नवम्बर 30, 2025 10:45 पूर्वाह्न

तमिलनाडु विधानसभा विधेयकों की स्थिति

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Status of Tamil Nadu Assembly Bills

राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित बिल

तमिलनाडु के राज्यपाल ने UGC विनियमों के विरुद्ध पाए जाने के कारण 10 विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखा है। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कानून केंद्रीय शिक्षा मानकों के अनुरूप रहे।
स्थैतिक जीके तथ्य: अनुच्छेद 200 के अंतर्गत राज्यपाल को कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखने का संवैधानिक अधिकार है।

प्राप्त बिलों का संक्षिप्त विवरण

18 सितंबर 2021 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच राज्यपाल को विधानसभा से 211 विधेयक प्राप्त हुए। इनमें से 170 को अनुमोदन (Assent) दिया गया, 27 राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रखे गए, 4 को संदेशों सहित वापस किया गया और 2 को राज्य सरकार ने वापस ले लिया।
स्थैतिक जीके टिप: अनुच्छेद 200 राज्यपाल को विधेयकों पर अनुमोदन, रोके रखना, वापस करना या राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रखना—ये विकल्प प्रदान करता है।

अनुमोदन संबंधित आँकड़े

राजभवन के अनुसार, प्राप्त विधेयकों में से लगभग 81% को अनुमोदन मिला। उल्लेखनीय रूप से 73 विधेयक एक सप्ताह के भीतर और 61 विधेयक एक माह के भीतर निपटा दिए गए। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि अधिकांश विधेयकों का समुचित और त्वरित निस्तारण हुआ।
स्थैतिक जीके तथ्य: बिल निस्तारण की गति राज्यों में भिन्न हो सकती है, पर तमिलनाडु में ऐतिहासिक रूप से उच्च निस्तारण दर रही है।

विलंब के आरोप और स्पष्टीकरण

विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर अनुमोदन में विलंब के आरोपों के पश्चात राजभवन ने सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी किया। उपलब्ध आँकड़े बताते हैं कि अधिकांश विधेयक समयबद्ध तरीके से निपटाए गए, जिससे प्रशासनिक विलंब संबंधी आशंकाएँ कम होती हैं।
स्थैतिक जीके टिप: अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल सिफारिशों सहित बिल वापस कर सकते हैं, पर यह कार्य संवैधानिक समयसीमा के अनुरूप होना चाहिए।

विधायी प्रक्रिया और अनुपालन

राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रखे जाने वाले विधेयक प्रायः केंद्रीय कानूनों या UGC जैसी नियामक संस्थाओं से संभावित विरोधाभास रखते हैं। अनुपालन सुनिश्चित करने से विधिक चुनौतियों से बचाव होता है और उच्च शिक्षा मानकों में एकरूपता बनी रहती है।
स्थैतिक जीके तथ्य: UGC की स्थापना 1956 में UGC अधिनियम के तहत हुई; यह भारत में उच्च शिक्षा मानकों का नियमन करता है।

शासन-प्रक्रिया की दक्षता

समग्र अनुमोदन प्रक्रिया राज्य की विधायी स्वायत्तता और केंद्रीय विनियमों के अनुपालन के बीच संतुलन को दर्शाती है। राज्यपाल की भूमिका यह सुनिश्चित करती है कि विधेयक संवैधानिक, कानूनी और नियामकीय मानकों को पूरा करें, तभी वे कानून बनें।
स्थैतिक जीके टिप: भारतीय संविधान राज्य विधानसभाओं और राष्ट्रपति के बीच चेक्स एंड बैलेंसेज़ की रूपरेखा प्रदान करता है।

निगरानी और पारदर्शिता

राजभवन का सार्वजनिक स्पष्टीकरण विधायी प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास है। स्पष्ट संचार से बिल निस्तारण में विलंब संबंधी भ्रामक जानकारी को रोका जा सकता है।
स्थैतिक जीके तथ्य: तमिलनाडु में एकसदनीय (Unicameral) व्यवस्था है, जहाँ विधानसभा ही राज्य कानून पारित करने वाला एकमात्र सदन है।

स्थैतिक उस्तादियन करंट अफेयर्स टेबल

विषय विवरण
कुल प्राप्त विधेयक 211 (18 सितम्बर 2021 – 31 अक्टूबर 2025)
अनुमोदित विधेयक 170
राष्ट्रपति हेतु सुरक्षित 27
संदेशों सहित लौटाए गए 4
वापस लिए गए 2
एक सप्ताह में निपटान 73
एक माह में निपटान 61
अनुमोदन प्रतिशत 81%
सुरक्षित रखने का कारण UGC विनियमों से टकराव
प्राधिकरण राजभवन, तमिलनाडु (राज्यपाल)
Status of Tamil Nadu Assembly Bills
  1. तमिलनाडु के राज्यपाल ने राष्ट्रपति के विचारार्थ 10 विधेयक आरक्षित किए।
  2. ये विधेयक यूजीसी के नियमों के विपरीत थे और इनकी केंद्रीय समीक्षा आवश्यक थी।
  3. राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 200 के अंतर्गत कार्यवाही की।
  4. 18 सितंबर 2021 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच विधानसभा से 211 विधेयक प्राप्त हुए।
  5. इनमें से 170 विधेयकों को स्वीकृति मिली, जो 81% अनुमोदन दर को दर्शाता है।
  6. 27 विधेयक राष्ट्रपति के लिए आरक्षित, 4 वापस किए गए, और 2 वापस ले लिए गए
  7. 73 विधेयक एक सप्ताह के भीतर तथा 61 विधेयक एक महीने के भीतर स्वीकृत हुए।
  8. राज्यपाल के स्पष्टीकरण में देरी के आरोपों का उत्तर दिया गया।
  9. आँकड़े दर्शाते हैं कि अधिकांश विधेयक कुशलतापूर्वक संसाधित किए गए।
  10. आरक्षित विधेयकों में मुख्यतः शैक्षिक विनियमन संबंधी विवाद शामिल थे।
  11. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), जो 1956 में गठित हुआ था, उच्च शिक्षा की देखरेख करता है।
  12. राज्यपाल यह सुनिश्चित करते हैं कि विधेयक केंद्रीय कानूनों के अनुरूप हों।
  13. राष्ट्रीय नीति के विपरीत विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की मंज़ूरी आवश्यक होती है।
  14. तमिलनाडु में एक सदनीय विधायिका है जिसमें केवल विधानसभा शामिल है।
  15. राजभवन के स्पष्टीकरण से शासन में पारदर्शिता बढ़ी है।
  16. अनुच्छेद 200 राज्यपाल को मंज़ूरी देने, रोकने या विधेयक लौटाने की अनुमति देता है।
  17. लौटाए गए विधेयकों पर पुनर्विचार के लिए संवैधानिक समयसीमा का पालन आवश्यक है।
  18. यह प्रक्रिया राज्य विधानमंडल में जाँच और संतुलन सुनिश्चित करती है।
  19. राज्यकेंद्र समन्वय संवैधानिक सद्भाव को बनाए रखता है।
  20. तमिलनाडु का रिकॉर्ड कुशल विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक अनुपालन को दर्शाता है।

Q1. किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित रख सकता है?


Q2. 2021 से 2025 के बीच तमिलनाडु के राज्यपाल को कुल कितने विधेयक प्राप्त हुए?


Q3. राज्यपाल द्वारा कितने प्रतिशत विधेयकों को स्वीकृति प्रदान की गई?


Q4. 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए क्यों आरक्षित रखा गया?


Q5. तमिलनाडु में किस प्रकार की विधान प्रणाली (legislature) है?


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