आंध्र प्रदेश से उभरती अंतरिक्ष प्रतिभा
आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले के निडादवोले की 17 वर्षीय छात्रा कुंचला कैवल्या रेड्डी को अमेरिका के एक प्रतिष्ठित अंतरिक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम में चयनित किया गया है। वह चार वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेंगी, जो उन्हें 2029 के अंतरिक्ष मिशन में शामिल होने की राह पर ले जाएगा। यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भारतीय युवाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है।
स्थिर जीके तथ्य: ISRO की स्थापना 1969 में की गई थी और यह भारत में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
अंतरिक्ष विज्ञान में उनकी शुरुआती रुचि
कैवल्या ने प्रारंभ से ही भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित में गहरी रुचि दिखाई। साधारण परिवार से आने के बावजूद—जहाँ उनके पिता पंचायत सचिव हैं और माँ गृहिणी—उनकी मेहनत ने उन्हें 36 देशों से आए आवेदकों में से चुने गए 150 वैश्विक उम्मीदवारों में स्थान दिलाया। चयन की पुष्टि सीधे अंतरिक्ष एजेंसी के CEO ने की, जिससे उनके विद्यालय और समुदाय में गर्व की भावना पैदा हुई।
चार वर्षीय अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण कार्यक्रम
कैवल्या का प्रशिक्षण कार्यक्रम अमेरिकी निजी अंतरिक्ष संगठन टाइटन्स स्पेस इंडस्ट्रीज़ द्वारा आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण 2026 से 2029 तक फ्लोरिडा में होगा। इसमें शामिल हैं:
• उन्नत स्पेसफ्लाइट सिम्युलेशन
• सर्वाइवल ट्रेनिंग मॉड्यूल
• कक्षा यांत्रिकी (orbital mechanics)
• अंतरिक्ष यान प्रणालियों का तकनीकी प्रशिक्षण
• शून्य-गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) अनुकूलन प्रशिक्षण
स्थिर जीके तथ्य: अंतरिक्ष में जाने वाले पहले व्यक्ति यूरी गगारिन थे (1961)।
2029 के मिशन की प्रमुख बातें
प्रशिक्षण पूर्ण होने पर कैवल्या 2029 के एक लघु अवधि कक्षीय मिशन में शामिल होंगी।
मिशन की विशेषताएँ:
• पृथ्वी की दो परिक्रमाएँ
• ऊँचाई: लगभग 300 किमी
• कुल अवधि: लगभग 5 घंटे
• शून्य-गुरुत्वाकर्षण: लगभग 3 घंटे
यह मिशन युवाओं को वाणिज्यिक अंतरिक्ष विज्ञान में जोड़ने की वैश्विक पहल का हिस्सा है।
वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग में भारत की बढ़ती भूमिका
कैवल्या का चयन ऐसे समय में हुआ है जब भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसे मिशनों ने भारत की वैज्ञानिक स्थिति को विश्व स्तर पर मजबूत किया है। अंतरराष्ट्रीय निजी अंतरिक्ष संगठनों का भारतीय छात्रों के साथ सहयोग बढ़ रहा है, जो उनकी अकादमिक क्षमता और वैज्ञानिक जिज्ञासा को मान्यता देता है।
स्थिर जीके टिप: भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट वर्ष 1975 में प्रक्षेपित किया गया था।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक उदाहरण
कैवल्या की उपलब्धि भारत के युवा छात्रों—विशेषकर STEM क्षेत्रों में करियर बनाने की इच्छुक लड़कियों—के लिए एक प्रेरक उदाहरण है। वह जर्मनी के LMU विश्वविद्यालय से खगोल भौतिकी (Astrophysics) और खगोल विज्ञान (Astronomy) में उच्च शिक्षा लेना चाहती हैं और भविष्य में एक पेशेवर खगोल-भौतिक वैज्ञानिक बनने की आकांक्षा रखती हैं।
उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि छोटे शहरों के छात्र भी वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| नाम | कुंचला कैवल्या रेड्डी |
| आयु | 17 वर्ष |
| गृह नगर | निडादवोले, ईस्ट गोदावरी, आंध्र प्रदेश |
| संगठन | टाइटन्स स्पेस इंडस्ट्रीज़, USA |
| प्रशिक्षण अवधि | 2026–2029 |
| मिशन वर्ष | 2029 |
| मिशन ऊँचाई | लगभग 300 किमी |
| शून्य-गुरुत्वाकर्षण अवधि | लगभग 3 घंटे |
| वैश्विक चयन | 36 देशों से 150 उम्मीदवार |
| करियर लक्ष्य | खगोल-भौतिक वैज्ञानिक और खगोल अनुसंधान विशेषज्ञ |





