नवम्बर 30, 2025 7:31 पूर्वाह्न

भारत का विस्तारित अंतरिक्ष दृष्टिकोण

चालू घटनाएँ: चंद्रयान-4, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, गगनयान, इसरो, चंद्र नमूना-वापसी मिशन, स्पेस इकोनॉमी वृद्धि, उद्योग-निर्मित PSLV, डीप-स्पेस क्षमता, वाणिज्यिक सैटेलाइट मिशन, दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष उड़ान

India’s Expanding Space Vision

चंद्रयान–4 मिशन प्रगति

भारत के चंद्र अभियान में बड़ा कदम उठाते हुए चंद्रयान-4 को 2028 में लॉन्च करने की पुष्टि की गई है।
यह मिशन चंद्र नमूना-वापसी (lunar sample return) का प्रयास करेगा—जो भारत के लिए अब तक का सबसे जटिल रोबोटिक अभियान होगा।
अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ने इस उपलब्धि को हासिल किया है, जिससे भारत उन्नत अंतरिक्ष राष्ट्रों के समूह में शामिल होने की राह पर है।

Static GK fact: चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3.84 लाख किलोमीटर दूर है—नमूना-वापसी मिशन इसलिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होते हैं क्योंकि इनमें चंद्रमा से प्रस्थान और पृथ्वी पर पुन: प्रवेश जैसी जटिल प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं।

इसरो विशेष लैंडर और असेंट मॉड्यूल डिजाइन कर रहा है, जो चंद्र मिट्टी इकट्ठा कर पृथ्वी तक लाने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।
यह भारत की डीप-स्पेस नेविगेशन, सटीक लैंडिंग और अंतरग्रहीय सामग्री-प्रबंधन क्षमताओं को अत्यंत उन्नत बनाएगा।

प्रक्षेपण गतिविधियों में विस्तार

इसरो वर्तमान वित्त वर्ष में सात प्रक्षेपण करने की तैयारी में है—जिनमें प्रमुख PSLV और GSLV मिशन तथा एक वाणिज्यिक संचार उपग्रह शामिल है।
एक महत्वपूर्ण उपलब्धि पहले पूर्णत: भारतीय उद्योग द्वारा निर्मित PSLV का तैयार होना है, जो निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए इसरो अगले तीन वर्षों में अपने अंतरिक्षयान उत्पादन को तीन गुना करने की योजना बना रहा है।
2020 के बाद लागू नई अंतरिक्ष नीति सुधारों ने विनिर्माण, डिजाइन और लॉन्च सेवाओं को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया है।

मानव अंतरिक्ष उड़ान रोडमैप

मानव-सहित गगनयान मिशन 2027 के लिए निर्धारित है, इससे पहले तीन बिना-क्रू परीक्षण उड़ानें होंगी।
यह मिशन मानव रेटेड प्रणालियों, पुन: प्रवेश ढालों और जीवन-समर्थन मॉड्यूल का परीक्षण करेगा—जो भविष्य की लंबी अवधि की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए आवश्यक है।

दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में भारत 2035 तक एक पूर्ण भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तैयार करेगा।
इसके पाँच मॉड्यूल में से पहला 2028 में लॉन्च किया जाएगा।

Static GK Tip: दुनिया का पहला अंतरिक्ष स्टेशन सोवियत संघ का “Salyut 1” था, जिसे 1971 में लॉन्च किया गया था।

ये कदम भारत के 2040 तक चंद्र सतह पर अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने के राष्ट्रीय मिशन को मजबूत करते हैं।

भारत की बढ़ती स्पेस इकोनॉमी

भारत की वर्तमान स्पेस इकोनॉमी 8.2 बिलियन USD है, जो 2033 तक 44 बिलियन USD तक पहुँचने का अनुमान है।
2020 के बाद के सुधारों ने 450 से अधिक उद्योगों और 330 स्टार्टअप्स को अंतरिक्ष विनिर्माण, डेटा सेवाओं, सैटेलाइट निर्माण और लॉन्च सेवाओं में भाग लेने की अनुमति दी है।

LUPEX, चंद्रयान-4 और गगनयान जैसे मिशन भारत की रणनीति को मजबूत करते हैं, जिसमें वैश्विक स्पेस मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 2% से बढ़ाकर 8% करना शामिल है।

