वैश्विक मान्यता फिर प्राप्त
ओडिशा के सुनापुर और पुरी गोल्डन बीच को वर्ष 2025–26 के लिए एक बार फिर ब्लू फ्लैग प्रमाणन मिला है। इससे यह सिद्ध होता है कि ये समुद्र तट भारत के सबसे स्वच्छ और सुशासित तटीय क्षेत्रों में शामिल हैं। यह मान्यता डेनमार्क स्थित पर्यावरण शिक्षा फाउंडेशन द्वारा प्रदान की जाती है, जो विश्व के सबसे कठोर तटीय पर्यावरण मानकों को लागू करने के लिए प्रसिद्ध है।
यह उपलब्धि ओडिशा की दीर्घकालिक पर्यावरण सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण पर्यटन और तटीय स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: ब्लू फ्लैग कार्यक्रम 1985 में फ्रांस में शुरू हुआ था।
वैश्विक आकलनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन
गंजाम जिले का सुनापुर समुद्र तट लगातार तीसरे वर्ष प्रमाणित हुआ है, जबकि पुरी गोल्डन बीच लगातार सातवें वर्ष यह मानक हासिल कर चुका है। यह निरंतरता मजबूत निगरानी और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।
ब्लू फ्लैग प्रमाणन 33 मानदंडों पर आधारित होता है, जिनमें जल गुणवत्ता, कचरा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और पर्यावरण शिक्षा शामिल हैं।
स्थिर सामान्य ज्ञान टिप: भारत ने इस कार्यक्रम में पर्यावरण सूचना प्रणाली (एनविस) के माध्यम से भाग लिया।
राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता
साल 2025–26 के लिए पूरे भारत के 13 समुद्र तटों को मान्यता दी गई है, जिनमें 12 को पूर्ण प्रमाणन मिला। ओडिशा कई वर्षों से इस सूची में अग्रणी रहा है, जो राज्य की तटीय शासन-प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन को प्रदर्शित करता है।
नियमित राष्ट्रीय ऑडिट यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रमाणित समुद्र तट सीवेज उपचार, प्लास्टिक प्रबंधन और पर्यटक सुरक्षा के मानकों का पालन करते रहें।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: भारत का पहला ब्लू फ्लैग समुद्र तट ओडिशा का चंद्रभागा था।
इको-पर्यटन और समुदाय की भूमिका
ब्लू फ्लैग मॉडल स्वच्छ जल क्षेत्र, सुरक्षित समुद्र तट और सुव्यवस्थित सुविधाओं के साथ पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देता है। ओडिशा के अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय समुदाय ने सुनापुर की स्वच्छता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सुनापुर समुद्र तट बहुड़ा नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर स्थित है, जो इसे जैव-विविधता और प्राकृतिक संपन्नता प्रदान करता है।
स्थिर सामान्य ज्ञान टिप: ओडिशा की तटरेखा लगभग 480 किलोमीटर लंबी है।
सुविधाएँ और पर्यावरण मानक
सुनापुर का लगभग 800 मीटर लंबा प्रमाणित क्षेत्र व्हीलचेयर-अनुकूल मार्ग, प्रशिक्षित पैरामेडिक्स, लाइफगार्ड टावर और सीसीटीवी निगरानी जैसी सुविधाओं से सुसज्जित है।
समुद्र में किसी प्रकार का प्रदूषण न जाए, इसके लिए शून्य-निर्वहन प्रणाली लागू की गई है। जिला-स्तरीय समुद्र तट प्रबंधन समिति दैनिक संचालन की निगरानी करती है ताकि सभी वैश्विक मानकों का निरंतर पालन सुनिश्चित हो सके।
स्थिर सामान्य ज्ञान तथ्य: बंगाल की खाड़ी विश्व की सबसे बड़ी खाड़ी है।
स्थिर उस्तादियन वर्तमान मामलों की तालिका
| विषय | विवरण |
| सुनापुर प्रमाणन | लगातार तीसरा वर्ष |
| पुरी गोल्डन बीच प्रमाणन | लगातार सातवाँ वर्ष |
| ब्लू फ्लैग मानदंड | 33 बिंदु |
| भारत में मान्यता प्राप्त समुद्र तट | वर्ष 2025–26 में कुल 13 |
| प्रमाणन संस्था | पर्यावरण शिक्षा फाउंडेशन |
| सुनापुर प्रमाणित क्षेत्र | 800 मीटर |
| मुख्य सुविधाएँ | लाइफगार्ड, व्हीलचेयर मार्ग, सीसीटीवी |
| स्थान विशेषता | बहुड़ा नदी और बंगाल की खाड़ी का संगम |
| राज्य तटरेखा | 480 किलोमीटर |
| शून्य-निर्वहन प्रणाली | लागू |





