होसुर के पास एक चालू एयरपोर्ट से बेंगलुरु के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम से जुड़े तेज़ी से बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग बेल्ट के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इस लोकेशन से प्रवासी मज़दूरों, एक्सपोर्टर्स और लोकल बिज़नेस को भी फ़ायदा होता है जो तेज़ ट्रांसपोर्ट लिंक पर निर्भर रहते हैं।
यह प्रोजेक्ट तमिलनाडु के इंडस्ट्रियल पॉलिसी इनिशिएटिव के तहत क्षेत्रीय एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के बड़े लक्ष्य से जुड़ा है।
स्टैटिक उस्तादियन करेंट अफेयर्स टेबल
| विषय | विवरण |
| परियोजना | प्रस्तावित होसूर हवाई अड्डा |
| अनुमति प्राधिकरण | नागरिक उड्डयन मंत्रालय |
| स्थान | शूलागिरि तालुक — बेरीगै और बागलूर के बीच |
| रनवे योजना | प्रारम्भ में दो रनवे |
| टर्मिनल योजना | एक टर्मिनल |
| वायुक्षेत्र नियंत्रण | एच.ए.एल. के अधिकार क्षेत्र में |
| राज्य का अनुरोध | वायुक्षेत्र प्रतिबंधों में ढील |
| अपेक्षित स्थल अनुमति समय | छह से आठ माह |
| यात्री सेवाओं की समयरेखा | लगभग आठ वर्ष |
| प्रमुख सम्बद्ध मंत्रालय | नागरिक उड्डयन, रक्षा, पर्यावरण-वन-जलवायु परिवर्तन मंत्रालय |