Static GK fact: भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट वर्ष 1975 में लॉन्च किया गया था, जिससे भारत के संगठित अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

भारत की वैश्विक उपस्थिति का विस्तार

भारत के तेज़ मिशन चक्र, स्वदेशी प्लेटफार्मों पर बढ़ता ध्यान और निजी क्षेत्र की भागीदारी एक नए अंतरिक्ष युग का संकेत देती है।
उन्नत चंद्र अन्वेषण, मानव अंतरिक्ष उड़ान और अंतरिक्ष स्टेशन विकास के साथ भारत वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान और वाणिज्यिक गतिविधियों में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभर रहा है।

स्टैटिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल

विषय (Topic) विवरण (Detail)
चंद्रयान-4 लॉन्च वर्ष 2028
मिशन प्रकार चंद्र नमूना-वापसी मिशन
पहले सफल देश अमेरिका, रूस, चीन
गगनयान मानव मिशन 2027
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन लक्ष्य वर्ष 2035
पहला मॉड्यूल लॉन्च 2028
इस वर्ष इसरो के योजनाबद्ध प्रक्षेपण 7
वर्तमान स्पेस इकोनॉमी 8.2 बिलियन USD
2033 की अनुमानित स्पेस इकोनॉमी 44 बिलियन USD
उद्योग सहभागिता 450 से अधिक उद्योग और 330 स्टार्टअप्स
India’s Expanding Space Vision
  1. चंद्रयान-4 को नमूनावापसी मिशन के रूप में 2028 में प्रक्षेपित किया जाएगा।
  2. भारत का लक्ष्य चंद्र नमूनावापसी मिशन में शामिल होने वाले विशिष्ट समूह में शामिल होना है।
  3. इसरो विशेष लैंडिंग और आरोहण मॉड्यूल डिज़ाइन कर रहा है।
  4. यह मिशन गहन अंतरिक्ष नेविगेशन क्षमताओं को उन्नत करता है।
  5. इसरो चालू वित्त वर्ष में सात प्रक्षेपणों की योजना बना रहा है।
  6. भारत का पहला उद्योगनिर्मित PSLV तैनाती के लिए तैयार है।
  7. इसरो तीन वर्षों में अंतरिक्ष यान उत्पादन क्षमता को तीन गुना बढ़ाएगा।
  8. गगनयान चालक दल मिशन 2027 के लिए लक्षित है।
  9. भारत 2035 तक एक पूर्ण भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की योजना बना रहा है।
  10. पहला अंतरिक्ष स्टेशन मॉड्यूल 2028 में प्रक्षेपित होगा।
  11. भारत का लक्ष्य 2040 तक अंतरिक्ष यात्री चंद्र मिशन शुरू करना है।
  12. भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।
  13. इस क्षेत्र का लक्ष्य 2033 तक 44 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचना है।
  14. 450 से अधिक उद्योग और 330 स्टार्टअप अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करते हैं।
  15. लूपेक्स और गगनयान जैसे मिशन भारत की वैश्विक अंतरिक्ष उपस्थिति को बढ़ावा देते हैं।
  16. चंद्रयान-4 उन्नत चंद्र विज्ञान में भारत की भूमिका को बढ़ाता है।
  17. 2020 से हुए सुधारों ने अंतरिक्ष में निजी भागीदारी को खोल दिया है।
  18. इसरो वाणिज्यिक प्रक्षेपण सेवाओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
  19. भारत अपनी वैश्विक बाजार हिस्सेदारी को 2% से बढ़ाकर 8% करना चाहता है।
  20. यह रोडमैप भारत को एक प्रमुख अंतरिक्ष यात्रा करने वाले राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है।

Q1. चंद्रयान-4 किस प्रकार का मिशन है?


Q2. गगनयान का मानव-सहित मिशन कब निर्धारित है?


Q3. भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल कब प्रक्षेपित किया जाएगा?


Q4. किस प्रक्षेपण यान का निर्माण पहली बार पूरी तरह भारतीय उद्योग द्वारा किया गया है?


Q5. भारत की वर्तमान अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य कितना है?


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