नवम्बर 30, 2025 6:27 पूर्वाह्न

तमिलनाडु में कृत्रिम वर्षा प्रयोग

चालू घटनाएँ: तमिलनाडु, क्लाउड सीडिंग, कृत्रिम वर्षा, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), IITM, तिरुवल्लुर, नीलगिरि, वर्षा वृद्धि, थॉमस हेंडरसन, डी-सैलीनेशन प्लांट्स

Artificial Rain Experiments in Tamil Nadu

प्रारम्भिक पहल

तमिलनाडु ने 1970 में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राज्य सरकार के बीच हुई चर्चाओं से कृत्रिम वर्षा की संभावना पर काम शुरू किया। प्रथम परीक्षण 1973 में तिरुवल्लुर क्षेत्र में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) द्वारा किए गए, परंतु निष्कर्षात्मक परिणाम नहीं मिले।
स्थैतिक जीके तथ्य: IITM का मुख्यालय पुणे में है और यह जलवायु अनुसंधान तथा मानसून अध्ययन में विशेषज्ञ है।

अंतरराष्ट्रीय परीक्षण

1975 में एक कनाडाई कंपनी ने चेन्नई और नीलगिरि के ऊपर क्लाउड सीडिंग किया, जिसकी लागत ₹12 लाख रही और लगभग 20% वर्षा वृद्धि की रिपोर्ट दी गई। 1983 में थॉमस हेंडरसन के नेतृत्व में एक अमेरिकी टीम ने ₹26 लाख की लागत से संचालन किया, जिसके बाद 1984 में अतिरिक्त परीक्षण हुए।
स्थैतिक जीके टिप: क्लाउड सीडिंग में बादलों में सिल्वर आयोडाइड या सोडियम क्लोराइड जैसे पदार्थों का प्रक्षेपण कर वर्षा को उद्दीप्त किया जाता है।

राज्य सरकार की पहल

क्लाउड सीडिंग क्षमता बढ़ाने हेतु तमिलनाडु सरकार ने 1983 में विशेष रूप से कृत्रिम वर्षा प्रयोगों के लिए एक विमान खरीदा। 1993 में नए परीक्षण किए गए, पर वैज्ञानिकों ने देखा कि वर्षा वृद्धि सामान्य से 20% से अधिक नहीं थी।

बाद के विकास

2003 में मुख्यमंत्री जे. जयललिता के कार्यकाल में कृत्रिम वर्षा पुनः प्रारम्भ करने की घोषणा हुई, किन्तु प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों के कारण क्रियान्वयन नहीं हुआ। समय के साथ कृष्णा जल परियोजनाएँ, वीरानम टैंक और डी-सैलीनेशन संयंत्रों के निर्माण से राज्य की जल-सुरक्षा में सुधार हुआ और कृत्रिम वर्षा पर निर्भरता कम हुई।
स्थैतिक जीके तथ्य: वीरानम टैंक तमिलनाडु के सबसे बड़े टैंकों में से एक है, जिसका निर्माण चोल काल में हुआ और यह आज भी चेन्नई की जल आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक है।

प्रभाव और प्रासंगिकता

तमिलनाडु में कृत्रिम वर्षा प्रयोगों ने मौसम विज्ञान अनुसंधान के लिए उपयोगी डेटा दिया और परिवर्तनीय मौसम परिस्थितियों में क्लाउड सीडिंग की चुनौतियों को रेखांकित किया। प्रारम्भिक परीक्षणों में मध्यम सफलता दिखाई दी, पर आधुनिक जल अवसंरचना के कारण राज्य की कृत्रिम वर्षा पर निर्भरता घट गई।
स्थैतिक जीके टिप: चेन्नई के मिनजूर और नेम्मेली जैसे डी-सैलीनेशन प्लांट्स, विशेषकर शुष्क मौसम में, शहरी जलापूर्ति में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।

