भारत के हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार
भारत स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है और इसी दिशा में हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। देश में चार क्लस्टर तैयार किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य हरित हाइड्रोजन की पूरी मूल्य श्रृंखला का प्रदर्शन करना है। ये क्लस्टर उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को एक मंच पर लाकर तकनीक अपनाने की गति बढ़ाते हैं।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: भारत विश्व के शीर्ष तीन ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है, जिससे टिकाऊ विकल्पों की आवश्यकता बढ़ जाती है।
क्लस्टरों का उद्देश्य
इन क्लस्टरों में हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग—इन सभी चरणों का एकीकृत प्रदर्शन किया जाता है। यह भारत की पहली बड़े पैमाने वाली हाइड्रोजन प्रदर्शन परियोजनाओं को सहायता देते हैं, जिससे वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण और विस्तार योग्य समाधान मिलते हैं। तकनीक और अवसंरचना के स्थानीयकरण से लागत भी कम होती है।
स्थिर सामान्य ज्ञान टिप: हाइड्रोजन की खोज एक तत्व के रूप में 1766 में हेनरी कैवेन्डिश ने की थी।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़ाव
ये क्लस्टर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रारंभिक रूप से परिकल्पित किए गए थे और अब राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत एकीकृत किए गए हैं। वर्ष 2023 में शुरू हुए इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन करना है, जिससे भारत स्वच्छ ईंधन का वैश्विक केंद्र बन सके।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: भारत में नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों को लागू करने वाला प्रमुख विभाग नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय है।
हरित हाइड्रोजन क्या है
हरित हाइड्रोजन का उत्पादन सौर, पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से किया जाता है, न कि जीवाश्म ईंधनों से। मुख्य प्रक्रियाओं में विद्युत् अपघटन शामिल है, जिसमें जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है, तथा बायोमास गैसीकरण, जिसमें जैविक पदार्थों का उपयोग होता है। हरित हाइड्रोजन कहलाने के लिए 1 किलोग्राम हाइड्रोजन के उत्पादन पर कार्बन उत्सर्जन 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य से कम होना अनिवार्य है।
स्थिर सामान्य ज्ञान टिप: भारत सौर ऊर्जा से चलने वाले पकाने के उपकरणों का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है।
भारत के उभरते हाइड्रोजन हब
देश ने तीन प्रमुख समुद्री बंदरगाहों को बड़े पैमाने पर हरित हाइड्रोजन उत्पादन एवं निर्यात अवसंरचना विकसित करने के लिए पहचाना है। इनमें गुजरात का दीनदयाल बंदरगाह, तमिलनाडु का वि.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह और ओडिशा का पारादीप बंदरगाह शामिल हैं। ये बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने और निर्यात-उन्मुख हाइड्रोजन ढांचा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: पारादीप बंदरगाह 1966 में आरंभ हुआ था तथा यह भारत का पूर्वी तट का पहला प्रमुख बंदरगाह है।
स्थिर उस्तादियन वर्तमान मामलों की तालिका
| विषय | विवरण |
| एच.वी.आई.सी. की संख्या | देश में चार क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं |
| मिशन से संबंध | राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत |
| मिशन आरंभ वर्ष | 2023 |
| मिशन लक्ष्य | 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन |
| मुख्य प्रक्रियाएँ | विद्युत् अपघटन और बायोमास गैसीकरण |
| हरित हाइड्रोजन मानक | प्रति किलोग्राम उत्पादन पर 2 किलोग्राम से कम कार्बन उत्सर्जन |
| प्रथम हाइड्रोजन हब | दीनदयाल बंदरगाह, वि.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह, पारादीप बंदरगाह |
| नोडल विभाग | विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग |
| ऊर्जा स्रोत | सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा |
| मुख्य उद्देश्य | पूरी हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला का प्रदर्शन |





