नवम्बर 30, 2025 6:28 पूर्वाह्न

बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और राष्ट्रीय जनजातीय गौरव

चालू घटनाएँ: बिरसा मुंडा, जनजातीय गौरव दिवस, उलगुलान आंदोलन, मुंडा विद्रोह, जनजातीय कल्याण, छोटानागपुर, झारखंड की जनजातियाँ, औपनिवेशिक प्रतिरोध, आदिवासी अधिकार, भूमि सुधार

Birsa Munda’s 150th Birth Anniversary and National Tribal Pride

बिरसा मुंडा की जयंती

देश ने 15 नवंबर 2025 को बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई।
प्रधानमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को जनजातीय पहचान, प्रतिरोध और सुधार के प्रतीक के रूप में सम्मानित किया।
यह दिन जनजातीय गौरव दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जो भारत की आज़ादी में आदिवासी समुदायों के योगदान को मान्यता देता है।

Static GK fact: भारत सरकार ने 2021 में 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया।

प्रारंभिक जीवन और प्रभाव

बिरसा मुंडा का जन्म 1875 में उलिहाटू (खूंटी जिला, झारखंड) में हुआ था।
उनका जन्म नाम दाऊद मुंडा था और वे मुंडा जनजाति से संबंधित थे, जो छोटानागपुर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियों में से एक है।
औपनिवेशिक शासन में शोषण के अनुभवों ने उनके विचारों और नेतृत्व को आकार दिया।

Static GK Tip: झारखंड का गठन 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग कर किया गया—जो बिरसा मुंडा की जयंती भी है।

शिक्षाएँ और सामाजिक सुधार

बिरसा ने बिरसैत आंदोलन की स्थापना की, जो एक सामाजिक–धार्मिक आंदोलन था।
उन्होंने एकेश्वरवाद, स्वच्छता, शराब छोड़ने और नैतिक अनुशासन का संदेश दिया।
उनकी शिक्षाएँ आदिवासी समुदायों में एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को मजबूत करने का आधार बनीं।

औपनिवेशिक विरोध में नेतृत्व

बिरसा मुंडा ने ऐतिहासिक उलगुलान (महातूफ़ान) का नेतृत्व किया।
यह आंदोलन छोटानागपुर, बंगाल और ओडिशा के आदिवासी समूहों को एकजुट कर दिकुओं (बाहरी लोगों जैसे साहूकार, मिशनरी, ज़मींदार) के दमनकारी प्रभाव के खिलाफ खड़ा हुआ।
उन्होंने बेगारी, भूमि हड़पने और शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी।
उन्हें भगवान बिरसा और धरती आबा (धरती के पिता) के रूप में सम्मानित किया जाता है।

विरासत और प्रभाव

बिरसा मुंडा का निधन 9 जून 1900 को रांची जेल में मात्र 25 वर्ष की आयु में हुआ, लेकिन उनका प्रभाव अत्यंत गहरा रहा।
उनके प्रतिरोध के बाद ब्रिटिश शासन ने बेगार प्रथा समाप्त की और 1903 के टेनेंसी एक्ट तथा बाद में 1908 के छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट में आदिवासी भूमि अधिकारों को मान्यता दी।

Static GK fact: छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट भारत के सबसे मजबूत जनजातीय भूमि संरक्षण कानूनों में से एक है।

मुंडा विद्रोह के कारण

मुंडा विद्रोह कई औपनिवेशिक नीतियों के कारण भड़का—
• ज़मीनदारी प्रणाली लागू होने से पारंपरिक सामुदायिक भूमि प्रणाली समाप्त हुई
बेथ बेगारी (बलपूर्वक श्रम) का बढ़ता बोझ
• मिशनरियों द्वारा आदिवासी संस्कृति की आलोचना
बिरसा ने मूंडा राज की अवधारणा के साथ आदिवासियों को आत्म-शासन की मांग हेतु एकजुट किया।

आज का महत्व

जनजातीय गौरव दिवस, भारत के राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी इतिहास की महत्ता को रेखांकित करता है।
बिरसा मुंडा का जीवन भारत के आदिवासी समुदायों की दृढ़ता, संस्कृति और अधिकारों के लिए संघर्ष का प्रतीक है।
उनकी विरासत आज भी भूमि अधिकारों, पहचान और सम्मान के आंदोलनों को प्रेरित करती है।

स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल

विषय (Topic) विवरण (Detail)
मनाई गई जयंती बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती
राष्ट्रीय पर्व जनजातीय गौरव दिवस (15 नवंबर)
घोषणा वर्ष 2021
जन्मस्थान उलिहाटू, खूंटी जिला, झारखंड
जनजाति मुंडा जनजाति
नेतृत्व किया आंदोलन उलगुलान (महातूफ़ान)
किए गए सुधार टेनेंसी एक्ट 1903, छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट 1908
उपाधियाँ भगवान बिरसा, धरती आबा
निधन 9 जून 1900, रांची जेल
प्रमुख क्षेत्र छोटानागपुर, बंगाल, ओडिशा
Birsa Munda’s 150th Birth Anniversary and National Tribal Pride
  1. भारत ने 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई।
  2. 2021 से इस दिन को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  3. बिरसा मुंडा का जन्म 1875 में झारखंड के उलिहातु में हुआ था।
  4. उनके शुरुआती संघर्षों ने उनकी जनजातीय प्रतिरोध विचारधारा को आकार दिया।
  5. उन्होंने बिरसाइत सामाजिकधार्मिक आंदोलन की स्थापना की।
  6. बिरसा ने जनजातियों में एकेश्वरवाद और नैतिक अनुशासन को बढ़ावा दिया।
  7. उन्होंने औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व किया।
  8. उनके विद्रोह ने साहूकारों और जमींदारों सहित दिकुओं का विरोध किया।
  9. बिरसा का 9 जून 1900 को रांची जेल में निधन हो गया।
  10. उनके संघर्ष के कारण 1903 का काश्तकारी अधिनियम बना।
  11. छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 ने जनजातीय भूमि अधिकारों की रक्षा की।
  12. बिरसा को धरती आबा (पृथ्वी का पिता) के रूप में सम्मान दिया जाता है।
  13. इस विद्रोह ने जबरन मजदूरी और भूमि अधिग्रहण का विरोध किया।
  14. बिरसा के सम्मान में 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का निर्माण किया गया।
  15. बिरसा आदिवासी पहचान और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के प्रतीक हैं।
  16. उनके आंदोलन का उद्देश्य मुंडा राज, एक स्वशासन की परिकल्पना थी।
  17. बिरसा औपनिवेशिक युग के आदिवासी प्रतिरोध के नायक बने हुए हैं।
  18. जनजातीय गौरव दिवस आदिवासी स्वतंत्रता योगदान का सम्मान करता है।
  19. उनकी विरासत आधुनिक आदिवासी अधिकार आंदोलनों को प्रेरित करती है।
  20. समारोह भारत की आदिवासी विरासत और गौरव को उजागर करते हैं।

Q1. जनजातीय गौरव दिवस कब मनाया जाता है?


Q2. बिरसा मुंडा का जन्म कहाँ हुआ था?


Q3. बिरसा मुंडा के सामाजिक-धार्मिक आंदोलन को क्या कहा जाता था?


Q4. बिरसा मुंडा के नेतृत्व में किया गया प्रमुख आंदोलन कौन-सा था?


Q5. किस अधिनियम ने आगे चलकर जनजातीय भूमि अधिकारों की रक्षा की?


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