Static Usthadian Current Affairs Table

विषय विवरण
पहला क्लाउडसीडिंग परीक्षण 1973, तिरुवल्लुर (IITM)
कनाडाई संचालन 1975, चेन्नई और नीलगिरि; ₹12 लाख; ~20% वर्षा वृद्धि
अमेरिकी संचालन 1983, थॉमस हेंडरसन के नेतृत्व में; ₹26 लाख
राज्य विमान खरीद 1983, क्लाउड सीडिंग हेतु
1993 के परीक्षण वर्षा वृद्धि ≤ 20%
2003 योजना CM जे. जयललिता द्वारा घोषणा; क्रियान्वित नहीं
आधुनिक जल स्रोत कृष्णा जल, वीरानम टैंक, डी-सैलीनेशन प्लांट्स
क्लाउड सीडिंग विधि सिल्वर आयोडाइड/सोडियम क्लोराइड का बादलों में प्रक्षेपण
वीरानम टैंक चोल काल में निर्मित; चेन्नई की सेवा में
डीसैलीनेशन संयंत्र मिनजूर और नेम्मेली; शहरी जल आपूर्ति में योगदान
Artificial Rain Experiments in Tamil Nadu
  1. तमिलनाडु ने 1970 के दशक में कृत्रिम वर्षा प्रयोग (Cloud Seeding Experiments) शुरू किए।
  2. 1973 में तिरुवल्लूर में IITM पुणे (भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान) द्वारा पहला परीक्षण किया गया।
  3. IMD (भारतीय मौसम विभाग) और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से प्रारंभिक अध्ययन शुरू किए।
  4. कनाडाई फर्म (1975) ने लगभग 20% वर्षा वृद्धि हासिल की।
  5. थॉमस हेंडरसन के नेतृत्व में अमेरिकी टीम (1983) ने परीक्षण किया, जिसकी लागत ₹26 लाख थी।
  6. 1983 में मेघबीजारोपण (Cloud Seeding) के लिए राज्य विमान खरीदा गया
  7. 1993 के परीक्षणों में ≤20% वर्षा सुधार देखा गया।
  8. मुख्यमंत्री जयललिता (2003) द्वारा पुनरुद्धार योजना लागू नहीं की गई।
  9. कृष्णा जल परियोजनाओं और विलवणीकरण संयंत्रों के कारण निर्भरता कम हुई।
  10. मेघबीजारोपण में सिल्वर आयोडाइड (AgI) या सोडियम क्लोराइड (NaCl) का उपयोग किया जाता है।
  11. नीलगिरी और चेन्नई प्रमुख परिचालन क्षेत्र थे।
  12. प्रयोगों से बहुमूल्य मौसम संबंधी आँकड़े प्राप्त हुए।
  13. IITM, पुणे मानसून और जलवायु अनुसंधान में विशेषज्ञता रखता है।
  14. चोल काल में निर्मित वीरनम तालाब आज चेन्नई की सेवा करता है।
  15. विलवणीकरण संयंत्र (मिनजुर, नेम्मेली) चेन्नई की जल आवश्यकताओं को पूरा करते हैं।
  16. वर्षा वृद्धि प्रयोगों ने सीमित लेकिन मापनीय सफलता प्रदर्शित की।
  17. बीजारोपण दक्षता पर अनुसंधान अंतर्दृष्टि प्रदान की।
  18. मेघबीजारोपण की प्राकृतिक मौसम पर निर्भरता को रेखांकित किया गया।
  19. आधुनिक जल अवसंरचना के कारण आवश्यकता में कमी आई।
  20. यह प्रयोग भारत के जलवायु इतिहास में प्रारंभिक वैज्ञानिक वर्षा प्रयासों के रूप में महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

Q1. तमिलनाडु का पहला बादल बीजारोपण (Cloud-Seeding) परीक्षण कब किया गया था?


Q2. 1975 में चेन्नई में बादल बीजारोपण का कार्य किस विदेशी देश ने किया था?


Q3. 1983 में अमेरिकी बादल बीजारोपण अभियान का नेतृत्व किसने किया था?


Q4. कौन-सा चोल कालीन जलाशय आज भी चेन्नई को पानी की आपूर्ति करता है?


Q5. बादल बीजारोपण के लिए सामान्यतः किन पदार्थों का उपयोग किया जाता है?


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