पारिस्थितिक महत्व
चेन्नई के दक्षिणी भाग में स्थित पल्लिकरणै मार्शलैंड महानगरीय क्षेत्र की अंतिम बचे हुए प्राकृतिक वेटलैंड्स में से एक है।
इसे रामसर साइट का दर्जा प्राप्त है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के वेटलैंड के रूप में मान्यता देता है।
यह marsh जैव विविधता का प्रमुख केंद्र है, बाढ़ नियंत्रण में मदद करता है और भारी वर्षा के दौरान प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करता है।
Static GK fact: पल्लिकरणै वेटलैंड भारत के पूर्वी तट पर बची हुई कुछ मीठे पानी की मार्श भूमि में से एक है।
विवाद की उत्पत्ति
मद्रास हाई कोर्ट में दायर एक PIL में दावा किया गया कि कुछ आवासीय इमारतें रामसर-नोटिफाइड क्षेत्र के भीतर बनाई जा रही हैं।
याचिकाकर्ता ने कहा कि कई प्लॉट, जिन्हें “प्राइवेट लैंड” बताया गया, वास्तविकता में प्राकृतिक मार्शलैंड का हिस्सा हैं।
विवाद तब बढ़ा जब यह आरोप सामने आया कि पर्यावरणीय संवेदनशीलता की पूरी जाँच किए बिना अनुमतियाँ प्रदान की गईं।
अधूरी ग्राउंड ट्रुथिंग
रामसर साइट की सीमा वैज्ञानिक रूप से अभी भी अंतिम रूप में निर्धारित नहीं हुई है।
इसके लिए ग्राउंड ट्रुथिंग सर्वे चल रहा है, जिसमें फील्ड डेटा और सैटेलाइट इमेजरी से वेटलैंड की सही सीमा तय की जा रही है।
जब तक यह सर्वे पूरा नहीं होता, यह तय करना मुश्किल है कि निर्माण क्षेत्र वास्तव में संरक्षित क्षेत्र के भीतर आता है या नहीं।
Static GK Tip: ग्राउंड ट्रुथिंग पर्यावरणीय मानचित्रण में वास्तविक स्थिति को नक्शों से मिलाने के लिए उपयोग की जाने वाली तकनीक है।
कानूनी हस्तक्षेप
मद्रास हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश देकर सभी निर्माण कार्य रोक दिए।
कोर्ट ने कई सरकारी विभागों से यह स्पष्टीकरण मांगा कि क्या निर्माण अनुमतियाँ जिम्मेदारी से दी गई थीं।
पहले ही पर्यावरणीय नियामकों ने चेतावनी दी थी कि सीमा तय होने से पहले नई मंजूरी देना जोखिमपूर्ण है।
अब मुख्य प्रश्न यह है कि क्या निर्माण क्षेत्र वेटलैंड संरक्षण नियमों के तहत “नो-डेवलपमेंट” ज़ोन में आता है।
नियामक चिंताएँ
वेटलैंड्स (Conservation and Management) Rules, 2017 के तहत संरक्षित वेटलैंड में निर्माण सख्त रूप से प्रतिबंधित है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह परियोजना नियमों का उल्लंघन करती है और दीर्घकालिक पारिस्थितिक नुकसान पहुंचा सकती है।
डेवलपर्स का दावा है कि उनके पास ऐसे दस्तावेज़ हैं जो जमीन को निजी स्वामित्व बताते हैं और वह कोर मार्श क्षेत्र से बाहर है।
व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव
पल्लिकरणै मार्शलैंड के पास अनियंत्रित निर्माण परम्बक्कम और शोलिंगनल्लूर जैसी तेजी से विकसित हो रही बस्तियों में बाढ़ जोखिम बढ़ा सकता है।
मार्श प्राकृतिक बफर की तरह काम करता है; इसका कम होना शहरी बाढ़ को और गंभीर बना सकता है।
Static GK fact: चेन्नई में हाल के दशकों की प्रमुख बाढ़ों ने वेटलैंड्स की शहरी आपदा प्रबंधन में अहम भूमिका को उजागर किया है।
तमिलनाडु की वेटलैंड नेतृत्व
तमिलनाडु भारत का एकमात्र राज्य है जिसके पास 20 रामसर वेटलैंड्स हैं।
इस विवाद ने राष्ट्रीय ध्यान खींचा है, क्योंकि किसी भी प्रकार का गलत प्रबंधन अन्य पारिस्थितिक क्षेत्रों के लिए नकारात्मक उदाहरण स्थापित कर सकता है।
वर्तमान स्थिति
निर्माण गतिविधियाँ अदालत के अंतिम निर्णय तक रोक दी गई हैं।
अधिकारियों को सीमा सर्वेक्षण पूरा होने का इंतज़ार है, जिसके बाद सभी निर्णय उसी पर आधारित होंगे।
यह मुकदमा तमिलनाडु में शहरी नियोजन, वेटलैंड संरक्षण और रियल एस्टेट विनियमों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा।
स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल
| विषय (Topic) | विवरण (Detail) |
| मुख्य मुद्दा | पल्लिकरणै रामसर साइट के भीतर/पास निर्माण का आरोप लगाने वाली PIL |
| शामिल न्यायालय | मद्रास हाई कोर्ट |
| केंद्रीय चिंता | वेटलैंड सीमा तय करने के लिए अधूरी ग्राउंड ट्रुथिंग |
| पर्यावरणीय नियम | वेटलैंड्स (Conservation and Management) Rules 2017 |
| पारिस्थितिक भूमिका | बाढ़ नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण, भूजल पुनर्भरण |
| राज्य विशेषता | तमिलनाडु के पास 20 रामसर वेटलैंड्स |
| अंतरिम आदेश | कोर्ट द्वारा निर्माण पर रोक |
| व्यापक प्रभाव | दक्षिण चेन्नई में संभावित शहरी बाढ़ जोखिम |





